बच्चों के भविष्य पर मंडरा रहा खतरा! देवघर में नमक की जांच के लिए सहियाओं को मिली खास ट्रेनिंग, जानिए क्यों जरूरी है आयोडीन

बच्चों के मानसिक विकास पर असर डालने वाली आयोडीन की कमी को लेकर देवघर में स्वास्थ्य विभाग ने खास पहल की है। सदर अस्पताल में सहियाओं को नमक की जांच करने की ट्रेनिंग दी गई और चार तरह के नमूनों की जांच की गई।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 22 October 2026, 7:52 PM IST

Deoghar: आयोडीन की कमी को अक्सर छोटी पोषण समस्या समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन इसका असर बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ सकता है। इसी खतरे को देखते हुए देवघर सदर अस्पताल में विश्व आयोडीन न्यूनता विकार दिवस पर एक खास कार्यशाला आयोजित की गई।

यहां सहियाओं को नमक की जांच करने का प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान चार तरह के नमक के नमूनों की जांच की गई। आखिर घर में इस्तेमाल होने वाले नमक की गुणवत्ता बच्चों के भविष्य से कैसे जुड़ी है?

नमक की जांच, सहियाओं को मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण

देवघर सदर अस्पताल के सभागार में आयोजित कार्यशाला का उद्देश्य गांव-गांव तक आयोडीन की कमी से होने वाली समस्याओं के प्रति जागरूकता फैलाना था। कार्यक्रम में सहियाओं को आयोडीनयुक्त नमक की पहचान करने और उसकी शुरुआती जांच की प्रक्रिया समझाई गई।

कार्यशाला के दौरान स्थानीय नमक सहित अलग-अलग प्रकार के करीब चार नमूनों की जांच की गई। इनमें टाटा जैसे ब्रांड के नमूने भी शामिल थे। सहियाओं ने नमक परीक्षण किट की मदद से जांच करने का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। इस प्रशिक्षण के जरिए स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि सहियाएं अपने कार्यक्षेत्र में परिवारों को नमक की गुणवत्ता, आयोडीन के महत्व और इसके सही इस्तेमाल के बारे में जानकारी दे सकें।

आयोडीनयुक्त नमक और लोकल नमक की जांच (Img: Dynamite News)

बच्चों के दिमागी विकास में क्यों जरूरी है आयोडीन?

आयोडीन शरीर में थायरॉइड हार्मोन बनाने के लिए जरूरी पोषक तत्व है। ये हार्मोन शरीर की सामान्य वृद्धि, मस्तिष्क के विकास और कई जरूरी शारीरिक प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभाते हैं। गर्भावस्था के दौरान आयोडीन की गंभीर कमी गर्भस्थ शिशु के मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के विकास को प्रभावित कर सकती है। वहीं, बच्चों में इसकी कमी से शारीरिक विकास और सीखने की क्षमता पर असर पड़ सकता है।

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आयोडीन की कमी से घेंघा यानी गर्दन में थायरॉइड ग्रंथि का बढ़ना और थायरॉइड से जुड़ी दूसरी समस्याएं भी हो सकती हैं। चिंता की बात यह है कि शुरुआती दौर में इसकी कमी के स्पष्ट लक्षण हमेशा दिखाई नहीं देते।

सिर्फ पैकेट देखकर न करें भरोसा

आयोडीनयुक्त नमक खरीदते समय पैकेट पर लिखी जानकारी जरूर देखें। नमक को नमी से बचाकर बंद डिब्बे में रखना चाहिए और लंबे समय तक खुला नहीं छोड़ना चाहिए। इससे नमक में आयोडीन की मात्रा बनाए रखने में मदद मिलती है। हालांकि, नमक पर आयोडीनयुक्त लिखा होना या घरेलू जांच में आयोडीन की मौजूदगी मिलना उसकी मात्रा निर्धारित मानक के अनुरूप होने की पूरी पुष्टि नहीं करता। इसके लिए जरूरत पड़ने पर प्रयोगशाला में जांच की जाती है।

साथ ही, आयोडीन जरूरी होने का मतलब यह नहीं कि नमक ज्यादा खाया जाए। संतुलित मात्रा में नमक का सेवन करना भी उतना ही जरूरी है।

कार्यशाला में दिया गया खास संदेश (Img: Dynamite News)

गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों पर विशेष ध्यान

कार्यशाला में गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और छोटे बच्चों के परिवारों तक पोषण संबंधी जानकारी पहुंचाने पर जोर दिया गया। ग्रामीण इलाकों में सहियाएं लोगों को आयोडीनयुक्त नमक के सही इस्तेमाल और संतुलित आहार के महत्व के बारे में जागरूक कर सकती हैं।

सिविल सर्जन ने भी आयोडीन की कमी से होने वाले विकारों की रोकथाम के लिए जागरूकता को जरूरी बताया। उन्होंने आयोडीनयुक्त नमक के इस्तेमाल, उसके सही भंडारण और थायरॉइड संबंधी परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लेने पर जोर दिया।

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नमूनों में मिला था आयोडीनयुक्त नमक

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5), 2019-21 के जिला स्तरीय आंकड़ों के मुताबिक, देवघर में जांच किए गए 1,026 परिवारों के नमूनों में से 98.3 प्रतिशत में आयोडीनयुक्त नमक पाया गया था।

हालांकि, यह आंकड़ा वर्ष 2019-21 का है और इसे जिले की मौजूदा स्थिति नहीं माना जा सकता। इसके अलावा, नमक में आयोडीन की मौजूदगी मिलने का मतलब यह भी नहीं है कि उसकी मात्रा हर नमूने में निर्धारित मानक के अनुरूप थी।

Location :  Deoghar

Published :  22 October 2026, 7:51 PM IST