UP Election 2027: अखिलेश यादव ने खोल दिया पहला बड़ा पत्ता, 26 नवंबर को करेंगे ये ऐलान

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ऐलान किया है कि पार्टी 26 नवंबर 2026 को संविधान दिवस के मौके पर अपना चुनावी घोषणापत्र जारी करेगी। उन्होंने इसे ‘PDA का प्रणपत्र’ नाम दिया है। PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग सपा की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 19 October 2026, 1:41 PM IST

Lucknow: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सियासी हलचल तेज होने लगी है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुनाव से पहले अपने सबसे अहम राजनीतिक मुद्दे PDA को लेकर बड़ा ऐलान किया है। अखिलेश यादव ने घोषणा की है कि समाजवादी पार्टी 26 नवंबर 2026 को संविधान दिवस के मौके पर अपना चुनावी घोषणापत्र जारी करेगी। उन्होंने इसे ‘PDA का प्रणपत्र’ नाम दिया है। इस ऐलान के बाद यूपी की राजनीति में नए चुनावी समीकरणों और सपा की रणनीति को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

26 नवंबर को जारी होगा चुनावी घोषणापत्र

अखिलेश यादव ने सोमवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर अपने चुनावी घोषणापत्र की तारीख का ऐलान किया। उन्होंने लिखा, ‘सत्ताइस का संकल्प: PDA का प्रणपत्र।’ इसके साथ ही उन्होंने कहा कि संविधान दिवस यानी 26 नवंबर 2026 के लोकतांत्रिक अवसर पर समाजवादी पार्टी जनता का घोषणापत्र जारी करेगी। सपा प्रमुख के इस ऐलान को आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। पार्टी ने फिलहाल घोषणापत्र के विस्तृत बिंदुओं का खुलासा नहीं किया है, लेकिन ‘PDA का प्रणपत्र’ नाम से साफ है कि पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग पार्टी की राजनीतिक रणनीति के केंद्र में बने रहेंगे।

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क्या है PDA की राजनीति

PDA का मतलब पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक है। समाजवादी पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान इस राजनीतिक समीकरण को प्रमुखता से उठाया था। पार्टी ने इन वर्गों की भागीदारी, प्रतिनिधित्व और अधिकारों को अपने अभियान का अहम हिस्सा बनाया। लोकसभा चुनाव 2024 में समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से 37 सीटों पर जीत हासिल की थी। इस प्रदर्शन ने प्रदेश की राजनीति में पार्टी की स्थिति मजबूत की और PDA की रणनीति को चर्चा में ला दिया।

विपक्षी नेताओं को सपा में लाने की रणनीति

PDA के विस्तार के लिए समाजवादी पार्टी दूसरे दलों के नेताओं को भी अपने साथ जोड़ने की कोशिश करती रही है। खबर के मुताबिक, बीजेपी और कांग्रेस से जुड़े कई पिछड़े और दलित नेता सपा में शामिल हुए हैं। पार्टी इसे अपने सामाजिक आधार के विस्तार के तौर पर देखती है। अखिलेश यादव लगातार अपनी जनसभाओं में सामाजिक न्याय और पिछड़े-दलित वर्गों के सम्मान का मुद्दा उठाते रहे हैं। उनका कहना है कि जो व्यक्ति पीड़ित है, वह PDA का हिस्सा है और समाजवादी पार्टी में सभी की बात सुनी जाएगी।

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इन मुद्दों पर युवाओं को साधने की तैयारी

अखिलेश यादव के सामने 2027 के चुनाव में केवल PDA के सामाजिक समीकरण को मजबूत करने की चुनौती नहीं है, बल्कि युवाओं को अपने साथ जोड़ना भी अहम होगा। हाल के महीनों में रोजगार, भर्ती परीक्षाओं और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर युवाओं के बीच नाराजगी सामने आई है। समाजवादी पार्टी ने इन मुद्दों पर युवाओं के आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों को समर्थन दिया है।

मतदाता सूची पर भी सपा की नजर

समाजवादी पार्टी चुनावी तैयारियों के साथ मतदाता सूचियों को लेकर भी सक्रिय है। खबर के मुताबिक, पार्टी ने बूथ स्तर पर PDA प्रहरियों की तैनाती की है। इनका उद्देश्य मतदाता सूचियों की जांच करना और कथित फर्जी या संदिग्ध वोटों से जुड़े मामलों पर नजर रखना है। चुनाव से पहले मतदाता सूची की शुद्धता और पात्र मतदाताओं के नाम शामिल होना राजनीतिक दलों के लिए अहम मुद्दा रहता है। सपा इस काम के जरिए अपने समर्थकों को बूथ स्तर पर सक्रिय रखने और चुनावी प्रक्रिया पर निगरानी बढ़ाने की कोशिश कर रही है।

Location :  Lucknow

Published :  19 October 2026, 1:02 PM IST