लिव-इन पार्टनर की कस्टडी के लिए गुजरात हाई कोर्ट पहुंची महिला, बहन पर जबरन ले जाने का आरोप, जानें कोर्ट ने क्या दिया आदेश

गुजरात की इस अजीबोगरीब दास्तां ने सबको चौंका दिया है। दो महिलाएं एक शख्स के लिए आमने-सामने हैं, लेकिन वह खुद कुछ कहने की स्थिति में नहीं है। अदालत ने अब जो आदेश दिया है, उससे इस रहस्यमयी कहानी में एक नया और बेहद सनसनीखेज मोड़ आ गया है। आखिर क्या है पूरा माजरा?

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 9 July 2026, 10:27 AM IST

New Delhi: गुजरात हाई कोर्ट में एक बेहद ही संवेदनशील और अनोखा मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने अपने 60 वर्षीय लिव-इन पार्टनर की कस्टडी वापस पाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। महिला का आरोप है कि उसका पार्टनर उसकी मर्जी के बिना अपनी बहन के पास रहने को मजबूर है। हालांकि, कोर्ट के समक्ष पेश किए जाने के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी, क्योंकि बीमारी के चलते बुजुर्ग व्यक्ति कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं था। इस उलझे हुए मामले को देखते हुए हाई कोर्ट ने अब बुजुर्ग की विस्तृत मेडिकल जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

लिव-इन पार्टनर ने दायर की 'बंदी प्रत्यक्षीकरण' याचिका

पूरा मामला गुजरात के कोबा इलाके का है। पीड़ित महिला ने अपने 60 साल के लिव-इन पार्टनर को वापस पाने के लिए हाई कोर्ट में 'हेबियस कॉर्पस' (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका दायर की थी। महिला का दावा है कि वे दोनों एक-दूसरे से बेहद प्यार करते हैं और लंबे समय से साथ रह रहे थे। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुछ समय पहले बुजुर्ग की बहन भाई की खराब सेहत का हवाला देकर उन्हें जबरन अपने साथ घर ले गई। इसके बाद से ही बहन ने महिला को अपने पार्टनर से मिलने या किसी भी प्रकार का संपर्क करने से पूरी तरह रोक दिया।

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अदालत में बोल नहीं पाया बुजुर्ग, दोनों पक्षों में तीखी बहस

हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान बुजुर्ग व्यक्ति को अदालत के समक्ष पेश किया गया। न्यायाधीशों ने पाया कि बुजुर्ग की हालत काफी नाजुक है और उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं दिख रहा है। जब कोर्ट ने उनसे पूछा कि क्या वे अपनी लिव-इन पार्टनर के पास वापस जाना चाहते हैं, तो वे बीमारी और कमजोरी के कारण बहुत ही धीमे और अस्पष्ट जवाब दे पाए। इस दौरान अदालत परिसर में ही बुजुर्ग की बहन और लिव-इन पार्टनर के बीच तीखी बहस हुई, जहां दोनों ने बुजुर्ग की इस बिगड़ती हालत के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया और कई गंभीर आरोप लगाए।

सिविल अस्पताल में भर्ती, स्टैंडिंग मेडिकल बोर्ड करेगा जांच

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और बुजुर्ग की गंभीर स्थिति को देखते हुए कोर्ट ने एक निष्पक्ष रास्ता निकाला। अदालत के सुझाव पर दोनों महिलाएं बुजुर्ग की सरकारी अस्पताल के विशेषज्ञों से जांच कराने पर सहमत हो गईं। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के लॉ ऑफिसर ने अदालत को सूचित किया कि सिविल अस्पताल का स्टैंडिंग मेडिकल बोर्ड बुजुर्ग की गहन जांच करेगा। इस जांच प्रक्रिया में शारीरिक, मानसिक और न्यूरोलॉजिकल टेस्ट शामिल होंगे। साथ ही, बोर्ड यह भी पता लगाएगा कि क्या बुजुर्ग को किसी प्रकार के नशीले पदार्थ का सेवन तो नहीं कराया गया है। कोर्ट ने डॉक्टरों को आवश्यकतानुसार अन्य जरूरी टेस्ट करने की भी पूरी छूट दी है।

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बहन उठाएगी खर्च, 15 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

बुजुर्ग व्यक्ति के इलाज और जांच में आने वाले तमाम खर्चों को वहन करने के लिए उनकी बहन तैयार हो गई है। हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि मेडिकल बोर्ड अपनी जांच पूरी करने के बाद पूरी रिपोर्ट को एक सीलबंद लिफाफे में सीधे अदालत के सामने पेश करे। इसके साथ ही, अदालत ने याचिकाकर्ता (लिव-इन पार्टनर) और बुजुर्ग की बहन, दोनों को ही कस्टडी के दावे के संबंध में अपना-अपना विस्तृत हलफनामा (अफिडेविट) दाखिल करने का आदेश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 15 जुलाई को तय की गई है, जिसके बाद ही बुजुर्ग की कस्टडी पर अंतिम फैसला लिया जा सकेगा।

Location :  New Delhi

Published :  9 July 2026, 10:27 AM IST