देश में एक साल में कितनी बार मची भगदड़? महाकुंभ से कोलकाता तक की घटनाओं से समझिए

देश में एक साल के भीतर महाकुंभ से लेकर रेलवे स्टेशन, मंदिरों और बड़े आयोजनों तक कई दर्दनाक हादसे हुए। कहीं भगदड़ ने जिंदगियां छीन लीं, तो कहीं सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन पर सवाल उठे। आखिर बार-बार ऐसे हादसे क्यों होते हैं और इन्हें रोकने के लिए क्या सबक लेने की जरूरत है?

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 18 October 2026, 2:40 PM IST

New Delhi : पवित्र स्नान, मंदिर में दर्शन, धार्मिक जुलूस या किसी टीम की जीत का जश्न-ऐसे आयोजनों में कुछ ही पलों में हजारों लोग एक साथ जुट जाते हैं। लेकिन जब भीड़ किसी स्थान की क्षमता से अधिक हो जाती है तो आस्था और उत्सव का माहौल जानलेवा आपातस्थिति में बदल सकता है। प्रयागराज के महाकुंभ, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, बेंगलुरु में आईपीएल जीत के जश्न और कोलकाता में दुर्गा पूजा पंडाल में हुए हालिया हादसे ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि भारत में भीड़ से होने वाली जानलेवा दुर्घटनाएं बार-बार क्यों हो रही हैं?

देश में बड़े आयोजनों के दौरान हुई दुर्घटनाओं का इतिहास एक चिंताजनक तस्वीर सामने रखता है। भीड़भाड़ वाले रास्ते, अचानक लोगों का एक साथ आगे बढ़ना, संकरे प्रवेश और निकास द्वार, अफवाहें, बुनियादी ढांचे की खामियां और भीड़ प्रबंधन में चूक कई हादसों में सामने आए हैं। घटनाओं की परिस्थितियां अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन उनका परिणाम अक्सर एक जैसा होता है। लोग भीड़ के बीच फंस जाते हैं, संतुलन खोकर गिर पड़ते हैं, सांस लेने में कठिनाई महसूस करते हैं और आसपास के दबाव के कारण सुरक्षित बाहर नहीं निकल पाते।

उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में 17 अक्टूबर को हुई त्रासदी ने एक बार फिर भीड़ की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। शुरुआती खबरों के अनुसार, इस घटना में कम से कम 19 लोगों की मौत हुई और 25 लोग घायल हुए। हादसा भारी बारिश के बीच हुआ। बताया गया कि बारिश से बचने के लिए बड़ी संख्या में लोग पंडाल की ओर बढ़े, जिससे भीड़ का दबाव बढ़ गया। कुछ खबरों में लाउडस्पीकर से पंडाल गिरने की आशंका जताने वाली घोषणा को भी संभावित कारण बताया गया है। हालांकि, घटना का पूरा क्रम और जिम्मेदारी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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कोलकाता में भगदड़: दुर्गा पूजा का उत्सव कैसे बना त्रासदी?

दुर्गा पूजा के दौरान हर साल कोलकाता में बड़ी संख्या में लोग पंडालों को देखने पहुंचते हैं। आकर्षक सजावट, कलात्मक प्रतिमाएं और सामुदायिक आयोजन शहर के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों के लोगों को भी आकर्षित करते हैं। लेकिन 17 अक्टूबर की शाम चोरबागान पंडाल में उत्सव का माहौल अचानक अफरा-तफरी में बदल गया।

शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, भारी बारिश के कारण लोग पंडाल के भीतर और आसपास पहुंचने लगे, जिससे भीड़ बढ़ गई। कुछ खबरों में पंडाल के संभावित रूप से गिरने की चेतावनी देने वाली घोषणा को भी लोगों में घबराहट फैलने की वजह बताया गया है। जांच के दौरान भीड़ नियंत्रण, प्रवेश और निकास के रास्तों तथा खराब मौसम में आगंतुकों की आवाजाही संभालने की व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।

