रूस से तेल आयात पर मंडराया संकट: भारत सहित 10 देशों पर 100% टैरिफ लगाने की तैयारी में अमेरिकी सांसद

रूस पर प्रतिबंध वाले अमेरिकी विधेयक में संशोधन पेश किया गया है, जिसके तहत भारत और चीन समेत 10 प्रमुख देशों पर 100% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है। राष्ट्रपति ट्रंप को मिलने वाले इस अधिकार से रूस से तेल आयात महंगा हो सकता है। प्रतिनिधि सभा में मतदान से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 15 September 2026, 10:14 AM IST

Washington: रूस के साथ व्यापारिक संबंध रखने वाले देशों की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। अमेरिका में रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले एक अहम विधेयक को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। अमेरिकी संसद में इस विधेयक पर विचार के दौरान कई संशोधन पेश किए गए हैं, जिसके तहत भारत समेत दस प्रमुख देशों पर सौ फीसदी तक का भारी-भरकम आयात शुल्क (टैरिफ) लगाने का प्रस्ताव सामने आया है। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और भू-राजनीतिक समीकरणों में हलचल मच गई है।

दस देशों को सूची में शामिल करने का प्रस्ताव

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक सांसद स्टेनी होयर द्वारा एक नया संशोधन पेश किया गया है। इसके माध्यम से उन देशों के नामों को स्पष्ट रूप से रेखांकित करने का सुझाव दिया गया है जो रूस के साथ बड़े पैमाने पर व्यापार करते हैं। इस प्रस्तावित सूची में भारत, चीन, तुर्किये, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक रिपब्लिक, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सिंगापुर, कजाखस्तान और किर्गिज रिपब्लिक के नाम शामिल हैं। यदि यह संशोधन पारित होता है, तो इन सभी दस देशों पर सौ प्रतिशत तक का शुल्क लगाया जा सकता है।

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सीनेट से पारित विधेयक और ‘शैडो फ्लीट’ पर शिकंजा

यह पूरा घटनाक्रम ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट’ से जुड़ा हुआ है, जिसे अमेरिकी सीनेट ने पिछले महीने 86 के मुकाबले 11 मतों के भारी बहुमत से मंजूरी दी थी। इस मूल विधेयक में रूसी नेतृत्व और उसके ऊर्जा क्षेत्र को कड़े प्रतिबंधों के दायरे में लाने का प्रावधान है। इसके अलावा, उन जहाजों पर भी सख्त कार्रवाई की बात कही गई है जिन्हें रूस पर लगे प्रतिबंधों को धेंगा दिखाते हुए तेल की आपूर्ति करने वाले ‘शैडो फ्लीट’ यानी गुप्त बेड़े के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि रूस से होने वाले कच्चे तेल का यह व्यापार सीधे तौर पर यूक्रेन के खिलाफ चल रहे युद्ध के लिए वित्तीय मदद का जरिया बन रहा है।

टैरिफ अधिकारों को लेकर अमेरिकी सांसदों में मतभेद

सात अगस्त को सीनेट से पारित हुए विधेयक में शुरुआत में सीधे तौर पर देशों के नाम नहीं लिखे गए थे, बल्कि सिर्फ पांच ऐसे शीर्ष आयातक देशों का जिक्र था जो सबसे अधिक मात्रा में तेल और गैस खरीदते हैं। यह विधेयक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत और चीन सहित प्रमुख व्यापारिक साझेदारों पर सौ प्रतिशत टैरिफ लगाने की शक्ति देता है।

हालांकि, इस प्रावधान को लेकर अमेरिकी राजनीतिक गलियारों में विरोध भी देखने को मिल रहा है। डेमोक्रेटिक सांसद ग्रेगरी मीक्स, जो राष्ट्रपति को अतिरिक्त टैरिफ लगाने के अधिकार दिए जाने के मुखर विरोधी हैं, ने विधेयक की धारा 113 को पूरी तरह से हटाने का संशोधन पेश किया है। इसी धारा के तहत राष्ट्रपति को द्वितीयक टैरिफ लगाने का व्यापक अधिकार मिलने का प्रावधान है। मीक्स के इस प्रस्ताव को तीन अन्य सांसदों का भी समर्थन मिला है।

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राष्ट्रीय सुरक्षा छूट और यूक्रेन के लिए वित्तीय सहायता

ग्रेगरी मीक्स ने एक अन्य संशोधन के जरिए राष्ट्रपति को यह अधिकार देने की मांग की है कि यदि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद जरूरी हो, तो किसी विदेशी व्यक्ति पर लागू प्रतिबंधों से 90 दिनों की छूट दी जा सकेगी। इस अवधि को जरूरत पड़ने पर आगे भी बढ़ाया जा सकेगा। इसके साथ ही, मीक्स ने यूक्रेन को पंद्रह अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष ऋण उपलब्ध कराने का भी प्रस्ताव रखा है, ताकि यूक्रेन रक्षा उपकरण और सेवाएं आसानी से खरीद सके।

प्रतिनिधि सभा के पास बेहद कम समय

फिलहाल इन तमाम संशोधनों को प्रतिनिधि सभा की रूल्स कमेटी ने सार्वजनिक कर दिया है। चूंकि 3 नवंबर को अमेरिकी मध्यावधि चुनाव होने हैं, इसलिए प्रतिनिधि सभा के शुरुआती अवकाश पर जाने से पहले सांसदों के पास इस विधेयक को पारित कराने के लिए केवल चार कार्यदिवस ही शेष बचे हैं। इस वजह से इस महत्वपूर्ण विधेयक और इससे जुड़े संशोधनों पर अंतिम फैसला जल्द आने की उम्मीद है।

Location :  Washington

Published :  15 September 2026, 10:14 AM IST