संसद के विशेष सत्र की तैयारी तेज, महिला आरक्षण और परिसीमन पर फिर दांव लगाएगी सरकार

सरकार विशेष सत्र बुलाकर परिसीमन और महिला आरक्षण से संबंधित प्रस्तावों को आगे बढ़ाना चाहती है। इसके लिए विपक्षी दलों से संपर्क कर समर्थन जुटाने की कोशिश भी की जा रही है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 16 October 2026, 10:41 AM IST

नई दिल्ली: संसद का विशेष सत्र इसी महीने के आखिर में बुलाए जाने की संभावना है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार इस सत्र में परिसीमन और लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करने से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक लाने की तैयारी कर रही है। सरकार को भरोसा है कि लोकसभा में इन विधेयकों को पारित कराने के लिए उसके पास पर्याप्त समर्थन है। इस बीच, सरकार द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) और कुछ छोटे विपक्षी दलों से भी बातचीत कर रही है।

महिला आरक्षण और परिसीमन पर फिर कोशिश

सूत्रों के अनुसार, सरकार विशेष सत्र बुलाकर परिसीमन और महिला आरक्षण से संबंधित प्रस्तावों को आगे बढ़ाना चाहती है। इसके लिए विपक्षी दलों से संपर्क कर समर्थन जुटाने की कोशिश भी की जा रही है।

सरकार का मानना है कि लोकसभा में अपनी संख्या के लिहाज से वह इन विधेयकों को पारित कराने की स्थिति में है। हालांकि, संविधान संशोधन विधेयकों के लिए आवश्यक समर्थन जुटाना महत्वपूर्ण होगा और अंतिम स्थिति मतदान के दौरान ही स्पष्ट होगी।

अप्रैल में लोकसभा में गिर गया था विधेयक

सरकार की यह पहल ऐसे समय सामने आई है, जब बजट सत्र के दौरान 17 अप्रैल को परिसीमन और लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं में महिला आरक्षण लागू करने से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में आवश्यक समर्थन हासिल नहीं कर पाया था।

अब सरकार इसी मुद्दे पर दोबारा प्रयास करने की तैयारी में है। प्रस्तावित विधेयकों का उद्देश्य परिसीमन और महिला आरक्षण से संबंधित संवैधानिक प्रावधानों को आगे बढ़ाना है। हालांकि, इनके अंतिम स्वरूप और विशेष सत्र के एजेंडे की आधिकारिक घोषणा होना अभी बाकी है।

DMK और छोटे विपक्षी दलों से बातचीत

सूत्रों का कहना है कि सरकार इस बार DMK सहित कुछ विपक्षी दलों से समर्थन जुटाने के लिए बातचीत कर रही है। यह संपर्क तमिलनाडु चुनाव के बाद DMK और कांग्रेस के बीच राजनीतिक दूरी बढ़ने तथा इंडिया गठबंधन से DMK के अलग होने की खबरों के बीच शुरू हुआ है।

सरकार की कोशिश है कि मतदान से पहले अपने समर्थन का दायरा बढ़ाया जाए। हालांकि, बातचीत का अंतिम नतीजा क्या होगा और संबंधित दल विधेयकों पर क्या रुख अपनाएंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

मानसून सत्र का सत्रावसान नहीं होने का क्या है मतलब?

संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को समाप्त हुआ था, लेकिन उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उसका औपचारिक सत्रावसान नहीं किया गया है। ऐसे में उसी सत्र को आगे बुलाने की प्रक्रिया के तहत बैठक आयोजित करने का रास्ता खुला रह सकता है।

सरकार फिलहाल विशेष बैठक की तारीखों और कार्यक्रम पर विचार कर रही है। हालांकि, विशेष सत्र बुलाने के संबंध में आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार है।

BRICS संसदीय मंच के कार्यक्रम को ध्यान में रखकर तय हो सकती हैं तारीखें

सूत्रों के अनुसार, विशेष सत्र की तारीख तय करते समय 12वें BRICS संसदीय मंच के कार्यक्रम को भी ध्यान में रखा जाएगा। यह कार्यक्रम 26 और 27 अक्टूबर को संविधान सदन में आयोजित होना है।

बताया जा रहा है कि विशेष बैठक से पहले लगभग एक सप्ताह का नोटिस दिया जा सकता है। ऐसे में सत्र की तारीख और कार्यसूची को लेकर आने वाले दिनों में स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है।

SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर विपक्ष का विरोध

दूसरी ओर, विपक्ष मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर सरकार के खिलाफ विरोध तेज कर रहा है। इसी राजनीतिक माहौल में सरकार की ओर से विशेष सत्र बुलाने की तैयारी की खबर सामने आई है।

फिलहाल, विशेष सत्र की आधिकारिक तारीख, विधेयकों का अंतिम प्रारूप और उन्हें पारित कराने के लिए सरकार की रणनीति पर अंतिम पुष्टि बाकी है।

Location :  New Delhi

Published :  16 October 2026, 10:41 AM IST