
प्रतीकात्मक तस्वीर (Img: Pinterest)
New Delhi: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अब दुनिया के डिजिटल नेटवर्क पर भी खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। अगर दोनों देशों के बीच फिर से युद्ध छिड़ता है और समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबल्स को निशाना बनाया जाता है, तो इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। भारत समेत दुनिया के कई देशों में इंटरनेट कनेक्टिविटी, ऑनलाइन पेमेंट और डिजिटल सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से संभावित सैन्य कार्रवाई के संकेतों के बीच ईरान खाड़ी क्षेत्र में बिछी अंडरसी कम्युनिकेशन केबल्स को निशाना बनाने की तैयारी कर रहा है। हालांकि, केबल्स पर हमले और सेवाओं के व्यापक रूप से ठप होने की आशंका को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका ईरान के खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई कर सकता है। इसी बीच रॉयटर्स ने ईरानी सुरक्षा अधिकारियों के हवाले से बताया है कि अमेरिका और इजरायल की ओर से फिर हमला होने की स्थिति में ईरान खाड़ी में समुद्र के नीचे मौजूद संचार केबल्स को निशाना बनाने की तैयारी कर रहा है। अगर ऐसा होता है, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट नेटवर्क और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से बड़ी संख्या में मालवाहक जहाज और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े टैंकर गुजरते हैं। इस क्षेत्र के समुद्र के नीचे अंतरराष्ट्रीय संचार केबल्स भी मौजूद हैं, जो एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच डेटा ट्रांसफर में अहम भूमिका निभाती हैं। इन केबल्स के जरिए इंटरनेट ट्रैफिक, डिजिटल संचार और कई ऑनलाइन सेवाओं का संचालन होता है।
समुद्र के नीचे बिछी केबल्स को नुकसान पहुंचने पर इंटरनेट की रफ्तार धीमी हो सकती है और कुछ क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बाधित हो सकती है। इसका असर ऑनलाइन बैंकिंग, क्लाउड सेवाओं, वीडियो स्ट्रीमिंग, सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्लेटफॉर्म पर भी पड़ सकता है।
भारत में UPI पेमेंट, WhatsApp और YouTube जैसी सेवाएं भी अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट कनेक्टिविटी से जुड़ी हैं। हालांकि, केबल्स को नुकसान पहुंचने का मतलब यह नहीं है कि ये सभी सेवाएं पूरे देश में बंद हो जाएंगी। वैकल्पिक केबल्स, नेटवर्क रूटिंग और स्थानीय सर्वर के कारण सेवाएं जारी रह सकती हैं, लेकिन कुछ सेवाओं में रुकावट या देरी संभव है।
दुनियाभर के इंटरनेट डेटा का लगभग 95 से 99 प्रतिशत हिस्सा समुद्र के नीचे बिछी केबल्स के जरिए ट्रांसफर होने का अनुमान दिया जाता है। यही वजह है कि इन केबल्स की सुरक्षा वैश्विक डिजिटल व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है। अगर युद्ध के दौरान इन्हें नुकसान पहुंचता है, तो इसका असर संचार, व्यापार और डिजिटल सेवाओं पर पड़ सकता है। ऐसे में अमेरिका-ईरान तनाव अब सिर्फ सैन्य संघर्ष का मुद्दा नहीं, बल्कि दुनिया के इंटरनेट नेटवर्क की सुरक्षा से जुड़ी चिंता भी बनता जा रहा है।
Location : New Delhi
Published : 24 October 2026, 1:00 PM IST