
कोलकाता दुर्गा पूजा हादसा (Img: X)
New Delhi: कोलकाता के एक ऐतिहासिक दुर्गा पूजा पंडाल में हुए हादसे ने भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सप्तमी के दिन अचानक मची भगदड़ में कई लोगों की जान चली गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए। इस घटना के बाद पंडाल की व्यवस्था को लेकर कई दावे सामने आ रहे हैं।
बताया जा रहा है कि हादसे से दो दिन पहले भी यहां भारी भीड़ के बीच बैरिकेडिंग टूट गई थी। आखिर उस दिन क्या हुआ था और 91 साल पुराने इस पंडाल का नाम चोरबागान कैसे पड़ा? आइए, समझते हैं।
शनिवार शाम करीब 7:40 बजे कोलकाता के चोरबागान सार्वजनीन दुर्गोत्सव पंडाल के आसपास तेज बारिश शुरू हो गई। उस समय पंडाल के बाहर दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी थीं और सड़क पर भी बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। बारिश से बचने के लिए कई लोग एक साथ पंडाल के भीतर और निकास द्वार की ओर बढ़ने लगे।
इसी बीच पंडाल के ढांचे को लेकर लाउडस्पीकर पर की गई एक कथित घोषणा ने लोगों की चिंता बढ़ा दी। बताया जा रहा है कि आयोजकों की ओर से ढांचा गिरने की आशंका जताते हुए लोगों को तुरंत बाहर निकलने के लिए कहा गया। इसके बाद भीड़ में डर फैल गया और लोग तेजी से बाहर निकलने की कोशिश करने लगे।
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भीड़ का दबाव बढ़ने से पंडाल के निकास द्वार का कुछ हिस्सा ढहने की बात सामने आई है। इलाके की सड़कें और आने-जाने के रास्ते संकरे होने के कारण लोगों को बाहर निकलने में परेशानी हुई। इसी दौरान कई लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर गए और भगदड़ जैसे हालात बन गए।
स्थानीय लोगों और चश्मदीदों ने पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती नहीं होने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि पुलिसकर्मियों की मौजूदगी मुख्य रूप से वीआईपी प्रवेश द्वार के आसपास थी। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था और हादसे के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों के बाद ही हो सकेगी।
हादसे के बाद चोरबागान पंडाल में भीड़ नियंत्रण को लेकर एक और दावा सामने आया है। कहा जा रहा है कि भगदड़ की घटना से दो दिन पहले भी पंडाल में भारी भीड़ जुटी थी और उस दौरान बैरिकेडिंग टूट गई थी। इस दौरान पुलिस की ओर से भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठी चलाए जाने की बात भी कही जा रही है।
यदि इन दावों की पुष्टि होती है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि पहले से मौजूद भीड़ के दबाव और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों को देखते हुए क्या पर्याप्त एहतियाती कदम उठाए गए थे। फिलहाल, इन दावों को जांच में परखा जाना जरूरी है।
हादसे के बाद प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। खबर में मृतकों के परिवारों के लिए 25 लाख रुपये मुआवजे और सरकारी नौकरी देने की घोषणा का भी उल्लेख है। इसके अलावा, मामले की जांच के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट के मौजूदा न्यायाधीश की अगुवाई में विशेष जांच दल यानी एसआईटी गठित किए जाने की जानकारी दी गई है।
पूजा समिति के सचिव समेत सात लोगों की गिरफ्तारी की बात भी सामने आई है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि भगदड़ किन परिस्थितियों में हुई, भीड़ प्रबंधन में कहां चूक हुई और सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारियों का पालन किया गया था या नहीं। मृतकों की संख्या, मुआवजे, एसआईटी के गठन और गिरफ्तारियों से जुड़ी जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही हादसे की जिम्मेदारी स्पष्ट हो सकेगी।
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कोलकाता के उत्तरी हिस्से में स्थित चोरबागान इलाके का इतिहास भी दिलचस्प बताया जाता है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, ब्रिटिश शासन के दौर में यहां घने बाग-बगीचे, झाड़ियां और दलदली जमीन हुआ करती थी। सुनसान होने के कारण इस इलाके में चोरों और लुटेरों के छिपने की कहानियां प्रचलित थीं। इसी वजह से इसे ‘चोरों का बागान’ कहा जाने लगा, जो बाद में चोरबागान के नाम से पहचाना जाने लगा।
समय के साथ इस इलाके में आबादी बढ़ी और यह कोलकाता के आवासीय तथा व्यावसायिक क्षेत्रों में शामिल हो गया। यहां आयोजित होने वाला चोरबागान सार्वजनीन दुर्गोत्सव करीब 91 साल पुराना बताया जाता है। अपनी भव्य सजावट और थीम आधारित पूजा के लिए पहचाने जाने वाले इस पंडाल में हुई भगदड़ ने इस बार उत्सव के बीच सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह हादसा याद दिलाता है कि बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ का अनुमान, सुरक्षित निकास द्वार, पर्याप्त पुलिस बल और समय पर सही सूचना देना बेहद जरूरी है। आखिरकार, किसी भी उत्सव की सफलता का सबसे बड़ा पैमाना लोगों की सुरक्षा ही है।
Location : New Delhi
Published : 18 October 2026, 3:41 PM IST
Topics : Chorbagan Durga Puja Pandal Kolkata Durga Puja Accident Kolkata stampede Kolkata News West Bengal Breaking News