AIMIM की 22 वर्षीय नेता और मुंब्रा से नवनिर्वाचित BMC कॉर्पोरेटर सहर शेख एक बार फिर अपने बयान को लेकर सुर्खियों में हैं। सहर शेख ने जीतने के बाद कहा था, “मुंब्रा को हरा रंग दो” जिसके बाद अब उनको माफी भी मांगनी पड़ी है।

सहर शेख ने कहा कि उनकी बात को जानबूझकर सांप्रदायिक रंग दिया गया। उन्होंने कहा कि जैसे केसरिया रंग को हिंदुओं से जोड़ा जाता है, वैसे ही हरा रंग मुसलमानों से जुड़ा माना जाता है, लेकिन इसका मतलब किसी समुदाय को अलग करना नहीं है।
सहर शेख का कहना है कि उनके शब्दों का गलत अर्थ निकाला गया और उनका इरादा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं था। उन्होंने साफ कहा कि AIMIM सिर्फ मुसलमानों की पार्टी नहीं है और उनकी पार्टी पर भरोसा करने वालों में हिंदू भाई-बहन भी शामिल हैं।
सहर शेख ने कहा कि भारत केवल किसी एक समुदाय का नहीं है, बल्कि यहां अलग-अलग धर्म और जातियों के लोग मिल-जुलकर रहते हैं। उनका दावा है कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं।
सहर शेख के “मुंब्रा को हरा रंग दो” बयान के बाद बीजेपी नेता किरीट सोमैया ने मुंब्रा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप लगाया गया था कि इस बयान से हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची है। इसके बाद पुलिस ने सहर शेख को दो बार पूछताछ के लिए बुलाया।
किरीट सोमैया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि सहर शेख ने पुलिस को लिखित माफीनामा सौंपा है। माफी पत्र में सहर ने कहा कि उनकी पार्टी का झंडा भले हरा हो, लेकिन वह पूरी जिंदगी तिरंगे के लिए काम करेंगी।
सहर शेख कोई और नहीं बल्कि युनुस शेख की बेटी हैं, जो एनसीपी नेता जितेंद्र आव्हाण के करीबी माने जाते हैं। टिकट न मिलने के बाद युनुस शेख ने बेटी को AIMIM से चुनाव लड़ाया।
आपको बता दें कि सहर ने वार्ड 30 से एनसीपी उम्मीदवार को करीब 400 वोटों से हराया। इस मुकाबले में बीजेपी, कांग्रेस और शिवसेना के उम्मीदवार भी मैदान में थे। जीत के बाद दिए गए उनके बयानों ने मुंब्रा की राजनीति को और गरमा दिया है।