
ट्रंप और खामेनेई के बीच युद्ध और समझौते की जंग (Img- Dynamite News)
Tehran: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। अमेरिकी न्यूज वेबसाइट एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार को कतर के मध्यस्थों ने ईरान की राजधानी तेहरान में 12 घंटे से ज्यादा समय तक बातचीत की।
इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच सीधी वार्ता दोबारा शुरू कराना और संभावित सैन्य टकराव को रोकना है। रविवार को कतर की राजधानी दोहा में बातचीत का अगला दौर होने की संभावना है।
एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, कतर दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ाने के लिए कुछ दिनों तक आपसी कदम उठाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका चाहता है कि बातचीत शुरू होने से पहले ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर रियायत दे। वहीं, ईरान की मांग है कि अमेरिका नौसैनिक नाकेबंदी में ढील दे, जब्त संपत्तियां जारी करे और तेल निर्यात की अनुमति दे। हालांकि, अभी किसी समझौते पर सहमति नहीं बनी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को स्वीकार किया कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत चल रही है। हालांकि, उन्होंने किसी बड़े समझौते को लेकर स्पष्ट संकेत नहीं दिया।
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ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि ईरान बातचीत करना चाहता है और दोनों पक्ष लगातार संपर्क में हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के पास अभी समय है। दूसरी ओर, ईरान ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई हुई तो जवाब दिया जाएगा।
कतर ने ईरान के उन परमाणु ठिकानों पर संयुक्त राष्ट्र के निरीक्षकों को भेजने का प्रस्ताव रखा है, जिन्हें हालिया हमलों में नुकसान पहुंचा था। राजनयिकों के मुताबिक, निरीक्षण की अनुमति मिलने पर अमेरिका शुरुआती समझौते के तहत ईरान को कुछ सीमित प्रतिबंधों से राहत देने पर विचार कर सकता है। हालांकि, इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए दोनों देशों की सहमति जरूरी होगी। इसे बातचीत आगे बढ़ाने का एक संभावित रास्ता माना जा रहा है।
एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप की राष्ट्रीय सुरक्षा टीम में ईरान को लेकर रणनीति पर मतभेद हैं। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और विदेश मंत्री मार्को रुबियो सैन्य दबाव बढ़ाने के पक्ष में बताए जा रहे हैं।
वहीं, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और सलाहकार जेरेड कुशनर बातचीत दोबारा शुरू करने के समर्थक बताए गए हैं। वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट आर्थिक दबाव जारी रखने की पैरवी कर रहे हैं।
एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को नुकसान होने की स्थिति में ट्रंप ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य हमले पर विचार कर सकते हैं। हालांकि, यह एक अधिकारी का आकलन है, कोई घोषित फैसला नहीं।
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ईरान ने भी चेतावनी दी है कि उसके ऊर्जा ठिकानों पर हमला हुआ तो वह सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत और बहरीन के तेल-गैस ठिकानों को निशाना बना सकता है। ऐसे में दोहा वार्ता पर क्षेत्रीय देशों की नजरें टिकी हैं।
Location : Tehran
Published : 31 October 2026, 12:54 PM IST