
टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस
Mumbai: फिल्म अभिनेता टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग के मामले की जांच में गैंगस्टर नेटवर्क के काम करने के तरीके को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। पुलिस की जांच के मुताबिक, वारदात को अंजाम देने के लिए अलग-अलग लोगों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। हथियार पहुंचाने, शूटरों की मदद करने और रेकी करने वाले लोगों के बीच सीधे संपर्क को सीमित रखा गया था। जांच एजेंसियों को यह जानकारी हथियार पहुंचाने के आरोप में पकड़े गए हरियाणा के सोनीपत निवासी 21 वर्षीय कुणाल से पूछताछ के दौरान मिली।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से सामने आई जानकारी के मुताबिक, लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के नेटवर्क में हैरी बॉक्सर, रणदीप मलिक, अनिल पंडित और अरजू बिश्नोई की भूमिका की जांच की जा रही है। आरोप है कि ये लोग अलग-अलग स्थानों पर उगाही और आपराधिक वारदातों को अंजाम दिलाने के लिए नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया गया अरुण इन चारों गैंगस्टरों के संपर्क में था। पुलिस उसके संपर्कों, हथियारों की आपूर्ति और कथित आपराधिक गतिविधियों में भूमिका की पड़ताल कर रही है।
पुलिस के मुताबिक, अरुण पर रणदीप मलिक के कहने पर सोनीपत में उगाही की रकम नहीं देने वाले एक मनी एक्सचेंजर पर फायरिंग करवाने का आरोप है। इस मामले में वह जेल भी गया था और जुलाई में बाहर आया था।
जांच अधिकारियों के अनुसार, अरुण हथियारों की तस्करी के साथ-साथ गिरोह के लिए युवाओं को जोड़ने का काम भी करता था। पुलिस अब उसके पुराने आपराधिक संपर्कों और अन्य वारदातों में कथित भूमिका की जांच कर रही है।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पूछताछ में अरुण ने कथित तौर पर बताया कि उसने उत्तर प्रदेश की रहने वाली राधा और बबिता को 10 से 12 हजार रुपये देने का लालच देकर मुंबई में हथियार पहुंचाने के लिए तैयार किया था। दोनों महिलाओं की उम्र करीब 23 वर्ष बताई गई है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि अरुण पहले भी उनके साथ काम कर चुका था। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि हथियारों की आपूर्ति के लिए महिलाओं को किस तरह तैयार किया गया और इस पूरी व्यवस्था में अन्य लोगों की क्या भूमिका थी।
जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में कथित तौर पर ऐसी व्यवस्था अपनाई गई, जिसमें किसी एक व्यक्ति को पूरी साजिश की जानकारी नहीं थी। हथियारों की व्यवस्था, शूटरों तक उन्हें पहुंचाने, रेकी करने और पैसे के लेनदेन जैसे काम अलग-अलग लोगों को सौंपे गए थे।
पुलिस इस तरीके की तुलना आतंकी संगठनों के उन मॉड्यूल से कर रही है, जिनमें अलग-अलग सदस्यों को सीमित जिम्मेदारियां दी जाती हैं। इस व्यवस्था का मकसद कथित तौर पर नेटवर्क के सदस्यों के बीच सीधा संपर्क कम रखना और जांच एजेंसियों के लिए पूरी कड़ी का पता लगाना मुश्किल बनाना होता है।
पुलिस के मुताबिक, मुंबई में हथियार पहुंचाने के दौरान राधा और बबिता को कथित शूटरों के चेहरे नहीं दिखाए गए थे। उन्हें केवल लोकेशन और शूटरों के पहने हुए कपड़ों की ऐसी तस्वीरें भेजी गई थीं, जिनमें चेहरे दिखाई नहीं दे रहे थे।
आरोप है कि दोनों महिलाएं तय स्थान पर पहुंचीं और संबंधित व्यक्ति को हथियार सौंपकर लौट आईं। पुलिस इस कथित व्यवस्था के जरिए हथियारों की आपूर्ति करने वालों और फायरिंग करने वालों के बीच संपर्क की कड़ी जोड़ने का प्रयास कर रही है।
टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग के मामले में जांच एजेंसियां हथियारों की आपूर्ति, कथित शूटरों, रेकी और गिरोह के संपर्कों की पड़ताल कर रही हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वारदात की योजना किस स्तर पर बनाई गई और इसमें किन-किन लोगों ने क्या भूमिका निभाई।
फिलहाल, पूछताछ में सामने आए आरोपों और जानकारियों की जांच जारी है। मामले में संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
Location : Mumbai
Published : 22 October 2026, 10:13 AM IST
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