The Candid Talk: अमेठी की गलियों से 1500 करोड़ तक का सफर! राजेश मसाले की कहानी जो आपको हैरान कर देगी

आज डाइनामाइट न्यूज़ के सबसे चर्चित शो The Candid Talk पॉडकास्ट में हमारे साथ हैं राजेश मसाले के फाउंडर राजेश कुमार अग्रहरी। डाइनामाइट न्यूज़ के एडिटर-इन-चीफ मनोज टिबड़ेवाल आकाश के साथ खास बातचीत में जानेंगे कि राजेश कुमार अग्रहरी और उनके ब्रांड राजेश मसाले की सफलता की कहानी क्या है?

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 29 March 2026, 2:47 PM IST

New Delhi: मनोज टिबड़ेवाल आकाश ने The Candid Talk पॉडकास्ट के शुरुआत में कहा कि गांव की गलियों में राजेश मसाले का सपना देखा गया और आज यह पूरे देश में एक चर्चित ब्रांड बन चुका है। इसके पीछे की शुरुआत और संघर्ष की कहानी हमारे दर्शकों के लिए बेहद प्रेरणादायक है।

तो मंज़िल जरूर आपके कदम चूमेगी

राजेश कुमार अग्रहरी ने बताया कि हर इंसान के जीवन में एक लक्ष्य (ऑब्जेक्टिव) होता है। हर कोई कुछ न कुछ हासिल करना चाहता है। लेकिन लक्ष्य पाने के लिए दूरदृष्टि, पक्का इरादा, कड़ी मेहनत और ईमानदारी की जरूरत होती है। अगर आप इन सभी गुणों को अपनाकर चलते हैं, तो मंज़िल जरूर आपके कदम चूमेगी।

कैसे की शुरुआत

राजेश कुमार अग्रहरी कहते हैं, “मैं अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देता हूँ। मेरे पिताजी शिक्षित नहीं थे, लेकिन उनकी दूरदृष्टि बहुत बड़ी थी। अमेठी में जब हमने अपनी पहली मसाला चक्की लगाई, तब मैंने देखा कि देश के कोने-कोने से लोग मसालों की मांग कर रहे हैं। मेरे पिताजी ने मजदूरी पर पिसाई के लिए 16 इंच की चक्की और 10 हॉर्स पावर इंजन लगाया। मैं पढ़ाई पूरी करने के बाद सोचता था कि क्यों न इस व्यवसाय को बड़े पैमाने पर शुरू किया जाए।”

कितने रुपये से शुरू किया रोजगार

उन्होंने आगे बताया कि उनके माता-पिता ने उन्हें शुरुआती पूंजी प्रदान की। उनकी मां ने 1997 में ₹1 लाख और प्रधानमंत्री रोजगार योजना के तहत ₹2 लाख का लोन दिलवाया। इस छोटे से निवेश से ही आज राजेश मसाले देश के टॉप 3 मसाला ब्रांड में शामिल हो चुका है।

जब 10-15 हजार रुपये वेतन वाली नौकरी भी नहीं मिली तो

राजेश कुमार अग्रहरी ने बताया, "रोजगार की तलाश में जब मैंने 1995 में बीए पूरी की, तब मुझे कोई नौकरी नहीं मिली। क्लर्क की नौकरी के लिए कोशिश की, लेकिन 10-15 हजार रुपये वेतन वाली नौकरी भी नहीं मिली। उस समय मेरी मां ने मेरे व्यापार की शुरुआत के लिए मुझे ₹1 लाख दिए। मैं अपने माता-पिता का इकलौता संतान था और इस ₹1 लाख की पूंजी के साथ, बैंक और प्रधानमंत्री रोजगार योजना की सहायता लेकर मैंने व्यवसाय शुरू किया।"

कैसे दिमाग में आया "राजेश मसाले" का रोजगार?

