
राज्य से लेकर केंद्र तक प्रतापगढ़ का दबदबा (Img: Dynamite News)
Pratapgarh: 'संगम नगरी' प्रयागराज की सीमा पर बसा 'बेल्हा' (प्रतापगढ़) राष्ट्रीय और राज्य की राजनीति में एक नए पावर सेंटर के तौर पर उभर रहा है। यह उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक ऐतिहासिक पल है, जहां सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष, दोनों ही तरफ युवा और अनुभवी नेताओं के रूप में प्रतापगढ़ के नेताओं के हाथों में नेतृत्व की बागडोर है।
फिलहाल, बेल्हा के नेता राज्य की दो सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टियों के संगठन में ऊंचे पदों पर हैं। भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रोहित मिश्रा और उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की प्रदेश अध्यक्ष व रामपुर खास से विधायक आराधना मिश्रा 'मोना' - दोनों ही प्रतापगढ़ जिले से हैं। इसके अलावा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और संसद में उप-नेता प्रमोद तिवारी भी इसी क्षेत्र से आते हैं।
प्रतापगढ़ का असर सिर्फ राज्य-स्तरीय संगठनों में ही नहीं, बल्कि देश के उच्च सदन यानी राज्यसभा में भी साफ दिखता है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी; बीजेपी के राज्यसभा सांसद अमरपाल मौर्य और राधाकांत ओझा; और कांग्रेस के राज्यसभा सांसद व राष्ट्रीय प्रवक्ता इमरान प्रतापगढ़ी - ये सभी इसी जिले से हैं। एक साथ चार सांसदों की मौजूदगी ने दिल्ली तक बेल्हा का राजनीतिक कद बढ़ा दिया है।
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राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, यह प्रतापगढ़ के लिए बहुत गर्व की बात है, क्योंकि इस जिले ने राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाले पांच बड़े नेता दिए हैं। बेल्हा में राजनीतिक जागरूकता और संघर्ष की परंपरा रही है, जिससे हमेशा प्रभावशाली नेता निकले हैं। हालांकि, इस स्थिति का एक हैरान करने वाला पहलू भी है, जो राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
मौजूदा राज्य सरकार के कार्यकाल में पहली बार ऐसी स्थिति बनी है कि पार्टी संगठनों में इतना बड़ा प्रभाव होने के बावजूद प्रतापगढ़ जिले का कैबिनेट में कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। इतिहास बताता है कि SP, BSP और BJP की पिछली सरकारों में इस जिले से हमेशा दो या तीन कैबिनेट मंत्री शामिल रहे हैं। आजादी के बाद से बेल्हा का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख लोगों में स्वर्गीय पंडित मुनेश्वर दत्त उपाध्याय, स्वर्गीय राजा दिनेश सिंह (पूर्व केंद्रीय मंत्री), राजा बजरंग बहादुर सिंह (बद्री एस्टेट), राजा अजीत प्रताप सिंह, बाबू लाल गौर (मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री), प्रमोद तिवारी (पूर्व नौ बार के विधायक और मंत्री), रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया (पूर्व कैबिनेट मंत्री), राजकुमारी रत्ना सिंह (दो बार की सांसद), प्रो. शिवकांत ओझा (पूर्व कैबिनेट मंत्री), राजेंद्र प्रताप सिंह उर्फ मोती सिंह (पूर्व कैबिनेट मंत्री), बृजेश शर्मा (पूर्व मंत्री) और स्वामी प्रसाद मौर्य (कैबिनेट मंत्री) शामिल हैं।
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राजनीतिक हलकों में अभी सबसे बड़ा सवाल यह है कि संगठन के लिए अहम होने के बावजूद सरकार में बेल्हा का प्रतिनिधित्व शून्य क्यों है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ताधारी BJP 2027 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले इस असंतुलन को ठीक करने के लिए कोई बड़ा कदम उठा सकती है। दूसरी ओर कांग्रेस के लिए यह पूरे राज्य में अपना 'प्रतापगढ़ मॉडल' लागू करने और खोई हुई जमीन वापस पाने का एक शानदार मौका है।
Location : Pratapgarh
Published : 10 October 2026, 5:16 PM IST