उच्च न्यायालय ने केंद्रीय एजेंसी की याचिका की सुनवाई इस आधार पर स्थगित कर दी कि ईडी ने उच्चतम न्यायालय में एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की है जो ‘‘फिलहाल, इसके समक्ष प्रस्तुत आवेदन के लगभग समान हैं जिस पर गुरुवार को सुनवाई है।

New Delhi: पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म I-PAC के सह-संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दाखिल की है। नई याचिका में ईडी ने पश्चिम बंगाल के पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कुमार समेत कुछ शीर्ष अधिकारियों को हटाए जाने की मांग की है।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा कि ED की याचिका और सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले एक जैसे हैं, इसलिए सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के सामने ही होनी चाहिए। ED द्वारा दाखिल विशेष अनुमति याचिका (SLP) को सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ के सामने मैटर नंबर 27 के तौर पर सूचीबद्ध कर दिया है।
ईडी ने नई याचिका में आरोप लगाया कि इन अधिकारियों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ मिलकर जांच में बाधा डाली और सबूतों की कथित तौर पर गड़बड़ी करने में मदद की। ईडी ने अपनी नई अर्जी में केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) और कार्मिक व प्रशिक्षण विभाग (DOPT), भारत सरकार को निर्देश देने की मांग की है कि संबंधित अधिकारियों को निलंबित किया जाए। याचिका में यह भी जिक्र किया गया है कि डीजीपी राजीव कुमार पूर्व में कोलकाता पुलिस कमिश्नर के पद पर रहते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ धरने पर बैठे थे।
8 जनवरी को ED ने कोलकाता में राजनीतिक सलाहकार कंपनी I-PAC के ऑफिस और उसके निदेशक प्रतीक जैन के घर पर तलाशी ली थी. यह कार्रवाई कथित करोड़ों रुपये के कोयला तस्करी घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में की गई थी।
ED का आरोप है कि रेड के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद वहां पहुंचीं और अहम दस्तावेज व इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हटाए. हालांकि, ममता बनर्जी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए ED पर अधिकारों के दुरुपयोग का आरोप लगाया. इसके बाद ED ने मुख्यमंत्री के खिलाफ CBI जांच की मांग करते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था, जिसकी सुनवाई अब आगे बढ़ेगी।
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इस मामले में तुरंत न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करते हुए ईडी ने दावा किया है निष्पक्ष जांच के एजेंसी के अधिकार में बाधा डालने का काम किया गया। इस घटना की CBI जांच कराने की मांग रखी गई है। कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान 'CM और उनके समर्थकों के प्रभाव' का इस्तेमाल कर कोर्ट में हंगामा किया गया। इससे जज को सुनवाई तक टालनी पड़ी।
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जांच एजेंसी ने कहा कि CM, DGP और कोलकाता पुलिस कमिश्नर पर बीएनसी की 17 गंभीर धाराओं के तहत आरोप लगाए जा सकते हैं।