Bharat Tiwari Encounter: ‘बड़ी मछलियों को बचाने के लिए हुआ भरत तिवारी का एनकाउंटर’, पप्पू यादव के दावे गरमाई सियासत

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में एफआईआर दर्ज होने के बाद बिहार की राजनीति गरमा गई है। सांसद पप्पू यादव ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर ऐसे सवाल उठाए हैं, जिन्होंने कई नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। उन्होंने सिर्फ एनकाउंटर ही नहीं, बल्कि सिस्टम और बड़े अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं।

Post Published By: Subhash Raturi
Updated : 24 June 2026, 1:55 PM IST

Patna: बिहार के भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर सियासत तेज हो गई है। भरत तिवारी मुठभेड़ मामले में एफआईआर दर्ज होने पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद पप्पू यादव ने घटनाक्रम पर अपने विचार साझा किए। इसके अलावा उन्होंने कई अन्य राजनीतिक और सार्वजनिक मुद्दों पर भी टिप्पणी की।

मामले को लेकर क्या बोले पप्पू यादव?

भरत तिवारी एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने पर पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने आईएएनएस से कहा, "बड़ी मछलियों को बचाने के लिए बार-बार कई साजिशें रची गईं। भरत तिवारी एक साधारण समाज-सेवक थे जो जमुनिया गांव के बेघर हुए गरीबों के लिए लड़ते थे, इस गांव को मैंने बचाया था। हेडक्वार्टर में बैठे बड़े और घमंडी लोग खुद को कानून, संविधान और लोकतंत्र से ऊपर समझते हैं। ये 'बड़ी मछलियां' सिस्टम का गलत फायदा उठाकर करोड़ों कमाती हैं और प्रशासन चलाती हैं।

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क्या हत्या हेडक्वार्टर की मिलीभगत के बिना हुई?

पप्पू यादव ने कहा, " इसकी जांच होनी चाहिए कि हेडक्वार्टर से डीएसपी को किसने फोन किया, यह मामला किसके ऑफिस तक गया और किन सीनियर अधिकारियों से संपर्क किया गया। डीएसपी ने मना कर दिया था और कहा था कि अगर एक पागल हाथी को मारा जा सकता है, तो एक पागल इंसान को क्यों नहीं? एसटीएफ की टीम भेजकर भरत को मरवाया गया। डीएसपी और स्टेशन इंचार्ज ने खुद हत्या नहीं की थी। भरत तिवारी के अंदरुनी जगहों पर गोली मारी गई।"

पप्पू यादव ने कहा, "खाने-पीने जैसी छोटी सी बात पर पासवान समुदाय के दो लोगों की हत्या कर दी गई, फिर भी कोई वहां नहीं जा रहा है, कोई मदद नहीं कर रहा है और जीतनराम मांझी और चिराग पासवान जैसे नेता भी वहां नहीं जा रहे हैं। एक अत्यंत पिछड़े समुदाय की बेटी के साथ दो बार गैंगरेप हुआ, फिर भी किसी ने इस पर बात नहीं की। नौसा नगर में जातिगत पहचान के आधार पर करीब 100 महिलाओं को मारा गया।

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डिग्री कॉलेज में आंदोलन के कारण छात्राओं और शिक्षक को जेल भेज दिया गया। इस पर भी कोई कुछ नहीं बोला। भरत तिवारी का एनकाउंटर गलत था। सवाल सिर्फ एनकाउंटर का नहीं, पूरे सिस्टम पर है। भरत तिवारी की शहादत कई बच्चों के भविष्य को बचा सकती है और कानून की स्थापना कर दे।"

--आईएएनएस इनपुट

Location :  Patna

Published :  24 June 2026, 1:55 PM IST