मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने तमिलनाडु के डिप्टी मुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन की सनातन धर्म पर 2023 में दी गई टिप्पणी को हेट स्पीच करार दिया है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट

तमिलनाडु के डिप्टी मुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन
हाईकोर्ट ने कहा कि यह मामला किसी एक व्यक्ति के बयान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक पुरानी वैचारिक पृष्ठभूमि दिखाई देती है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि पिछले करीब 100 वर्षों से द्रविड़ कषगम और बाद में द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) की राजनीति में हिंदू धर्म के खिलाफ बयानबाजी होती रही है। जजों ने कहा कि उदयनिधि स्टालिन भी उसी वैचारिक धारा से आते हैं, जिसका असर उनके बयान में साफ झलकता है।
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कोर्ट ने इस बात पर भी गंभीर चिंता जताई कि तमिलनाडु में अब तक उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है, जबकि उनके बयान को लेकर दूसरे राज्यों में केस दर्ज हुए हैं। अदालत ने इसे खतरनाक स्थिति बताया और कहा कि इससे यह संदेश जाता है कि प्रभावशाली लोग हेट स्पीच देकर भी कानूनी कार्रवाई से बच सकते हैं। कोर्ट के अनुसार, हेट स्पीच देने वाले और उस पर प्रतिक्रिया देने वाले, दोनों को कानून की नजर में समान रूप से परखा जाना चाहिए।
गौरतलब है कि सितंबर 2023 में एक रैली के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया और कोरोना जैसी बीमारियों से की थी और कहा था कि इसे खत्म किया जाना चाहिए। इस पर हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि किसी समूह के अस्तित्व को समाप्त करने की बात की जाती है, तो उसे जेनोसाइड की श्रेणी में रखा जा सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि तमिल शब्द ‘सनातन ओजिप्पु’ का अर्थ सांस्कृतिक जेनोसाइड के रूप में समझा जा सकता है।
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हाईकोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब तमिलनाडु में अप्रैल-मई के दौरान विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। चुनाव से पहले राज्य का सियासी माहौल पहले से ही गर्म है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट जनवरी 2025 में इस मामले में आपराधिक कार्रवाई की मांग वाली याचिकाओं पर सुनवाई से इनकार कर चुका है, लेकिन हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी से DMK और उदयनिधि स्टालिन की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा चुनावी राजनीति में भी प्रमुखता से उठाया जाएगा।