
ईरान में युद्ध के बीच क्यों खौफ में हैं युवा
New Delhi: ईरान में चल रहे युद्ध के बीच वहां पर युवा सकते में हैं। उनके सकते में होने का मुख्य कारण यह है कि उन्हें अब जबरन सेना में भर्ती कराया जा रहा है। उनकी इच्छा जाने बिना ही उन्हें सेना में शामिल किया जा रहा है। इससे युवाओं में खौफ का आलम है। सबके जेहन में यही डर है कि ना जाने कब कौन उन्हें उठा कर ले जाए।
ईरान में युवाओं का कहना है कि मौजूदा स्थिति हमारे लिए काफी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। हालांकि, हम लोग अपने-अपने कामों में मशगूल हैं। लेकिन, हमें हमेशा यही डर लगा रहता है कि ना जाने कब कौन आकर हमें सेना में भर्ती करके जबरन उठा ले जाए। अगर यही स्थिति आगे भी जारी रही, तो निसंदेह हमें यह कहने में कोई गुरेज नहीं है कि आने वाले दिन हमारे लिए दूभर हो सकते हैं।
अब आपके जेहन में सवाल आ रहा होगा कि जब सभी देश हर प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सेना को तैयार करके रखती है। बाकायदा उन पर एक निश्चित राशि खर्च करती है, ताकि वो हर प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहे, तो आखिर अब ईरान में ऐसी कौन सी स्थिति पैदा हो चुकी है कि जबरन उन्हें सेना में भर्ती कराया जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल और अमेरिका की ओर से ईरान पर किए गए हमले से बड़ी संख्या में लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा है, जिसमें प्रमुख रूप से सेना और इस्लामिक रेवेल्यूशनरी के लोग शामिल हैं। दावा किया जा रहा है कि इसी वजह से ईरान में सेना की किल्लत पैदा हो गई है, जिसे देखते हुए अब युवाओं को जबरन सेना में शामिल होने की बात कही जा रही है।
वहीं, ईरानी सरकार की तरफ से उन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया गया है, जिसमें यह कहा जा रहा है कि युवाओं को जबरन में सेना में भर्ती करने के लिए बाध्य किया जा रहा है। सरकार का स्पष्ट कहना है कि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है, बल्कि ऐसी स्थिति में जब देश जंग से जूझ रहा है, तो युवाओं का कर्तव्य होना चाहिए कि वो सामने आकर देश की सेवा करें। ऐसी स्थिति में जबरन भर्ती होने का तो कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है।
हालांकि, इससे पहले ईरान-इराक युद्ध के दौरान भी जबरन भर्ती के आरोप लगे थे। लेकिन, उस वक्त भी इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया गया था। तब सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया था कि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। आमतौर पर जब चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा होती है, तो युवाओं को खुद सामने आकर सेना में शामिल होने के लिए इच्छुक होना चाहिए।
हालांकि, ईरान अपनी नीति के तहत 18 साल से अधिक उम्र के सभी युवाओं को सेना में शामिल होने के लिए कहता है। सभी युवाओं को सैन्य प्रशिक्षण दिया जाता है, ताकि अगर निकट भविष्य में देश में किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति पैदा हो, तो सहजता से उसका सामना किया जा सके।
ईरान में प्रत्येक युवा को सैन्य प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। इस प्रशिक्षण के तहत सभी युवाओं को सुरक्षा व्यवस्था के बारे में पूरी जानकारी प्रदान की जाती है। आमतौर पर यह प्रशिक्षण 17 से 24 महीने तक चलता है, जिसमें सेना में शामिल होने वाले युवाओं को सामरिक क्षेत्र के बारे में पूरी जानकारी दी जाती है।
ईरानी सरकार का कहना है कि हमारे ऊपर कभी हमला हो सकता है, तो ऐसी स्थिति में उससे निपटने के लिए हमारे देश में सभी युवाओं के लिए सैन्य रूप से प्रशिक्षित होना अनिवार्य है। इसी को देखते हुए इस तरह की व्यवस्था की गई है।
Location : New Delhi
Published : 26 March 2026, 6:23 PM IST