
कुमुदलाल गांगुली से कैसे बने अशोक कुमार? (Source: Pinterest)
Mumbai: हिंदी सिनेमा में कई सितारे आए, लेकिन कुछ कलाकार ऐसे रहे जिन्होंने अभिनय का अंदाज ही बदल दिया। अशोक कुमार उन्हीं में से एक थे। 13 अक्टूबर 1911 को जन्मे दादा मुनि ने पर्दे पर कभी रोमांटिक हीरो बनकर दिल जीता, तो कभी नकारात्मक किरदार निभाकर दर्शकों को चौंका दिया। लेकिन उनकी जिंदगी का सबसे दर्दनाक अध्याय उनके 76वें जन्मदिन से जुड़ा है। जिस दिन घर में जश्न था, उसी दिन उनके छोटे भाई किशोर कुमार के निधन की खबर आई। इसके बाद उन्होंने अपना जन्मदिन मनाना छोड़ दिया।
अशोक कुमार का असली नाम कुमुदलाल गांगुली था। उनका जन्म भागलपुर में हुआ था। उनके पिता चाहते थे कि बेटा वकालत करे, लेकिन उनकी रुचि फिल्मों की दुनिया में थी। पढ़ाई में असफल होने के बाद वह मुंबई आ गए और बॉम्बे टॉकीज की प्रयोगशाला में सहायक के तौर पर काम करने लगे।
किसी ने नहीं सोचा था कि पर्दे के पीछे काम करने वाला यह युवक एक दिन हिंदी सिनेमा का बड़ा नाम बन जाएगा। फिल्म 'जीवन नैया' से उन्हें अभिनय का मौका मिला और यहीं से उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया।
अशोक कुमार ने अपने करियर में केवल सीधे-सादे नायक की छवि तक खुद को सीमित नहीं रखा। 1943 में आई फिल्म 'किस्मत' में उन्होंने ऐसा किरदार निभाया, जिसमें पारंपरिक नायक की छवि से अलग कई पहलू थे। इस फिल्म की बड़ी सफलता ने उन्हें हिंदी सिनेमा के प्रमुख सितारों में शामिल कर दिया।
इसके बाद 'महल', 'चलती का नाम गाड़ी' और 'आशीर्वाद' जैसी फिल्मों में उनके अभिनय के अलग-अलग रंग देखने को मिले। उन्होंने गायकी और चित्रकारी में भी रुचि दिखाई। उम्र बढ़ने के साथ उन्होंने चरित्र भूमिकाओं में भी अपनी मजबूत पहचान बनाई।
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13 अक्टूबर 1987 को अशोक कुमार अपना 76वां जन्मदिन मना रहे थे। घर पर मेहमान आए थे और उनके सम्मान में जश्न का माहौल था। लेकिन इसी दिन उनके छोटे भाई और मशहूर गायक किशोर कुमार का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। किशोर कुमार उस समय केवल 58 वर्ष के थे।
जन्मदिन की खुशियां अचानक गहरे दुख में बदल गईं। इस घटना ने अशोक कुमार को भीतर तक झकझोर दिया। मीडिया में प्रकाशित पुराने वृत्तांतों के मुताबिक, इसके बाद उन्होंने अपना जन्मदिन मनाना बंद कर दिया।
अशोक कुमार को 1962 में पद्मश्री, 1988 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार और 1999 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। 'राखी' और 'आशीर्वाद' के लिए उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार भी मिला।
10 दिसंबर 2001 को 90 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। लेकिन उनकी फिल्मों और अभिनय की विरासत आज भी हिंदी सिनेमा के इतिहास का अहम हिस्सा है। Ashok Kumar Birth Anniversary पर दादा मुनि को याद करना उस कलाकार को सलाम करना है, जिसने पर्दे पर नायक होने के मायने बदल दिए।
Location : New Delhi
Published : 13 October 2026, 10:32 AM IST