देशभर में जलेगा रावण, लेकिन भारत की इन जगहों पर होती है पूजा! वजह जानकर चौंक जाएंगे

दशहरा 2026 पर देशभर में रावण दहन की तैयारी होती है, लेकिन यूपी के बिसरख और मध्य प्रदेश के मंदसौर में रावण से जुड़ी अलग मान्यताएं हैं। जानिए कहीं उसे पूर्वज तो कहीं दामाद क्यों माना जाता है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 19 October 2026, 4:32 PM IST

New Delhi: भारत में विजयदशमी यानी दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान राम ने रावण का वध कर माता सीता को मुक्त कराया था। यही वजह है कि देश के कई हिस्सों में दशहरे पर रावण के पुतले का दहन किया जाता है। लेकिन भारत में कुछ ऐसी जगहें भी हैं, जहां रावण को लेकर स्थानीय मान्यताएं अलग हैं। कहीं उसे पूर्वज माना जाता है, तो कहीं दामाद के रूप में सम्मान दिया जाता है। आइए जानते हैं उत्तर प्रदेश के बिसरख गांव और मध्य प्रदेश के मंदसौर से जुड़ी इन खास परंपराओं के बारे में।

रावण को माना जाता है पूर्वज

उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर जिले में स्थित बिसरख गांव रावण से जुड़ी मान्यताओं के लिए जाना जाता है। दिल्ली से करीब 40 किलोमीटर दूर बसे इस गांव के कुछ लोगों का विश्वास है कि रावण का जन्म इसी स्थान पर हुआ था। स्थानीय मान्यता के अनुसार, रावण उनके पूर्वज थे। इसी वजह से गांव में दशहरे पर रावण दहन नहीं किया जाता और इस दिन को आमतौर पर उत्सव की तरह नहीं मनाया जाता।

बिसरख में भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन मंदिर भी है। मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग का संबंध रावण के परिवार से रहा है। स्थानीय परंपरा के अनुसार, रावण के दादा पुलस्त्य और उनके पिता विश्रवा ऋषि का इस स्थान से जुड़ाव था। कहा जाता है कि रावण ने भी यहां भगवान शिव की आराधना और तपस्या की थी।

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कुछ स्थानीय कथाओं में कुंभकरण, सूर्पणखा और विभीषण का जन्म भी इसी गांव में होने की बात कही जाती है। हालांकि, इन मान्यताओं की ऐतिहासिक पुष्टि अलग विषय है। इन्हें स्थानीय धार्मिक परंपराओं और जनविश्वास के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए। बिसरख को लेकर यह कहानी भी प्रचलित है कि वर्षों पहले गांव में रावण का पुतला जलाने के बाद कुछ लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद पूजा-पाठ किया गया और गांव में शांति स्थापित होने की बात कही जाती है। इस कथा की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है, लेकिन ऐसी लोककथाएं गांव में रावण दहन न करने की परंपरा के साथ जोड़ी जाती हैं।

रावण को मानते हैं दामाद

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मध्य प्रदेश का मंदसौर भी रावण से जुड़ी अनोखी मान्यताओं के लिए जाना जाता है। खासकर खानपुरा इलाके में नामदेव समुदाय के कुछ लोग रावण को अपना दामाद मानते हैं। स्थानीय मान्यता के मुताबिक, रावण की पत्नी मंदोदरी का संबंध मंदसौर से था। इसी विश्वास के कारण यहां कुछ लोग रावण के प्रति सम्मान का भाव रखते हैं। दशहरे के मौके पर देश के अनेक हिस्सों में रावण दहन होता है, लेकिन मंदसौर में कुछ लोग इस परंपरा से अलग रावण की पूजा-अर्चना करते हैं। उनके लिए रावण केवल रामायण का एक पात्र नहीं, बल्कि स्थानीय परंपरा और पारिवारिक मान्यता से जुड़ा नाम भी है।

अलग-अलग मान्यताओं से जुड़ा है दशहरा

दशहरा देशभर में अलग-अलग रीति-रिवाजों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। अधिकांश स्थानों पर रावण दहन भगवान राम की विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में किया जाता है। वहीं, बिसरख और मंदसौर जैसी जगहों पर रावण से जुड़ी स्थानीय मान्यताएं इस पर्व को एक अलग सांस्कृतिक रंग देती हैं।

Location :  New Delhi

Published :  19 October 2026, 4:32 PM IST