अब दिल्ली के लोग प्यास बुझाने के लिए नहीं तरसेंगे, छह राज्यों में समझौते से हर दिन 80 मिलियन गैलन पानी मिलेगा!

दिल्ली में पानी की बढ़ती जरूरत के बीच किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना से बड़ी राहत की उम्मीद जगी है। छह राज्यों के बीच बनी सहमति के बाद राजधानी को हर दिन करीब 80 MGD अतिरिक्त पानी मिलने का रास्ता खुला है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 16 September 2026, 10:35 AM IST

New Delhi: दिल्ली में बढ़ती आबादी के साथ पानी की जरूरत लगातार बढ़ रही है। राजधानी में गर्मियों के दौरान पानी की कमी लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन जाती है। ऐसे में किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर हुई अंतरराज्यीय सहमति दिल्ली के लिए अहम मानी जा रही है। परियोजना के तहत दिल्ली को हर दिन करीब 80 मिलियन गैलन प्रतिदिन (MGD) अतिरिक्त पानी मिलने की उम्मीद है। हालांकि, इस पानी के लिए दिल्लीवासियों को अभी कुछ साल इंतजार करना पड़ सकता है।

छह राज्यों के समझौते से दिल्ली को कितना पानी मिलेगा?

किशाऊ परियोजना के तहत दिल्ली के हिस्से में 109.9 मिलियन क्यूबिक मीटर (MCM) पानी आएगा। औसत दैनिक आधार पर यह करीब 30.1 करोड़ लीटर पानी के बराबर है। इसकी मात्रा लगभग 79.6 MGD यानी करीब 80 MGD प्रतिदिन बैठती है।

दिल्ली में इस समय पानी की अनुमानित मांग करीब 1,250 MGD है, जबकि उपलब्धता लगभग 1,000 MGD के आसपास बताई गई है। यानी राजधानी में सामान्य दिनों में भी करीब 250 MGD की कमी बनी रहती है। किशाऊ से मिलने वाला अतिरिक्त पानी इस अंतर को काफी हद तक कम कर सकता है। अगर परियोजना से करीब 80 MGD पानी उपलब्ध होता है तो दिल्ली की कुल आपूर्ति लगभग 1,080 MGD तक पहुंच सकती है। इस स्थिति में मौजूदा 250 MGD का अंतर घटकर करीब 170 MGD रह जाएगा।

गर्मियों में बढ़ जाती है परेशानी

दिल्ली की पानी की जरूरत उसकी आबादी के साथ लगातार बढ़ रही है। आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के मुताबिक राजधानी की अनुमानित आबादी करीब 2.5 करोड़ है। 50 गैलन प्रति व्यक्ति प्रतिदिन के मानक के हिसाब से पानी की मांग लगभग 1,250 MGD आंकी गई है। वहीं, गर्मी में हालात और मुश्किल हो जाते हैं। मई 2026 में कच्चे पानी की उपलब्धता घटने के कारण दिल्ली की आपूर्ति करीब 900 से 950 MGD तक पहुंच गई थी। उस दौरान मांग करीब 1,250 MGD रहने से कमी 300 MGD या उससे ज्यादा तक पहुंच गई थी।

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अभी तुरंत नहीं मिलेगा पानी

किशाऊ परियोजना को लेकर हुई सहमति के बाद यह उम्मीद जरूर बढ़ी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दिल्ली में अगले कुछ दिनों या महीनों में पानी पहुंचना शुरू हो जाएगा। परियोजना अभी निर्माण से पहले की मंजूरी प्रक्रिया में है। परियोजना को पूरा करने का अनुमान वर्ष 2033 तक बताया गया है। यानी दिल्ली को इस अतिरिक्त पानी के लिए अभी कई साल इंतजार करना पड़ सकता है।

केंद्र उठाएगा जल घटक की 90 फीसदी लागत

परियोजना के वित्तीय ढांचे में दिल्ली के लिए एक बड़ी बात यह है कि जल घटक की करीब 90 प्रतिशत लागत केंद्र सरकार वहन करेगी। बाकी 10 प्रतिशत राशि छह भागीदार राज्यों को मिलकर उठानी होगी।

किशाऊ परियोजना की मार्च 2018 के मूल्य स्तर पर अनुमानित लागत करीब 11,550 करोड़ रुपये थी। इसमें जल घटक की लागत लगभग 10,014 करोड़ रुपये और बिजली से जुड़ा हिस्सा करीब 1,536 करोड़ रुपये था। हालांकि, समय बीतने के साथ परियोजना की वास्तविक लागत बढ़ चुकी है। दिल्ली की ओर से परियोजना के लिए करीब 8.1 करोड़ रुपये की बीज राशि जमा किए जाने की बात भी सामने आई है।

यमुना पर भी कम हो सकता है दबाव

किशाऊ से आने वाला पानी दिल्ली के लिए सिर्फ अतिरिक्त मात्रा नहीं होगा, बल्कि कच्चे पानी के एक और स्रोत के रूप में काम कर सकता है। इससे वजीराबाद और चंद्रावल जैसे जल शोधन संयंत्रों पर कच्चे पानी की कमी का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।

किशाऊ परियोजना का उद्देश्य केवल दिल्ली की जरूरत पूरी करना नहीं है। इसके जरिए हिमाचल प्रदेश के हिस्से के पानी को दिल्ली और राजस्थान के लिए उपलब्ध कराने पर सहमति बनी है। केंद्र सरकार के अनुसार इससे यमुना में स्वच्छ पानी का प्रवाह बढ़ाने और नदी के पुनर्जीवन में भी मदद मिल सकती है।

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क्या खत्म हो जाएगा दिल्ली का जल संकट?

किशाऊ परियोजना से दिल्ली की पानी की कमी में बड़ी राहत मिल सकती है, लेकिन इससे राजधानी का पूरा जल संकट खत्म नहीं होगा। इसकी वजह यह है कि आने वाले वर्षों में आबादी और पानी की मांग दोनों बढ़ने की संभावना है।

आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार वर्ष 2041 तक दिल्ली की पेयजल जरूरत करीब 1,500 MGD तक पहुंच सकती है। इसलिए किशाऊ के साथ दूसरी परियोजनाओं, नए जल शोधन संयंत्रों, पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार, भूजल रिचार्ज और उपचारित पानी के दोबारा इस्तेमाल पर भी काम करना जरूरी होगा।

Location :  New Delhi

Published :  16 September 2026, 10:35 AM IST