सत्य निकेतन बिल्डिंग कांड में बड़ा अपडेट: कोर्ट ने हॉस्टल मालिक के खिलाफ सुनाया ये फैसला, जानें और क्या-क्या हुआ?

दिल्ली के सत्य निकेतन पांच मंजिला हॉस्टल डेज भवन हादसे में कोर्ट ने छह आरोपितों की न्यायिक हिरासत 14 दिन बढ़ा दी है। वहीं भवन मालकिन के पति हरिराम गुप्ता की जमानत याचिका खारिज कर दी गई। हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी...

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 23 September 2026, 5:46 AM IST

New Delhi: दिल्ली के सत्य निकेतन में हुए पांच मंजिला हॉस्टल डेज भवन हादसे में कोर्ट ने आरोपितों पर सख्ती बरकरार रखी है। सात लोगों की मौत वाले इस हादसे में गिरफ्तार छह आरोपितों की न्यायिक हिरासत 14 दिन के लिए बढ़ा दी गई है। वहीं भवन मालकिन उर्मिला गुप्ता के पति हरिराम गुप्ता को भी अदालत से राहत नहीं मिली। पटियाला हाउस स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर की अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है और आरोपपत्र भी दाखिल नहीं किया गया है। ऐसे में इस स्तर पर जमानत देना उचित नहीं होगा।

सात लोगों की मौत, कई हुए थे घायल

सत्य निकेतन के पांच मंजिला हॉस्टल डेज भवन हादसे में सात लोगों की जान चली गई थी, जबकि कई लोग घायल हुए थे। हादसे के बाद पुलिस ने मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार आरोपितों में हरिराम गुप्ता, उर्मिला गुप्ता के बेटे महेश गुप्ता, पीजी संचालक सुधांशु, शुभम त्यागी, श्रमिक ठेकेदार सनोज समेत अन्य लोग शामिल हैं। अदालत ने सभी छह आरोपितों की न्यायिक हिरासत को 14 दिन के लिए बढ़ा दिया है।

बिजली कनेक्शन और निर्माण कार्य में भूमिका की जांच

हरिराम गुप्ता की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि वह भवन की मालकिन उर्मिला गुप्ता के पति हैं। परिसर में लगे बिजली कनेक्शन भी उनके नाम पर हैं। अदालत ने कहा कि जांच के दौरान अब तक दर्ज किए गए कुछ गवाहों के बयानों में परिसर में चल रहे कार्यों में उनकी भूमिका का जिक्र सामने आया है। ऐसे में उन्हें परिसर से पूरी तरह अलग व्यक्ति नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने जांच में सामने आए तथ्यों को देखते हुए फिलहाल जमानत देने से इनकार कर दिया।

बचाव पक्ष ने उम्र और स्वास्थ्य का दिया हवाला

हरिराम गुप्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उनकी उम्र 81-82 वर्ष है और वह भारतीय वायुसेना से सेवानिवृत्त हैं। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वह स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे हैं। उनकी ओर से नियमित दवाइयों और उम्र को देखते हुए जमानत देने की मांग की गई थी। हालांकि, अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और जमानत याचिका खारिज कर दी।

जेल प्रशासन को दिए गए निर्देश

कोर्ट ने जेल अधीक्षक को निर्देश दिया कि हरिराम गुप्ता को उनकी चिकित्सकीय स्थिति के अनुसार जरूरी दवाएं समय पर उपलब्ध कराई जाएं। अदालत ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर होगी।

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Published :  23 September 2026, 5:46 AM IST