लग्जरी गाड़ियां, आलीशान बंगले और सरकारी भुगतान के आरोप; मिर्जापुर सिंचाई विभाग में क्या चल रहा है?

मिर्जापुर सिंचाई विभाग में बिना काम कराए भुगतान स्वीकृत कराने के आरोपों से सवाल उठे हैं। वर्ष 2016 से कथित अनियमितताओं की चर्चा के बीच जांच की आधिकारिक पुष्टि और निष्कर्षों का इंतजार है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 20 October 2026, 4:36 PM IST

Mirzapur: सरकारी खजाने से भुगतान हो जाए और जमीन पर काम हुआ या नहीं, इसका हिसाब ही न मिले तो सवाल उठना लाजिमी है। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर स्थित सिंचाई विभाग में कुछ ठेकेदारों पर बिना धरातल पर काम कराए भुगतान स्वीकृत कराने के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। दावा है कि कागजों पर प्रक्रिया पूरी कराकर बजट आवंटन से लेकर भुगतान तक का रास्ता तैयार किया जाता था। इस मामले में लखनऊ से एक टीम द्वारा जांच किए जाने की जानकारी भी सामने आ रही है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि और जांच के नतीजे अभी सामने आना बाकी हैं।

बिना काम भुगतान कराने के आरोप

मिर्जापुर सिंचाई विभाग से जुड़े इस मामले में कुछ ठेकेदारों की भूमिका पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि कथित तौर पर धरातल पर काम कराए बिना ही भुगतान स्वीकृत कराने की प्रक्रिया अपनाई जाती थी। इसमें कागजी औपचारिकताएं पूरी करने, आवश्यकता संबंधी मांगपत्र तैयार कराने और लखनऊ से बजट आवंटित कराने के बाद भुगतान पास कराने की बात कही जा रही है।

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2016 से चल रहा था कथित खेल?

इस मामले में वर्ष 2016 से कथित अनियमितताएं जारी रहने की चर्चा भी हो रही है। यदि यह अवधि दस्तावेजों से साबित होती है, तो यह जांच का अहम पहलू होगा कि इतने लंबे समय तक भुगतान की प्रक्रिया की निगरानी कैसे हुई और क्या संबंधित कार्यों का नियमित सत्यापन किया गया था।

संपत्ति और रहन-सहन को लेकर भी चर्चा

मामले के बीच कुछ ठेकेदारों की कथित संपत्ति और रहन-सहन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। चर्चा है कि कुछ ठेकेदार लग्जरी गाड़ियों में घूमते हैं और उनके पास कई जिलों में बंगले, मकान तथा फ्लैट जैसी संपत्तियां हैं। हालांकि, केवल महंगी गाड़ियों या संपत्ति के आधार पर भ्रष्टाचार का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

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आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

मामले में लखनऊ से एक टीम द्वारा जांच किए जाने की जानकारी सामने आ रही है। लेकिन जांच एजेंसी, टीम के गठन, जांच के दायरे और अब तक की कार्रवाई को लेकर आधिकारिक विवरण उपलब्ध नहीं है। ऐसे में यह स्पष्ट होना बाकी है कि जांच शुरू हो चुकी है या अभी इस संबंध में प्रक्रिया चल रही है।

सरकारी धन का हिसाब और जवाबदेही तय होना जरूरी

सिंचाई विभाग के कार्य सीधे तौर पर किसानों, जल प्रबंधन और सार्वजनिक संसाधनों से जुड़े होते हैं। ऐसे में किसी भी परियोजना के लिए जारी धनराशि का सही इस्तेमाल और काम की गुणवत्ता सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। यदि जांच में बिना काम भुगतान कराने या अन्य वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित ठेकेदारों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई का सवाल उठेगा।

Location :  Mirzapur

Published :  20 October 2026, 4:36 PM IST