
खामेनेई परिवार (Img : Google)
New Delhi : ईरान की राजनीति और धार्मिक नेतृत्व से जुड़ी एक बड़ी घटना इन दिनों पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बनी हुई है। देश के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा 4 जुलाई से शुरू होकर 9 जुलाई को उनके गृह शहर मशहद में समाप्त होगी। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया के बीच एक और नाम ने सुर्खियां बढ़ा दी हैं और वह है उनकी बहू जहरा हद्दाद-अदेल। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहरा की मौत भी उसी कथित हवाई हमले में हुई थी जिसमें खामेनेई की जान गई थी।
जहरा हद्दाद-अदेल ईरान के प्रभावशाली कंजर्वेटिव नेता घोलम-अली हद्दाद-अदेल की बेटी थीं। उनका विवाह मोजतबा खामेनेई से वर्ष 1999 में हुआ था। यह रिश्ता सिर्फ दो परिवारों का मिलन नहीं माना गया, बल्कि ईरान की सत्ता संरचना में दो बड़े राजनीतिक घरानों के बीच मजबूत गठजोड़ के रूप में देखा गया। शादी के बाद जहरा ने सार्वजनिक जीवन से दूरी बनाए रखी और बेहद निजी जीवन जिया।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह शादी उस दौर में काफी अहम मानी गई जब ईरान के कंजर्वेटिव धड़े का प्रभाव लगातार मजबूत हो रहा था। घोलम-अली हद्दाद-अदेल उस समय देश की राजनीति में बड़ा नाम थे और उनकी पहुंच सत्ता के शीर्ष तक मानी जाती थी। हालांकि परिवार की ओर से इसे हमेशा निजी फैसला बताया गया।
रिपोर्ट्स के अनुसार मोजतबा खामेनेई और जहरा के तीन बच्चे हैं, लेकिन ईरान की सत्ता से जुड़े परिवारों की तरह उनकी पहचान और निजी जीवन को भी बेहद गोपनीय रखा गया। यही कारण है कि जहरा के बारे में सार्वजनिक जानकारी बहुत सीमित रही है।
खामेनेई की अंतिम यात्रा तेहरान, कोम, कर्बला और नजफ से होते हुए मशहद पहुंचेगी, जो शिया मुसलमानों का प्रमुख धार्मिक केंद्र माना जाता है। यहीं पर उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। अब रिपोर्ट्स के अनुसार, जहरा हद्दाद-अदेल को भी उसी स्थान पर दफनाए जाने की संभावना है। जिससे अंतिम विदाई और भी अधिक संवेदनशील और ऐतिहासिक बन गई है। इस पूरे घटनाक्रम पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजरें टिकी हुई हैं।
Location : New Delhi
Published : 3 July 2026, 5:02 PM IST