राजेश का कहना है, "पढ़ाई के दौरान मेरा खाना बनाने और खिलाने का शौक भी था। वहीं से हमें मसाले बनाने का विचार आया। शुरू में दोस्तों के साथ बैठकर हम मसाले बनाते और बेचते थे। कभी-कभी कुछ कमी रह जाती, कभी-कभी उत्पादन में चुनौती आती, लेकिन हम लगातार कोशिश करते रहे। एक दिन लोगों ने कहा कि यह मसाला मार्केट में मौजूद डिब्बाबंद ब्रांडों से कहीं बेहतर है। क्यों न इसे एक ब्रांड बनाया जाए?”

पिता को लगता था इस बात से डर

उन्होंने आगे The Candid Talk पॉडकास्ट में बताया कि मेरे पिता जो अशिक्षित थे, उन्होंने कहा कि इसे मेरे नाम पर मत करो, क्योंकि इससे मुझे कठिनाइयाँ होंगी। पहले जैसे सैलरी टैक्स और इनकम टैक्स में बहुत काम-काज होता था। इसलिए मैंने अपने नाम पर ही “राजेश मसाला” का ब्रांड बनाया। आज जैसा कि आप जानते हैं, राजेश मसाला पूरे देश में और विदेशों में भी लोकप्रिय हो गया है। इसकी मांग इतनी बढ़ गई है कि यह सभी बड़े ब्रांडों से बेहतर बिक रहा है। राजेश ने संघर्ष और चुनौतियों के बारे में कहा, “व्यवसाय में कई बार झटके लगे, लेकिन मेरे पिताजी कहते थे कि जिस पेड़ पर चढ़ो, उसे अंत तक मत छोड़ो। यही मेरी ताकत रही।

समाज के लिए अहम योगदान

राजेश कुमार अग्रहरी कहते हैं, " मैंने अपनी कमाई का 25% हिस्सा 25 प्रतिशत हिस्सा चैरिटी के निकालता हूं। अमेठी अक्सर अपने राजनीतिक महत्व के लिए जाना जाता है। लेकिन अगर आप आज अमेठी के जिला अस्पताल जाएँ, तो वहाँ लगे ऑक्सीजन प्लांट को देख सकते हैं, जिसे मैंने जर्मनी से आयातित उपकरणों के माध्यम से स्थापित करवाया। इसके अलावा हमने दो हेल्थ एटीएम, अल्ट्रासाउंड मशीन और अन्य मेडिकल सुविधाएँ भी उपलब्ध करवाई हैं। हमारे जनपद में जितने भी गंभीर रोग से ग्रस्त लोग हैं, प्रधानमंत्री की योजनाओं के तहत सक्षम लोग उनके लिए आए हैं। हमारे प्रतिष्ठान द्वारा इन सभी रोगियों को स्वास्थ्य सुविधाएँ और उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं।"

शिक्षा के क्षेत्र में अहम योगदान

शिक्षा के क्षेत्र में भी हमने कई पहल की हैं। अमेठी में देवीपाटन प्राइमरी पाठशाला का निर्माण किया गया, जिसकी लागत लगभग डेढ़ करोड़ रुपये है। इस स्कूल में लगभग 95% बच्चे दलित समुदाय से आते हैं। यह वही क्षेत्र है, जहाँ पहले काशीराम जी चुनाव लड़ते थे, और वहाँ लगभग 90% आबादी दलित है।"

राजेश मसाले का टर्नओवर

राजेश मसाले का टर्नओवर ₹200,000 से बढ़कर 1500 करोड़ रुपए हो चुका है। 3240 लोगों को स्थायी रोजगार मिला है। हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें भामाशाह पुरस्कार से भी सम्मानित किया। राजेश कुमार युवाओं को यही संदेश देते हैं, “पहले अपनी मांग पैदा करो, फिर उत्पादन बढ़ाओ। शिक्षित रहो, संगठित रहो और समाज के लिए काम करो। सफलता और समृद्धि मेहनत और ईमानदारी से मिलती है।”

राजेश कुमार का मानना है कि सफलता केवल व्यवसाय में नहीं, बल्कि समाज सेवा और नैतिकता में भी मापी जाती है। उनका जीवन और संघर्ष हर युवा के लिए प्रेरणा है कि चाहे आप किसी भी छोटे शहर या गाँव से हों, सही दृष्टि और मेहनत से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।

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  • New Delhi

Published : 
  • 29 March 2026, 2:47 PM IST