
नेपाल तबाही का खौफनाक रूप (Img: X)
New Delhi: नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। अब तक इस आपदा में 903 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4,247 से ज़्यादा लोग लापता हैं। नेपाल के 'नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी' (NDRRMA) के अनुसार, सेना और पुलिस की टीमें छठे दिन भी बड़े पैमाने पर राहत और बचाव कार्य चला रही हैं।
वैज्ञानिकों के शुरुआती अध्ययन से पता चलता है कि यह आपदा सिर्फ भारी मॉनसून बारिश का नतीजा नहीं थी; हिमालयी क्षेत्र में हुई एक बड़ी भू-वैज्ञानिक घटना ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।
U.S. जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) और अन्य वैज्ञानिकों के शुरुआती विश्लेषण के अनुसार, इस आपदा का मुख्य कारण ग्लेशियर का टूटना माना जा रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि लगभग 5,200 मीटर की ऊंचाई पर माउंट लांगटांग लिरुंग से बर्फ और चट्टान का एक विशाल हिस्सा टूटकर अलग हो गया। यह घटना इतनी जबरदस्त थी कि हजारों टन बर्फ और मलबा तेजी से घाटी की ओर नीचे की तरफ बहने लगा।
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ग्लेशियर टूटने के बाद बर्फ और चट्टानी मलबे का एक विशाल ढेर नीचे गिरा जिससे जबरदस्त हिमस्खलन हुआ। वैज्ञानिकों का कहना है कि मलबा कई किलोमीटर की ऊंचाई से गिरा और इसके असर से जमीन में भूकंप जैसे झटके महसूस किए गए। मलबे के इस विशाल जमावड़े ने नदी के प्राकृतिक बहाव को रोक दिया जिससे संकट और गहरा गया।
नेपाल के जल विज्ञान विभाग (Department of Hydrology) के अनुसार, भारी मलबे ने नेपाल-तिब्बत सीमा से लगभग 20 किलोमीटर ऊपर की ओर ल्हेन्डे नदी का रास्ता रोक दिया, जिससे एक अस्थायी बांध बन गया। जैसे-जैसे पानी का दबाव बढ़ा, बांध अचानक टूट गया। इससे निचले इलाकों में कीचड़, पत्थरों और पानी का सैलाब आ गया, जिसने गांवों, सड़कों और इमारतों को अपनी चपेट में ले लिया।
विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण हिमालयी क्षेत्र में बर्फ तेज़ी से पिघल रही है। इससे ऊंचे पहाड़ों की चट्टानी संरचनाएं कमजोर और अस्थिर हो जाती हैं, जिससे ग्लेशियर टूटने और भूस्खलन जैसी घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
आपदा के बाद कई जिलों से लगातार शव बरामद किए जा रहे हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में चितवन, नवलपरासी ईस्ट, नवलपरासी वेस्ट और नुवाकोट शामिल हैं। मलबे में दबे शवों के सड़ने-गलने के कारण अधिकारियों को पहचान की प्रक्रिया पूरी करने के लिए DNA सैंपलिंग पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
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रिपोर्टों के अनुसार, लापता लोगों में लगभग 85 सुरक्षाकर्मी और 320 विदेशी नागरिक शामिल हैं। राहत और बचाव दल प्रभावित इलाकों में तेजी से तलाशी अभियान चला रहे हैं।
भारत भी नेपाल में चल रहे राहत कार्यों में मदद कर रहा है। त्रिशूली हाइड्रोपावर साइट की सुरंगों में फंसे लोगों को बचाने के लिए बचाव अभियान जारी है। भारत ने शवों की पहचान और फोरेंसिक जांच में मदद के लिए काठमांडू में 19 सदस्यों वाली फोरेंसिक और बचाव टीम भेजी है। यह टीम DNA सैंपलिंग और पहचान की प्रक्रिया में नेपाली अधिकारियों की मदद कर रही है।
Location : New Delhi
Published : 31 August 2026, 12:38 PM IST