दिल्ली के बाजारों में UPI शुल्क के खिलाफ व्यापारियों का विरोध, दुकानों पर लगे ‘केवल नकद’ के पोस्टर

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम द्वारा दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत शुल्क लगाने के निर्णय के विरोध में दिल्ली के शाहदरा, लक्ष्मी नगर और सदर बाजार के व्यापारियों ने डिजिटल भुगतान लेना बंद कर दिया है। दुकानों पर 'केवल नकद' के पोस्टर लग चुके हैं, जिससे डिजिटल भारत अभियान को बड़ा झटका लग सकता है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 17 September 2026, 8:26 AM IST

New Delhi: डिजिटल भुगतान की सुगमता के बीच राजधानी दिल्ली के बाजारों से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई (UPI) भुगतानों पर आगामी 15 अक्तूबर से 0.4 प्रतिशत शुल्क लागू करने के फैसले के बाद दिल्ली के व्यापारिक वर्ग में भारी रोष देखने को मिल रहा है। इस नए निर्णय के विरोध में पूर्वी दिल्ली के प्रमुख बाजारों के दुकानदारों ने अब डिजिटल भुगतान से दूरी बनानी शुरू कर दी है।

शाहदरा और लक्ष्मी नगर सहित प्रमुख बाजारों में विरोध के सुर

पूर्वी दिल्ली के शाहदरा, लक्ष्मी नगर, कृष्णा नगर और सदर बाजार जैसे व्यस्त व्यापारिक केंद्रों पर इसका असर तुरंत दिखाई देने लगा है। कई दुकानदारों ने अपनी दुकानों पर क्यूआर कोड हटाकर या उन्हें बंद कर "केवल नकद" (Cash Only) भुगतान स्वीकार किए जाने के चेतावनी भरे पोस्टर चस्पा कर दिए हैं। व्यापारियों का साफ कहना है कि छोटे और खुदरा कारोबार में पहले से ही मुनाफे का मार्जिन बेहद सीमित होता है, ऐसे में भुगतान प्रणाली पर लगने वाला यह अतिरिक्त वित्तीय बोझ उनके लिए असहनीय साबित होगा।

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खुदरा कारोबार और दैनिक लेन-देन पर पड़ेगा सीधा असर

पूर्वी दिल्ली के किराना स्टोर, परिधान (कपड़े) की दुकानें, जनरल स्टोर और अन्य खुदरा प्रतिष्ठानों पर रोजमर्रा की खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में उपभोक्ता यूपीआई का इस्तेमाल करते हैं। डिजिटल माध्यमों के आने से लेन-देन की प्रक्रिया बेहद पारदर्शी और आसान हो गई थी, जिससे ग्राहकों को जेब में नकदी लेकर चलने की जरूरत नहीं पड़ती थी। व्यापारियों का तर्क है कि यदि बड़े लेन-देन पर शुल्क वसूला गया, तो यह व्यवस्था खुदरा कारोबारियों और उपभोक्ताओं दोनों को मजबूरन वापस पारंपरिक नकद प्रणाली की ओर धकेल देगी।

व्यापारी संगठनों और संघों की तीखी प्रतिक्रिया

इस पूरे घटनाक्रम पर विभिन्न व्यापारिक संगठनों और उनके प्रमुख पदाधिकारियों ने सरकार व संबंधित एजेंसियों के प्रति कड़ी नाराजगी व्यक्त की है-

चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री: सीटीआई के चेयरमैन बृजेश गोयल का कहना है कि यूपीआई जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लगना चाहिए। यदि सरकार देश में डिजिटल भुगतान के बुनियादी ढांचे को मजबूत रखना चाहती है, तो बैंकों और पेमेंट सिस्टम की संचालन लागत की भरपाई सीधे तौर पर सरकारी प्रोत्साहन (इंसेंटिव) के जरिए की जानी चाहिए।

सदर बाजार बारी मार्केट ट्रेड्स एसोसिएशन: एसोसिएशन के अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा ने बताया कि छोटे और मध्यम श्रेणी के व्यापारियों का मार्जिन पहले से ही कड़े मुकाबले के कारण सीमित है। ऐसे में दो हजार से अधिक के यूपीआई भुगतानों पर शुल्क थोपने से उनके सीधे मुनाफे पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।

ऑल बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन: एसोसिएशन के अध्यक्ष योगेश सिंघल ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कारोबारियों ने ग्राहकों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए अपनी दुकानों पर क्यूआर कोड लगाए थे, परंतु इस तरह के शुल्कों के कारण अब उन्हें भविष्य में दोबारा नकदी पर निर्भर होना पड़ सकता है।

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डिजिटल भारत अभियान के सामने नई चुनौती

व्यापारियों का यह विरोध ऐसे समय में सामने आया है जब देश में डिजिटल अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। यदि इस शुल्क नीति पर पुनर्विचार नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में यह न केवल दिल्ली बल्कि देश के अन्य हिस्सों के खुदरा बाजारों में भी डिजिटल लेन-देन की रफ्तार को धीमा कर सकता है। फिलहाल, दिल्ली के व्यापारी अपने इस फैसले पर अडिग हैं और सरकार से इस शुल्क को तत्काल वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

Location :  New Delhi

Published :  17 September 2026, 8:25 AM IST