अयोध्या से दर्शन कर लौट रहे श्रद्धालुओं के साथ आधी रात को एक्सप्रेसवे पर जो हुआ… मंजर देख कांप गई रूह!

आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर आधी रात को एक भीषण सड़क हादसे में दंपती समेत 3 श्रद्धालुओं की मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना ने एक्सप्रेसवे पर सुरक्षा के दावों और यूपीडा की फाइलों में दबे उन चौंकाने वाले आंकड़ों को उजागर कर दिया है, जो लगातार हादसों की गवाही दे रहे थे।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 2 June 2026, 12:36 PM IST

Lucknow: उत्तर प्रदेश के आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर फतेहाबाद क्षेत्र में रविवार रात करीब 1:40 बजे एक रोंगटे खड़े कर देने वाला सड़क हादसा सामने आया है। अयोध्या में रामलला के दर्शन कर राजस्थान लौट रहे श्रद्धालुओं की तेज रफ्तार कार आगे चल रहे एक कंटेनर में पीछे से जा घुसी। टक्कर इतनी भयानक थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और वह कंटेनर में ही फंस गई। इस दिल दहला देने वाले हादसे में सीकर निवासी शंकरलाल, उनकी पत्नी प्रीति और बिहार के सुनील कुमार की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि 5 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कार चालक शोएब को अचानक झपकी आ गई थी, जिसके कारण कार की रफ्तार 100 किमी/घंटा से अधिक हो गई और यह हादसा हो गया। पुलिस फिलहाल फरार कंटेनर चालक की तलाश कर रही है।

एक्सक्लूसिव खुलासा: यूपीडा की फाइलों में दबे थे मौत के आंकड़े

इस हादसे के बाद एक बेहद चौंकाने वाला और एक्सक्लूसिव एंगल सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूपीडा (UPEIDA) के पास एक्सप्रेसवे पर होने वाले हादसों का पूरा कच्चा चिट्ठा पहले से मौजूद था, लेकिन इसके बावजूद सुरक्षात्मक उपाय लागू नहीं किए गए। 10 नवंबर 2025 को यूपीडा मुख्यालय में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के दस्तावेज बताते हैं कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच इस एक्सप्रेसवे पर कुल 7,024 दुर्घटनाएं हुईं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से 54.7 प्रतिशत हादसों का एकमात्र कारण 'चालक की झपकी या थकान' था। इसके अलावा, एक्सप्रेसवे पर होने वाले कुल हादसों में से लगभग 70 प्रतिशत दुर्घटनाएं रात 12 बजे से सुबह 8 बजे के बीच ही होती हैं।

नियमों की अनदेखी और सुस्त सिस्टम पर खड़े हुए सवाल

दस्तावेजों से यह भी साफ हुआ है कि वर्ष 2019 के बाद से इस एक्सप्रेसवे पर कोई स्वतंत्र रोड सेफ्टी ऑडिट नहीं हुआ है, जबकि इस दौरान वाहनों की संख्या दोगुनी से भी अधिक हो चुकी है। यूपीडा की बैठक में रात्रि गति सीमा को 120 किमी/घंटा से घटाकर 75-80 किमी/घंटा करने, ड्रोन से निगरानी करने, चालकों के लिए वे-साइड सुविधाएं और मात्र 5 रुपये में चाय व 20 रुपये में भोजन देने जैसे प्रस्तावों पर सहमति बनी थी, लेकिन धरातल पर इनका क्रियान्वयन न होने की कीमत अब श्रद्धालु अपनी जान देकर चुका रहे हैं।

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इस घटना के बाद सड़क सुरक्षा कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर 30 दिन के भीतर पारदर्शी स्टेटस रिपोर्ट सार्वजनिक करने और रात के समय गति सीमा को तत्काल प्रभाव से 80 किमी/घंटा करने की मांग की है।

Location :  Lucknow

Published :  2 June 2026, 12:36 PM IST