
टिकट कटने की चर्चा से बढ़ी विधायकों की बेचैनी (Source: Pinterest)
Lucknow: उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर टिकट को लेकर चर्चाएं तेज होने लगी हैं। टिकट कटने की आशंका से घिरे कुछ मौजूदा विधायकों की चिंता बढ़ गई है। पार्टी जहां मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने पर जोर दे रही है, वहीं कुछ विधायक अपनी दावेदारी सुरक्षित करने में जुटे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि चुनावी तैयारियों के बीच टिकट की चिंता पार्टी के अभियान पर कितना असर डाल सकती है।
भाजपा में मौजूदा विधायकों के कामकाज, क्षेत्र में सक्रियता, जनता के बीच छवि और संभावित सत्ता विरोधी रुझान को लेकर चर्चाएं हो रही हैं। प्रत्याशी चयन में जातीय समीकरण, स्थानीय संगठन की राय और चुनावी संभावनाओं को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ऐसे में जिन विधायकों को अपनी दावेदारी कमजोर पड़ने का अंदेशा है, वे समर्थकों को सक्रिय करने और पार्टी के प्रभावशाली पदाधिकारियों के बीच अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। कुछ विधायक अपनी उपलब्धियां गिनाने और नेतृत्व तक अपनी बात पहुंचाने में जुटे हैं।
पार्टी के सामने इस समय दोहरी चुनौती है। एक ओर आगामी चुनाव के लिए संगठन को मजबूत करना है, वहीं दूसरी ओर टिकट को लेकर विधायकों के बीच पैदा हो रही बेचैनी को भी संभालना है।
विधायकों के लिए क्षेत्र में जनसंपर्क, स्थानीय कार्यकर्ताओं से तालमेल और अपनी राजनीतिक पकड़ साबित करना महत्वपूर्ण हो गया है। उन्हें आशंका है कि जनता के बीच नाराजगी, कमजोर जनसंपर्क या संगठन के साथ तालमेल की कमी उनकी दावेदारी को प्रभावित कर सकती है।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत पात्र मतदाताओं के नाम शामिल कराने, गलतियों को दूर कराने और लोगों को जागरूक करने के लिए बूथ स्तर पर काम किया जा रहा है। पार्टी संगठन की कोशिश है कि इस प्रक्रिया में कार्यकर्ता सक्रिय भूमिका निभाएं।
हालांकि, टिकट को लेकर बढ़ती चर्चाओं के बीच कुछ विधायकों की प्राथमिकताएं बदलने की आशंका जताई जा रही है। यदि स्थानीय जनसंपर्क और संगठनात्मक गतिविधियों पर ध्यान कम होता है, तो इसका असर पार्टी की चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है। मतदाता सूची से जुड़े कार्यों में पात्र मतदाताओं के नाम शामिल कराना भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
भाजपा नेतृत्व के सामने बूथ प्रबंधन, SIR अभियान और आगामी चुनाव की तैयारियों के बीच तालमेल बनाए रखने की चुनौती है। टिकट का फैसला करते समय पार्टी को मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन, स्थानीय समीकरण और संगठन की राय जैसे पहलुओं पर विचार करना होगा।
अब देखना होगा कि टिकट को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच भाजपा अपने विधायकों की बेचैनी को कैसे संभालती है और संगठनात्मक तैयारियों को किस तरह आगे बढ़ाती है।
Location : Lucknow
Published : 19 October 2026, 9:19 AM IST