रिपोर्टों में 19 लोगों की मौत और 25 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू की और आयोजन तथा सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कुछ लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। हालांकि, हिरासत या गिरफ्तारी अपने आप में हादसे के कारण अथवा किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी साबित नहीं करती।

जांच का एक महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या पंडाल की क्षमता, प्रवेश और निकास की व्यवस्था, आपातकालीन सूचना प्रणाली और भीड़ को सुरक्षित बाहर निकालने की योजना वहां मौजूद लोगों की संख्या के अनुरूप थी। इन सवालों के जवाब भविष्य में ऐसे आयोजनों की सुरक्षा बेहतर बनाने के लिए अहम होंगे।

महाकुंभ भगदड़: आस्था के महासंगम पर मातम

29 जनवरी 2025 को प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान हुई भगदड़ में रिपोर्टों के अनुसार 30 लोगों की मौत हुई और करीब 60 लोग घायल हुए। यह घटना मौनी अमावस्या के अवसर पर संगम के पास हुई थी। इस दिन गंगा, यमुना और धार्मिक मान्यता के अनुसार सरस्वती के संगम पर पवित्र स्नान करने के लिए लाखों श्रद्धालु पहुंचे थे।

ट्रेन पकड़ने की जल्दबाजी बनी जानलेवा

15 फरवरी 2025 को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भीड़ के दबाव से हुए हादसे में कम से कम 18 लोगों की मौत हुई। बड़ी संख्या में महाकुंभ जाने वाले श्रद्धालु प्रयागराज के लिए ट्रेन पकड़ने पहुंचे थे। हादसे की खबरें प्लेटफॉर्म संख्या 14 और 15 के आसपास से सामने आई थीं।

रेलवे स्टेशन पर भीड़ प्रबंधन की चुनौतियां अलग तरह की होती हैं। ट्रेन के आने की घोषणा, प्लेटफॉर्म में बदलाव या ट्रेन कहां से मिलेगी, इसे लेकर अनिश्चितता के कारण यात्री अचानक एक दिशा में बढ़ सकते हैं। जब बड़ी संख्या में लोग एक साथ सीढ़ियों, फुटओवर ब्रिज और संकरे रास्तों से गुजरते हैं, तो भीड़ तेजी से बढ़ सकती है।

बेंगलुरु में आरसीबी की जीत का जश्न: खुशी के बीच मातम

4 जून 2025 को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की पहली आईपीएल खिताबी जीत के जश्न के दौरान एम. चिन्नास्वामी स्टेडियम के पास भगदड़ में कम से कम 11 लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए।

टीम की लंबे समय से प्रतीक्षित जीत के बाद प्रशंसकों में भारी उत्साह था। बड़ी संख्या में लोग खिलाड़ियों और दूसरे प्रशंसकों के साथ जश्न मनाने पहुंचे। हालांकि, स्टेडियम और उसके आसपास जुटी भीड़ ने सार्वजनिक सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती पैदा कर दी।

करूर राजनीतिक रैली: भीड़ की त्रासदी में गई कई जानें

27 सितंबर 2025 को तमिलनाडु के करूर में अभिनेता और तमिलगा वेत्री कड़गम के नेता विजय से जुड़ी राजनीतिक रैली के दौरान भगदड़ हुई। रिपोर्टों के अनुसार, इस घटना में कम से कम 39 लोगों की मौत हुई।

दर्शन पास लेने की होड़ में हादसा

8 जनवरी 2025 को आंध्र प्रदेश के तिरुपति में हुई भगदड़ में रिपोर्टों के अनुसार कम से कम छह श्रद्धालुओं की मौत हुई और दर्जनों लोग घायल हुए। वैकुंठ द्वार दर्शन के लिए पास लेने के उद्देश्य से लगभग 2,500 लोग एकत्र हुए थे। एक गेट खुलने के बाद भीड़ का दबाव बढ़ गया और जानलेवा भगदड़ की स्थिति बन गई।

