तिरंगा लहराने के बाद जेल पहुंचे सौरव दास और आशुतोष रांका, कोर्ट ने हिरासत दो दिन और बढ़ाई

दिल्ली की SEM अदालत ने CJP के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ा दी है। दोनों पर बेल बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन का आरोप है। जंतर-मंतर पर तिरंगा लेकर किए गए प्रदर्शन और SIR के विरोध को लेकर CJP ने पुलिस और केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं...

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 19 October 2026, 7:19 PM IST
New Delhi: दिल्ली में जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराकर विरोध प्रदर्शन करना सीजेपी के सह-संयोजकों सौरव दास और आशुतोष रांका को भारी पड़ गया है। दिल्ली की स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) अदालत ने दोनों की न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ा दी है। पुलिस की मांग पर अदालत ने यह फैसला सुनाया। इससे पहले दिन में हुई सुनवाई के दौरान उनकी रिहाई पर फैसला सुरक्षित रख लिया गया था। इस कार्रवाई को लेकर सीजेपी ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, पुलिस की कार्रवाई के पीछे बेल बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन का आरोप बताया गया है।

दो दिन और जेल में रहेंगे सौरव दास और आशुतोष रांका

सीजेपी के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका को इससे पहले अदालत ने पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया था। दोनों पर पहले से तय बेल बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप है। अब पुलिस की मांग पर अदालत ने उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन और बढ़ा दी है।

इसी मामले में शामिल सीजेपी नेता अजिंक्य शिंदे को राहत मिली है। अदालत ने उनसे नया बेल बॉन्ड भरवाकर प्रक्रिया पूरी कराई। इस घटनाक्रम के बाद सीजेपी ने पुलिस की कार्रवाई और विरोध प्रदर्शन को लेकर प्रशासन के रुख पर सवाल उठाए हैं।

जंतर-मंतर पर तिरंगा लेकर पहुंचे थे प्रदर्शनकारी

विवाद उस समय बढ़ा, जब सीजेपी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया। जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से हटाए जाने के बावजूद सौरव दास, आशुतोष रांका और अन्य कार्यकर्ता वहां पहुंचे। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार की, तिरंगा लहराया और नारेबाजी की। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

दिल्ली पुलिस ने 12 अक्टूबर को जंतर-मंतर को प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थलों की सूची से हटा दिया था। इसके विकल्प के तौर पर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान जैसे स्थान तय किए गए। सीजेपी ने इस फैसले पर आपत्ति जताते हुए जंतर-मंतर पर ही प्रदर्शन करने की मांग की थी।

अभिजीत दिपके ने पूछा- क्या तिरंगा फहराना भी गैरकानूनी है?

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने अपने नेताओं की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि क्या अब राष्ट्रीय ध्वज फहराना भी गैरकानूनी हो गया है? दिपके ने कहा कि सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और उनकी गलती सिर्फ जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना थी।

दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर सरकार विरोध की आवाज को दबाने के लिए दृढ़ है, तो उसे आपातकाल घोषित करने की हिम्मत दिखानी चाहिए, न कि ऐसे तरीकों का सहारा लेना चाहिए। उनके बयान के बाद इस मामले को लेकर राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है।

अजिंक्य शिंदे का आरोप- मौलिक अधिकारों का हो रहा उल्लंघन

सीजेपी नेता अजिंक्य शिंदे ने भी पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि तिरंगा लहराने और 'भारत माता की जय' के नारे लगाने के कारण सौरव दास और आशुतोष रांका को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। शिंदे ने यह भी कहा कि आशुतोष रांका का जन्मदिन उसी दिन था, जब उन्हें जेल भेजा गया।

शिंदे ने केंद्र की मोदी-शाह सरकार पर अपनी शक्तियों का दुरुपयोग करने और लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जेल भेजकर नेताओं को डराने की कोशिश सफल नहीं होगी। ये आरोप सीजेपी नेताओं की ओर से लगाए गए हैं; पुलिस की कार्रवाई के कानूनी आधार के संबंध में बेल बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन का मामला सामने आया है।

एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग के खिलाफ प्रदर्शन

सीजेपी और विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग का विरोध कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए। इसी मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किए जा रहे हैं। सीजेपी ने एसआईआर से जुड़े मामलों में जवाबदेही तय करने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। आयोग का कहना है कि जिन मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं, वे उन्हें दोबारा जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। फिलहाल सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और एसआईआर को लेकर जारी विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

Location :  New Delhi

Published :  19 October 2026, 7:19 PM IST