पाक ने जिसे माना दोस्त, उसी ने खोली उसकी पोल; जानें क्यों तुर्किए ने पाकिस्तान को दिया बड़ा झटका

पाकिस्तान को अपने करीबी दोस्त तुर्किए से बड़ा झटका लगा है। अंकारा ने साफ कर दिया है कि वह पाकिस्तान और सऊदी अरब के साथ किसी बहुपक्षीय रक्षा समझौते में शामिल नहीं होगा। तुर्किए ने पाक सेना पर बढ़ते दबाव और आर्थिक हालात को इसकी बड़ी वजह बताया है।

Post Published By: Sapna Srivastava
Updated : 2 February 2026, 11:13 AM IST

New Delhi: पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर एक बड़ा झटका लगा है। उसके करीबी सहयोगी माने जाने वाले तुर्किए ने साफ कर दिया है कि वह पाकिस्तान और सऊदी अरब के साथ किसी भी बहुपक्षीय रक्षा समझौते का हिस्सा नहीं बनेगा। एएफपी की रिपोर्ट्स के मुताबिक, तुर्किए के रक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि न तो मौजूदा सरकार इस तरह के किसी समझौते में शामिल है और न ही भविष्य में इस पर विचार किया जा रहा है।

पाकिस्तान की अपील के बावजूद तुर्किए का इनकार

तुर्किए के एक वरिष्ठ सैन्य सूत्र के अनुसार, पाकिस्तान की अपील के बावजूद अंकारा किसी त्रिपक्षीय या बहुपक्षीय आपसी रक्षा समझौते में दिलचस्पी नहीं रखता। सूत्रों ने यह भी बताया कि सऊदी अरब भी बहुपक्षीय व्यवस्था के बजाय केवल द्विपक्षीय रक्षा समझौतों को ही प्राथमिकता देता है। ऐसे में पाकिस्तान की ओर से प्रस्तावित साझा रक्षा ढांचे को व्यवहारिक नहीं माना जा रहा है।

पाकिस्तानी सेना की क्षमताओं पर सवाल

तुर्किए के सुरक्षा सूत्रों ने पाकिस्तान की सैन्य स्थिति को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि पाकिस्तान पहले से ही तीन सीमाओं पर सक्रिय है, जिनमें भारत, अफगानिस्तान और ईरान शामिल हैं। इसके अलावा, देश को आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है। तुर्किए का मानना है कि इन परिस्थितियों ने पाकिस्तानी सेना की क्षमता और संसाधनों पर अतिरिक्त दबाव डाला है, जिससे किसी बहुपक्षीय रक्षा समझौते के तहत जिम्मेदारियां निभाना मुश्किल हो सकता है।

चीन पर बढ़ती निर्भरता भी बनी वजह

तुर्किए के रक्षा अधिकारियों ने इस बात की ओर भी इशारा किया कि पाकिस्तान का ज्यादातर सैन्य साजो-सामान चीन से आता है। खासकर एयर डिफेंस और एयरफोर्स से जुड़ी तकनीक में पाकिस्तान की चीन पर निर्भरता काफी ज्यादा है। अंकारा का मानना है कि ऐसी स्थिति में किसी बाध्यकारी बहुपक्षीय रक्षा ढांचे में शामिल होना जोखिम भरा हो सकता है।

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आर्थिक हालात पर भी जताई चिंता

तुर्किए ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को भी इस फैसले की अहम वजह बताया। तुर्किए के अधिकारियों के मुताबिक, “एक मजबूत अर्थव्यवस्था ही एक मजबूत सेना की नींव होती है।” उनका कहना है कि पाकिस्तान और तुर्किए, दोनों ही सऊदी अरब के स्तर पर रक्षा आधुनिकीकरण में बड़े पैमाने पर निवेश करने की स्थिति में नहीं हैं। इसी कारण त्रिपक्षीय रक्षा गठबंधन व्यावहारिक नहीं लगता।

रक्षा सहयोग बरकरार, लेकिन सीमित

हालांकि तुर्किए ने यह भी साफ किया कि पाकिस्तान के साथ उसके रक्षा संबंध मजबूत बने रहेंगे। अंकारा पहले से ही पाकिस्तान को सैन्य उपकरण, वायु रक्षा प्रणालियां, ड्रोन तकनीक और अन्य रक्षा सहयोग देता आ रहा है। यह बयान रेसेप तैयप एर्दोगान सरकार की उस नीति के अनुरूप है, जिसमें क्षेत्रीय देशों से अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठाने पर जोर दिया गया है।

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‘इस्लामिक नाटो’ की कोशिशों को झटका

पाकिस्तान मिडिल ईस्ट में एक तथाकथित “इस्लामिक नाटो” बनाने की कोशिश कर रहा था। 30 जनवरी को तुर्किए के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ सेल्चुक बायरक्तारओग्लू की पाकिस्तान यात्रा के दौरान इस्लामाबाद की ओर से इस तरह के रक्षा समझौते के संकेत दिए गए थे। हालांकि तुर्किए के इस ताजा रुख ने इन अटकलों पर पूरी तरह विराम लगा दिया है।

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Published : 
  • 2 February 2026, 11:13 AM IST