
राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल
New Delhi: राजनीति में कई बार ऐसे बयान सामने आते हैं जो सिर्फ चर्चा का विषय नहीं बनते, बल्कि पूरे राजनीतिक समीकरण को बदलने की क्षमता रखते हैं। राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल का हालिया इंटरव्यू भी कुछ ऐसा ही माना जा रहा है। उन्होंने खुलकर दावा किया कि अब उन्होंने आप पार्टी का साथ छोड़ दिया है और भाजपा में शामिल हो गई हैं।
इंटरव्यू के दौरान स्वाति मालीवाल ने कहा कि वह साल 2006 से Arvind Kejriwal के साथ जुड़ी हुई थीं। उन्होंने आंदोलन के दौर से लेकर पार्टी के विस्तार तक हर चरण में साथ काम किया। उन्होंने कहा कि शुरुआती दौर में उन्हें लगा था कि यह आंदोलन देश में बदलाव लाएगा। भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों के साथ काम करने का सपना उन्हें राजनीति में सक्रिय रखता था। लेकिन समय के साथ पार्टी की दिशा बदलती चली गई।
स्वाति मालीवाल ने इंटरव्यू में कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के भीतर आवाज उठाने पर उन्हें दबाव का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ माहौल बनाया गया और संसद में बोलने तक का मौका नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ और शिकायत दर्ज कराने के बाद एफआईआर वापस लेने का दबाव बनाया गया। मालीवाल ने कहा कि यह उनके लिए बेहद कठिन समय था।
स्वाति मालीवाल ने आरोप लगाया कि पार्टी पंजाब की राजनीति को दूर से नियंत्रित कर रही है। उन्होंने कहा कि वहां फैसले स्थानीय स्तर पर नहीं बल्कि राजनीतिक रणनीति के आधार पर लिए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब में कई गंभीर मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उनके अनुसार, जो लोग सवाल उठाते हैं, उन्हें संगठन में किनारे कर दिया जाता है।
इंटरव्यू में स्वाति मालीवाल ने मोदी और अमुत शाह के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि देश में कई बड़े फैसले लिए गए हैं, जिनका असर राष्ट्रीय स्तर पर देखा गया। महिला आरक्षण बिल जैसे मुद्दों को उन्होंने सकारात्मक कदम बताया और कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए यह जरूरी है।
स्वाति मालीवाल ने कहा कि महिलाओं के अधिकार और प्रतिनिधित्व उनके लिए हमेशा प्राथमिकता रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि महिला आरक्षण को लेकर पार्टी के भीतर उनका मत अलग था। उनका कहना था कि वह लंबे समय से महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर काम करती रही हैं और किसी भी ऐसी राजनीतिक स्थिति का समर्थन नहीं कर सकतीं जो महिला प्रतिनिधित्व के खिलाफ हो।
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इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बेहद तीखे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि अगर किसी ने अपने मूल सिद्धांतों से समझौता किया है तो वह वही लोग हैं जिन्होंने आंदोलन के समय कुछ और कहा और सत्ता में आने के बाद अलग रास्ता अपनाया। उन्होंने कहा कि राजनीति में सिद्धांत और भरोसा सबसे अहम होते हैं और जब वही टूट जाए तो लोगों का विश्वास भी खत्म हो जाता है।
Location : New Delhi
Published : 25 April 2026, 3:13 PM IST