‘जब मौके पर थीं ही नहीं, तो किस आधार पर हुई कार्रवाई?’ CEC के खिलाफ प्रदर्शन मामले में नेहा बोरा पहुंची हाईकोर्ट

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने ₹10,000 के निजी मुचलके और एक जमानतदार से जुड़े नोटिस को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। सुनवाई के दौरान उनके वकील ने दलील दी कि दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) के खिलाफ हुए प्रदर्शन का आह्वान नेहा बोरा ने नहीं किया था और वह उस जगह भी नहीं गई थीं, जहां यह प्रदर्शन हो रहा था।

Post Published By: Komal Chauhan
Updated : 22 October 2026, 7:55 PM IST

New Delhi: ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा ने 10,000 के निजी मुचलके और एक जमानतदार से जुड़े नोटिस को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी है। सुनवाई के दौरान उनके वकील ने दलील दी कि दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) के खिलाफ हुए प्रदर्शन का आह्वान नेहा बोरा ने नहीं किया था और वह उस जगह भी नहीं गई थीं, जहां यह प्रदर्शन हो रहा था। मामले में हिरासत की प्रक्रिया और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार से जुड़े सवाल भी उठाए गए।

क्या है पूरा मामला?

नेहा बोरा को 16 अक्टूबर को दिल्ली के मंडी हाउस इलाके में हुए प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। यह प्रदर्शन मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ और चुनाव आयोग की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के विरोध में आयोजित किया जा रहा था।

नेहा की याचिका के मुताबिक, 17 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 130 के तहत नोटिस जारी किया था। इसमें उन्हें जांच की अवधि के दौरान शांति बनाए रखने के लिए 10,000 रुपये का निजी मुचलका भरने और एक जमानतदार पेश करने को कहा गया था। नेहा बोरा ने हाई कोर्ट से इस नोटिस और इससे जुड़ी कार्रवाई को रद्द करने की मांग की है।

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वकील ने हिरासत में लेने के तरीके पर उठाए सवाल

हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान नेहा बोरा के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने हिरासत में लिए जाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने दलील दी कि नेहा 16 अक्टूबर को मंडी हाउस में प्रदर्शन में शामिल होने पहुंची थीं, लेकिन करीब 10 से 15 मिनट बाद ही उन्हें हिरासत में ले लिया गया।

वकील के मुताबिक, नेहा ने कोई अपराध नहीं किया था और उन्हें केवल नारे लगाने के कारण हिरासत में लिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति को अपने वकील या परिवार से संपर्क करने का अवसर मिलना चाहिए।

वकील ने अदालत को बताया कि नेहा को रात में आरके पुरम पुलिस स्टेशन ले जाया गया था। उनका दावा था कि सुबह तक उनके परिवार और परिचितों को उनके ठिकाने की जानकारी नहीं थी। हालांकि, नेहा बोरा को 17 अक्टूबर की सुबह रिहा कर दिया गया था।

मंडी हाउस और कनॉट प्लेस के प्रदर्शन को बताया अलग

सुनवाई के दौरान वकील ने मंडी हाउस और कनॉट प्लेस में प्रस्तावित प्रदर्शनों के बीच अंतर होने की दलील भी दी। उनके अनुसार, नेहा बोरा ने मंडी हाउस में शांतिपूर्ण सभा के लिए लोगों से अपील की थी, जबकि कनॉट प्लेस में प्रस्तावित प्रदर्शन किसी दूसरे संगठन से जुड़ा था।

वकील ने कहा कि नेहा की सोशल मीडिया पोस्ट में हिंसा करने, कानून तोड़ने या सार्वजनिक शांति भंग करने की अपील नहीं की गई थी। उन्होंने 15 अक्टूबर को प्रेस क्लब में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस और अगले दिन जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाए जाने के विरोध में की गई पोस्ट का भी उल्लेख किया।

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सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर क्या दलील दी गई?

नेहा बोरा के वकील ने अदालत में कहा कि उनकी पोस्ट में लोगों को मंडी हाउस में एकत्र होने के लिए कहा गया था। उनके मुताबिक, पोस्ट का उद्देश्य शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना था, न कि किसी गैरकानूनी गतिविधि के लिए लोगों को उकसाना।

इस मामले में नेहा बोरा ने शांति बॉन्ड के नोटिस को चुनौती देते हुए संबंधित कार्रवाई रद्द करने की मांग की है। सुनवाई के दौरान उनकी ओर से हिरासत, वकील से संपर्क के अधिकार और शांतिपूर्ण प्रदर्शन से जुड़े मुद्दे उठाए गए। मामले में अदालत की आगे की कार्यवाही और आदेश पर नजर रहेगी।

Location :  New Delhi

Published :  22 October 2026, 7:55 PM IST