
दो चुनाव आयुक्तों की शिकायत पर RTI से खुलासा(Img- Pinterest)
New Delhi: चुनाव आयोग के अंदर अधिकारियों के काम करने के तरीके को लेकर विवाद सामने आया है। सूचना के अधिकार (RTI) से मिली जानकारी के मुताबिक दो चुनाव आयुक्तों ने वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग के खिलाफ शिकायत की थी। आरोप था कि उन्होंने दूसरे अधिकारियों से चर्चा किए बिना काम की जिम्मेदारियों में बदलाव कर दिया। दोनों आयुक्तों ने जुलाई 2026 में कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जताई थी। हालांकि, इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई।
यह जानकारी RTI कार्यकर्ता और रिटायर्ड कमोडोर लोकेश के. बत्रा को मिले जवाब से सामने आई है। मनीष गर्ग को 2 सितंबर 2024 को कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) के जरिए चुनाव आयोग में नियुक्त किया गया था। अब उनके फैसलों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की शिकायत सामने आने के बाद आयोग के कामकाज पर चर्चा शुरू हो गई है।
जानकारी के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 29 जुलाई 2026 को कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन को अलग-अलग पत्र लिखे थे। दोनों ने आरोप लगाया कि मनीष गर्ग ने वरिष्ठ अधिकारियों के बीच काम की जिम्मेदारियां बदलने का आदेश बिना चर्चा के जारी किया। उनका कहना था कि इस फैसले से पहले न तो आयोग से बात की गई और न ही संबंधित अधिकारियों से सलाह ली गई।
काम की जिम्मेदारियों में बदलाव को लेकर मतदाता सूची के आईटी सिस्टम की निगरानी पर सवाल उठे थे। रिपोर्ट के मुताबिक, इस बदलाव से कामकाज पर नियंत्रण एक जगह केंद्रित होने की चिंता पैदा हुई थी। दोनों चुनाव आयुक्तों ने इसी मुद्दे पर आपत्ति जताई थी। उनका मानना था कि आयोग के कामकाज से जुड़े ऐसे फैसले आपसी चर्चा के बाद लिए जाने चाहिए।
3 अगस्त की फाइल में दर्ज जानकारी के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने अपने स्तर पर शिकायत की थी। कैबिनेट सचिवालय का कहना था कि पूरे चुनाव आयोग की ओर से आधिकारिक शिकायत नहीं मिलने पर कार्रवाई करना उचित नहीं होगा। ऐसा करने से आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के काम में दखल देने का सवाल उठ सकता था। इसलिए शिकायत पर कार्रवाई नहीं की गई। दोनों आयुक्तों को पत्र मिलने की जानकारी दी गई और शिकायत की प्रतियां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यालय को भी भेजी गईं।
इस मामले में 30 जुलाई 2026 को दोनों चुनाव आयुक्तों ने मनीष गर्ग के काम के बंटवारे से जुड़े आदेश को रद्द कर दिया था। उन्होंने कहा कि जब तक आयोग किसी नए बदलाव पर सहमत नहीं होता, तब तक पुरानी व्यवस्था जारी रहेगी। यानी अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव को लेकर आयोग के भीतर ही आपत्ति सामने आ गई थी।
25 सितंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट में द इंडियन एक्सप्रेस ने बताया था कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने करीब 10 महीनों में आयोग के फैसलों और काम करने के तरीकों पर कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। इनमें मतदाता सूची के डेटा पर नियंत्रण और अधिकारियों को जरूरी जानकारी नहीं दिए जाने जैसे मुद्दे शामिल थे। इन घटनाओं से आयोग के भीतर फैसले लेने के तरीके को लेकर सवाल उठे हैं।
RTI से सामने आई जानकारी के बाद चुनाव आयोग के भीतर फैसले लेने और अधिकारियों की जिम्मेदारियां तय करने के तरीके पर चर्चा तेज हो गई है। दो चुनाव आयुक्तों ने एक वरिष्ठ अधिकारी के फैसलों पर सवाल उठाए, लेकिन कैबिनेट सचिवालय ने औपचारिक शिकायत नहीं होने के कारण कार्रवाई नहीं की। इस पूरे मामले में अधिकारियों के बीच तालमेल और फैसले लेने की प्रक्रिया अहम मुद्दे बनकर सामने आए हैं।
Location : New Delhi
Published : 23 October 2026, 10:08 AM IST