गोवा का लैराई जात्रा उत्सव: ढलान वाला रास्ता बना खतरा

3 मई 2025 को गोवा के शिरगांव स्थित श्री लैराई देवी मंदिर के वार्षिक उत्सव के दौरान भगदड़ में रिपोर्टों के अनुसार कम से कम छह लोगों की मौत हुई और दर्जनों घायल हुए। वार्षिक जात्रा के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे थे। रिपोर्टों में संकरे और ढलान वाले रास्ते पर भीड़ जमा होने की बात सामने आई थी।

घनी भीड़ में एक व्यक्ति के गिरने का असर केवल उसी तक सीमित नहीं रहता। पीछे चल रहे लोग यह नहीं देख पाते कि आगे क्या हुआ है और वे अपनी गति रोक नहीं पाते। ऐसे में लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर सकते हैं और कुछ ही क्षणों में स्थिति गंभीर हो सकती है। ढलान या संकरे रास्ते पर संतुलन संभालना और भी मुश्किल हो जाता है।

पुरी रथयात्रा: गुंडिचा मंदिर के पास अचानक बढ़ी भीड़

29 जून 2025 को ओडिशा के पुरी में रथयात्रा के दौरान श्री गुंडिचा मंदिर के पास भगदड़ में तीन श्रद्धालुओं की मौत हुई और दर्जनों लोग घायल हुए। हजारों लोग रथों पर विराजमान देवी-देवताओं के दर्शन के लिए एकत्र हुए थे। खबरों में भीड़ के अचानक आगे बढ़ने और धार्मिक सामग्री ले जाने वाले वाहनों की आवाजाही का भी उल्लेख किया गया था।

रथयात्रा ऐसा बड़ा धार्मिक आयोजन है, जिसमें अलग-अलग क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। रथों की आवाजाही, अनुष्ठानों का समय, पैदल यात्रियों का प्रवाह और प्रवेश पर पाबंदियां मिलकर प्रबंधन को जटिल बना देती हैं। आवाजाही में अचानक बदलाव या प्रवेश में देरी होने पर लोग एक ही जगह जमा हो सकते हैं।

हरिद्वार का मनसा देवी मंदिर: संकरे रास्ते और बिजली का खतरा

27 जुलाई 2025 को उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित मनसा देवी मंदिर जाने वाले भीड़भाड़ वाले सीढ़ीदार रास्ते पर भगदड़ हुई। रिपोर्टों के अनुसार, इस घटना में कम से कम आठ लोगों की मौत हुई और 25 से अधिक लोग घायल हुए। शुरुआती खबरों में रास्ते के पास बिजली की तार गिरने से घबराहट फैलने की आशंका जताई गई थी। हालांकि, घटना का पूरा क्रम जांच का विषय था।

बाराबंकी मंदिर हादसा: बिजली की खराबी के बाद फैली घबराहट

28 जुलाई 2025 को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के अवसानेश्वर मंदिर में भगदड़ जैसी स्थिति बनने की खबर सामने आई थी। बताया गया कि बिजली का एक चालू तार टिन की छत पर गिर गया, जिसके बाद श्रद्धालुओं के बीच घबराहट फैल गई।

बिहार के अशोकधाम मंदिर में भगदड़

17 अगस्त 2026 को बिहार के लखीसराय जिले के अशोकधाम मंदिर में भगदड़ के बाद सात श्रद्धालुओं की मौत की खबर सामने आई थी। यह घटना सावन महीने के तीसरे सोमवार को श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ के दौरान हुई। रिपोर्टों में बिजली से जुड़ी घटना और करंट वाले तार की आशंका से लोगों में घबराहट फैलने का उल्लेख किया गया था।

Location :  New Delhi

Published :  18 October 2026, 2:40 PM IST