मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत-ईरान की अहम बातचीत, फोन पर हुई बड़ी चर्चा

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और भारत के विदेश मंत्रियों के बीच अहम फोन बातचीत हुई। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने एस. जयशंकर से बात कर क्षेत्रीय हालात, वैश्विक सुरक्षा और द्विपक्षीय सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा की। बातचीत के दौरान ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर हमलों और तनाव बढ़ाने के आरोप भी लगाए।

Post Published By: Sapna Srivastava
Updated : 13 March 2026, 3:02 PM IST

New Delhi: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और लगातार बदलते भू-राजनीतिक हालात के बीच कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। ईरान और इजरायल के बीच टकराव, अमेरिका की सक्रियता और क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। इसी गंभीर माहौल में भारत और ईरान के बीच उच्च स्तर पर अहम बातचीत हुई है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से फोन पर संपर्क कर मौजूदा हालात पर विस्तार से चर्चा की। बातचीत के दौरान मध्य पूर्व की स्थिति, वैश्विक सुरक्षा, क्षेत्रीय घटनाक्रम और दोनों देशों के बीच सहयोग जैसे कई अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। इस बातचीत को मौजूदा अंतरराष्ट्रीय हालात में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

फोन पर हुई उच्च स्तरीय कूटनीतिक बातचीत

मिली जानकारी के मुताबिक ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के बीच फोन पर बातचीत हुई। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब मध्य पूर्व का माहौल बेहद संवेदनशील बना हुआ है और कई देशों की नजर इस क्षेत्र की गतिविधियों पर टिकी हुई है। दोनों नेताओं के बीच हुई इस बातचीत में क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर विस्तार से चर्चा की गई। साथ ही दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों और बहुपक्षीय सहयोग के मुद्दों पर भी विचार साझा किए गए।

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क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय हालात पर हुई चर्चा

फोन कॉल के दौरान ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर को मध्य पूर्व में तेजी से बदल रहे हालात के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में हुए कई घटनाक्रमों ने पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है और इसका असर वैश्विक सुरक्षा पर भी पड़ सकता है। अराघची ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना बेहद जरूरी है और इसके लिए सभी देशों को मिलकर प्रयास करने होंगे।

अमेरिका और इजरायल पर लगाए आरोप

बातचीत के दौरान ईरान के विदेश मंत्री ने अपने भारतीय समकक्ष को हालिया घटनाओं के बारे में जानकारी देते हुए अमेरिका और इजरायल पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि अमेरिका और तथाकथित जियोनिस्ट शासन द्वारा ईरान के खिलाफ किए गए हमलों और कार्रवाइयों के कारण क्षेत्र में तनाव बढ़ा है। अराघची के अनुसार इन घटनाओं ने न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित किया है, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी नई चुनौतियां पैदा कर दी हैं।

भारत की कूटनीतिक भूमिका पर नजर

मध्य पूर्व के मौजूदा हालात को देखते हुए भारत की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। भारत के कई देशों के साथ संतुलित संबंध हैं और यही वजह है कि संकट के समय भारत की कूटनीति पर खास नजर रहती है। भारत लंबे समय से यह रुख अपनाता रहा है कि क्षेत्रीय विवादों का समाधान बातचीत और कूटनीतिक रास्तों से ही निकाला जाना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की विदेश नीति संतुलन बनाए रखने पर आधारित है और इसी वजह से वह एक तरफ अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ मजबूत संबंध रखता है, तो दूसरी तरफ ईरान जैसे देशों के साथ भी संवाद बनाए रखता है।

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द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग पर भी चर्चा

फोन पर हुई इस बातचीत में केवल मौजूदा संकट ही नहीं बल्कि दोनों देशों के बीच भविष्य में सहयोग को लेकर भी चर्चा की गई। भारत और ईरान के बीच ऊर्जा, व्यापार और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी जैसे कई अहम क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं हैं। इसके अलावा दोनों नेताओं ने बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग बढ़ाने और वैश्विक मुद्दों पर समन्वय बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया।

वैश्विक सुरक्षा पर बढ़ती चिंता

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण दुनिया भर के कई देश चिंतित हैं। अगर हालात और बिगड़ते हैं तो इसका असर वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है। इसी वजह से दुनिया के कई बड़े देश इस समय कूटनीतिक स्तर पर सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। भारत और ईरान के विदेश मंत्रियों के बीच हुई यह बातचीत भी इसी कूटनीतिक गतिविधि का हिस्सा मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय हालात पर संवाद बनाए रखना और तनाव को कम करने की दिशा में प्रयास करना है।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 13 March 2026, 3:02 PM IST