
ट्रंप के प्रस्ताव पर ईरान का दोटूक जवाब
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म कराने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर की तेहरान यात्रा के दौरान ईरान ने साफ कर दिया कि जब तक वॉशिंगटन उसकी शर्तें पूरी नहीं करता, तब तक बातचीत आगे बढ़ने की उम्मीद कम है। परमाणु कार्यक्रम और अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर तेहरान के कड़े रुख ने पाकिस्तान की मध्यस्थता के सामने भी बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
ट्रंप के प्रस्ताव पर ईरान का दोटूक जवाब
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई के साथ असीम मुनीर की मुलाकातों में अमेरिका के साथ तनाव कम करने और बातचीत दोबारा शुरू करने का मुद्दा उठा। ईरानी मीडिया के मुताबिक, तेहरान ने स्पष्ट किया कि अमेरिका को पहले भरोसा बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।
ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने कहा कि देश का संवर्धित यूरेनियम कहीं बाहर नहीं भेजा जाएगा। उन्होंने इसे ईरान की राष्ट्रीय संपत्ति बताया। संसद अध्यक्ष गालिबाफ ने भी अमेरिका पर भरोसा बहाल करने के लिए ईरान की शर्तें पूरी करने पर जोर दिया।
6 अरब डॉलर और परमाणु निरीक्षण का क्या है मामला?
इस कूटनीतिक प्रयास के बीच करीब 6 अरब डॉलर की प्रतिबंधित ईरानी रकम और परमाणु प्रतिष्ठानों के निरीक्षण को लेकर एक प्रस्ताव की रिपोर्ट भी सामने आई है। ईरानवायर और मनीकंट्रोल की रिपोर्टों के अनुसार, कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता से ऐसे प्रस्ताव पर चर्चा हुई, जिसमें ईरान की प्रतिबंधित रकम से जुड़े मुद्दे के समाधान और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षण का प्रावधान शामिल बताया गया।
हालांकि, प्रस्ताव के सभी विवरणों और दोनों पक्षों की अंतिम सहमति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इसे अमेरिका और ईरान के बीच किसी औपचारिक समझौते के रूप में देखना जल्दबाजी होगी।
पाकिस्तान की मध्यस्थता के सामने बड़ी चुनौती
पाकिस्तान पहले भी अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत बहाल कराने की कोशिश कर चुका है। जून में हुए अंतरिम समझौते से कुछ समय के लिए शांति की उम्मीद बनी थी, लेकिन बाद में दोनों देशों के बीच संघर्ष फिर शुरू हो गया।
असीम मुनीर की ताजा यात्रा का मकसद तनाव कम करने और वार्ता का रास्ता तलाशने से जुड़ा था। लेकिन ईरान की शर्तों और परमाणु कार्यक्रम पर उसके सख्त रुख ने साफ कर दिया है कि किसी भी समझौते तक पहुंचना आसान नहीं होगा।
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अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिका ईरान की शर्तों पर कोई रियायत देगा या पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ेगा? फिलहाल, कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं, लेकिन किसी ठोस समझौते की घोषणा नहीं हुई है।
Location : New Delhi
Published : 22 October 2026, 3:51 PM IST