
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Source: Pinterest)
New Delhi: अमेरिका में नौकरी करने का सपना देखने वाले भारतीय IT कर्मचारियों के लिए H-1B वीजा से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है। Infosys, TCS और Cognizant जैसी बड़ी IT कंपनियों ने अमेरिका में काम करने के लिए H-1B वीजा की नई लॉटरी में कम रजिस्ट्रेशन कराए हैं। इसके पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सरकार के सख्त इमिग्रेशन नियम और बढ़ती लागत को संभावित वजह माना जा रहा है।
कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (CRS) की रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2026 की तुलना में 2027 के लिए तीन बड़ी IT कंपनियों के रजिस्ट्रेशन में भारी कमी आई है।
आंकड़ों के अनुसार, प्रमुख IT और आउटसोर्सिंग कंपनियों के कुल रजिस्ट्रेशन 24,946 से घटकर 2,055 रह गए। इसका मतलब है कि इन कंपनियों ने नई वीजा लॉटरी के लिए पहले के मुकाबले कम उम्मीदवारों का रजिस्ट्रेशन कराया।
अमेरिकी सरकार ने विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देने से जुड़े नियमों में बदलाव किए हैं। नई व्यवस्था में अधिक वेतन वाले पदों को प्राथमिकता देने के लिए वेटेड सिलेक्शन प्रक्रिया लागू की गई।
इसके अलावा, कुछ नए H-1B कर्मचारियों के लिए 1,00,000 डॉलर के भुगतान से जुड़ा नियम भी लागू किया गया है। इन बदलावों के कारण अमेरिकी कंपनियों के लिए विदेश से कर्मचारियों को बुलाना महंगा हो सकता है। इसी वजह से IT कंपनियां अपनी भर्ती की योजना में बदलाव कर रही हैं।
रजिस्ट्रेशन घटने से यह संकेत मिलता है कि कंपनियां अब अमेरिका में कर्मचारियों को नियुक्त करने के दूसरे तरीकों पर भी ध्यान दे सकती हैं। इनमें अमेरिका में पहले से मौजूद कर्मचारियों को काम देना और स्थानीय स्तर पर भर्ती करना शामिल है।
हालांकि, इन आंकड़ों से यह साबित नहीं होता कि इतनी ही नौकरियां खत्म हो गई हैं। H-1B रजिस्ट्रेशन की संख्या केवल नई वीजा लॉटरी में शामिल होने वाले उम्मीदवारों की जानकारी देती है। इसका कंपनियों में पहले से काम कर रहे कर्मचारियों के वीजा पर अपने आप कोई असर नहीं पड़ता।
फिलहाल, भारतीय IT कर्मचारियों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिकी वीजा नियमों में आगे क्या बदलाव होते हैं और कंपनियां अपनी भर्ती नीति में क्या कदम उठाती हैं।
Location : Washington
Published : 21 October 2026, 10:05 AM IST