दिल्ली में प्रदूषण से बचने के लिए दिल्ली की सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। उनके इस कदम से दिल्ली प्रदूषण मुक्त तो होगी ही साथ ही दिल्ली वासियों को भी बड़ा लाभ मिलेगा। पुरानी गाड़ी हटाने पर अब लोगों को एक लाख तक रूपए मिल सकेंगे। जानिये क्या है ये पूरी रिपोर्ट

दिल्ली गवर्नमेंट EV पॉलिसी (source: google)
New Delhi: राजधानी दिल्ली में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए रेखा सरकार एक बड़ा और क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है। सरकार अपनी नई इलेक्ट्रिक व्हीकल नीति (EV Policy 2.0) को अंतिम रूप दे रही है, जिसे आगामी बजट सत्र में पेश किया जा सकता है।
इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य दिल्ली की सड़कों से पेट्रोल और डीजल की गाड़ियों को धीरे-धीरे हटाकर इलेक्ट्रिक वाहनों को आम आदमी की पहली पसंद बनाना है। मौजूदा नीति मार्च के अंत में समाप्त हो रही है, इसलिए सरकार उसी समय नई और अपडेटेड पॉलिसी लागू करने की तैयारी में है।
नई नीति के तहत दिल्ली सरकार उन लोगों को बड़ा प्रोत्साहन देने जा रही है जिनके पास पुरानी गाड़ियां हैं। अगर आपके पास दिल्ली में रजिस्टर्ड BS-IV या उससे पुरानी डीजल-पेट्रोल कार है और आप उसे स्क्रैप यानी कबाड़ में देकर नई इलेक्ट्रिक कार खरीदते हैं, तो सरकार आपको लगभग एक लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि प्रदान करेगी।
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यह कदम न केवल पुरानी और ज्यादा धुआं छोड़ने वाली गाड़ियों को सड़कों से हटाने में मददगार साबित होगा, बल्कि मध्यम वर्ग के लिए नई इलेक्ट्रिक कार खरीदना भी काफी सस्ता और आसान बना देगा।
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार चार्जिंग के बुनियादी ढांचे को भी बहुत मजबूत करने वाली है। पूरी दिल्ली में लगभग 7,000 नए चार्जिंग स्टेशन जोड़ने की योजना पर काम चल रहा है, जिसके लिए करीब 400 वाहन निर्माताओं और वेंडर्स को शामिल किया जाएगा। खास बात यह है कि अब आम जनता के लिए दिल्ली ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (DTC) के बस डिपो में भी चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
इस पूरे प्रोजेक्ट की देखरेख नोडल एजेंसी के रूप में 'दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड' (DTL) करेगी, जिससे निजी कंपनियों की भागीदारी के साथ नेटवर्क का विस्तार तेजी से हो सकेगा।
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दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज सिंह के अनुसार, सरकार का लक्ष्य दिल्ली की लाइफलाइन मानी जाने वाली डीटीसी बसों की पूरी फ्लीट को इलेक्ट्रिक में बदलना है। इसके साथ ही कमर्शियल सेक्टर में प्रदूषण कम करने के लिए 1,100 मध्यम आकार के इलेक्ट्रिक ट्रकों को मंजूरी देने पर भी विचार किया जा रहा है।
फिलहाल दिल्ली में थ्री-व्हीलर तो तेजी से इलेक्ट्रिक में बदल रहे हैं, लेकिन छोटे मिनी ट्रक अभी भी सीएनजी पर निर्भर हैं। जानकारों का मानना है कि जैसे-जैसे चार्जिंग नेटवर्क मजबूत होगा, कमर्शियल सेक्टर में भी इलेक्ट्रिक ट्रकों की सफलता और स्वीकार्यता बढ़ती जाएगी।