
ललित कुमार (फोटो: डाइनामाइट न्यूज़)
Agra: परिवहन विभाग के कुछ अधिकारियों के पास रिसॉर्ट, फार्महाउस, होटल, पेट्रोल पंप और बड़ी मात्रा में जमीन होने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन संपत्तियों को खरीदने के लिए धन कहां से आया और क्या उनकी आय के स्रोत वैध हैं।
जानकारी के मुताबिक, आरटीओ, एआरटीओ और आरआई स्तर के करीब 32 अधिकारी विजिलेंस एजेंसी की निगरानी में हैं। आरोप है कि इनमें से कुछ अधिकारी बिचौलियों के साथ मिलकर हर महीने बड़ी रकम की अवैध कमाई कर रहे हैं। जांच एजेंसियां उनके बैंक खातों, निवेश और संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल कर रही हैं।
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हाल ही में विजिलेंस टीम ने पूर्व एआरटीओ ललित कुमार के अलीगंज स्थित आवास पर कार्रवाई की थी। इस दौरान करोड़ों रुपये की संपत्ति का पता चला। जांच में बड़ी मात्रा में सोना-चांदी और अन्य निवेश से जुड़ी जानकारी भी सामने आई। इसके बाद विभाग के अन्य अधिकारियों की गतिविधियां भी जांच के दायरे में आ गई हैं।
सूत्रों का दावा है कि ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण, परमिट और फिटनेस प्रमाणपत्र जैसे कामों में सरकारी शुल्क के अलावा अतिरिक्त रकम वसूली जाती है। आरोप है कि बिचौलिए आवेदकों से पैसे लेकर फाइलें तैयार करते हैं और फिर संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाते हैं।
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जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ स्थानों पर ओवरलोड वाहनों और बिना परमिट चलने वाली व्यावसायिक बसों से भी अवैध वसूली किए जाने के आरोप हैं। बताया जा रहा है कि इस व्यवस्था में कई स्तरों पर रकम का लेनदेन होता है।
हालांकि, इन मामलों में अभी जांच प्रक्रिया जारी है और किसी अधिकारी के खिलाफ अदालत का अंतिम फैसला नहीं आया है। अधिकारियों की भूमिका और आरोपों की सच्चाई का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।
Location : Agra
Published : 11 July 2026, 2:19 PM IST
Topics : ARTO Case disproportionate assets case RTO Investigation Transport Department Corruption Vigilance Probe