18 साल की नेहा को लेकर पाकिस्तान पर अमेरिका का दबाव! 11 सांसदों की चिट्ठी से मचा हड़कंप, जानिए पूरा मामला

18 वर्षीय नेहा फकीर से जुड़ा मामला अब पाकिस्तान से निकलकर अमेरिकी सांसदों तक पहुंच गया है। मामले को लेकर सांसदों के एक समूह ने पाकिस्तान सरकार के सामने कई गंभीर चिंताएं रखी हैं। पत्र में कुछ अहम मांगें भी की गई हैं, जिनके बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 27 August 2026, 11:50 AM IST

New Delhi: पाकिस्तान में 18 वर्षीय ईसाई लड़की नेहा फकीर के कथित अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और निकाह के मामले को लेकर अमेरिकी सांसदों ने चिंता जताई है। अमेरिकी सांसदों के एक द्विदलीय समूह ने पाकिस्तानी सरकार को पत्र लिखकर मामले में जरूरी कदम उठाने की मांग की है।

टॉम लैंटोस मानवाधिकार आयोग के सह-अध्यक्ष और रिपब्लिकन सांसद क्रिस स्मिथ के नेतृत्व में 11 अमेरिकी सांसदों ने इस पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। सांसदों ने नेहा की सुरक्षा और उसकी स्वतंत्र इच्छा को लेकर कई सवाल उठाए हैं।

मार्च में लापता होने का दावा

मानवाधिकार संगठन क्रिश्चियन सॉलिडैरिटी इंटरनेशनल के अनुसार, नेहा मार्च 2026 में सिलाई का कोर्स करने के लिए घर से निकली थी, जिसके बाद वह लापता हो गई। संगठन का दावा है कि बाद में नेहा लाहौर के एक मदरसे में मिली।

संगठन के मुताबिक, वहां उसका कथित तौर पर जबरन इस्लाम में धर्म परिवर्तन कराया गया। इसके बाद मामला कानूनी प्रक्रिया तक पहुंचा।

हाई कोर्ट में हुई थी पेशी

बताया गया है कि 9 जून 2026 को नेहा को लाहौर हाई कोर्ट में पेश किया गया था। अमेरिकी सांसदों के पत्र के अनुसार, उस दौरान उसके परिवार को नेहा से अकेले में बातचीत करने की अनुमति नहीं दी गई।

परिवार की ओर से नेहा की घर वापसी के लिए दायर याचिका को भी अदालत ने खारिज कर दिया था। इसके बाद मामले को लेकर चिंता और बढ़ गई।

अमेरिकी सांसदों ने रखीं कई मांगें

अमेरिकी सांसदों ने पाकिस्तानी अधिकारियों से नेहा की शारीरिक सुरक्षा और उसकी भलाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। सांसदों ने यह भी मांग की है कि नेहा को स्वतंत्र कानूनी सलाह उपलब्ध कराई जाए।

इसके अलावा उसे अपने परिवार के साथ बिना किसी दबाव के निजी तौर पर बातचीत करने का अवसर दिए जाने की मांग की गई है।

सांसदों ने कहा कि आगे की न्यायिक प्रक्रिया ऐसे वातावरण में होनी चाहिए, जहां नेहा बिना डर, धमकी या किसी अनुचित प्रभाव के अपनी इच्छा व्यक्त कर सके।

पाकिस्तान के संविधान का भी दिया हवाला

अमेरिकी सांसदों ने अपने पत्र में पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 25 का उल्लेख किया है। अनुच्छेद 20 नागरिकों को अपने धर्म को मानने, उसका अभ्यास करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है, जबकि अनुच्छेद 25 कानून के समक्ष समानता की बात करता है।

सांसद क्रिस स्मिथ ने कहा कि यदि कोई युवा महिला अपनी मान्यताओं को सुरक्षित और स्वतंत्र तरीके से व्यक्त नहीं कर सकती, तो इन संवैधानिक अधिकारों का महत्व सवालों के घेरे में आ जाता है।

अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर भी सवाल

सांसदों ने इस मामले को पाकिस्तान के धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए महत्वपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और जबरन विवाह जैसे मामलों को लेकर लगातार चिंता जताई जाती रही है।

अब अमेरिकी सांसदों की चिट्ठी के बाद नेहा फकीर मामले में पाकिस्तान सरकार की अगली कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।

Location :  New Delhi

Published :  27 August 2026, 11:50 AM IST