Mirzapur News: स्कूल सामने था, लेकिन रास्ता गायब! 470 बच्चों ने जो किया, उससे अफसर भी दौड़े

मिर्जापुर के चेरुईराम कम्पोजिट विद्यालय में करीब 470 बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन स्कूल तक पहुंचने वाला रास्ता बारिश में कीचड़ और पानी से भर जाता था। परेशान छात्रों और स्थानीय लोगों ने विद्यालय के सामने धरना दिया। मामला अधिकारियों तक पहुंचने के बाद नायब तहसीलदार और बीडीओ की मौजूदगी में 5 फुट रास्ते का निर्माण शुरू कराया गया।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 7 September 2026, 3:38 PM IST

Mirzapur: किसी स्कूल में पढ़ने के लिए बच्चों को किताब-कॉपी से ज्यादा अगर कीचड़ और पानी से जूझना पड़े तो सवाल व्यवस्था पर उठना लाजिमी है। मिर्जापुर के चेरुईराम गांव स्थित कम्पोजिट विद्यालय की तस्वीर कुछ ऐसी ही कहानी बयां कर रही है। यहां करीब 470 बच्चे पढ़ाई के लिए पहुंचते हैं, लेकिन विद्यालय तक जाने वाला रास्ता लंबे समय से बदहाल बताया जा रहा है। बारिश के बाद रास्ते पर कीचड़ और पानी भरने से छात्रों और शिक्षकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

कीचड़ से होकर स्कूल पहुंच रहे थे बच्चे

चेरुईराम ग्राम सभा स्थित कम्पोजिट विद्यालय के सामने रास्ते की स्थिति खराब होने के कारण विद्यार्थियों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। बारिश के दौरान रास्ते पर पानी और कीचड़ जमा हो जाने से स्कूल तक पहुंचना मुश्किल हो रहा था।

मासूम बच्चों के साथ शिक्षकों को भी इसी रास्ते से होकर विद्यालय पहुंचना पड़ रहा था। स्थानीय स्तर पर समस्या के समाधान की मांग किए जाने के बावजूद जब तत्काल राहत नहीं मिली तो बच्चों और स्थानीय लोगों ने अपनी आवाज प्रशासन तक पहुंचाने का अलग रास्ता चुना।

स्कूल के सामने धरने पर बैठे छात्र-शिक्षक

रास्ते की बदहाली से परेशान होकर विद्यालय के सामने धरना-प्रदर्शन किया गया। इसका उद्देश्य जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का ध्यान समस्या की ओर आकर्षित करना था।

धरने की तस्वीरें सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया। स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया कि जब गांव के सैकड़ों बच्चों का भविष्य इसी विद्यालय से जुड़ा है तो उनके स्कूल तक पहुंचने के लिए बेहतर रास्ते की व्यवस्था अब तक क्यों नहीं हो सकी।

सवालों के घेरे में व्यवस्था

स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्राम सभा के विकास कार्यों की जिम्मेदारी जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों की होती है। ऐसे में बच्चों को स्कूल तक पहुंचने के लिए धरने का सहारा लेना पड़े, यह व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है।

लोगों का कहना है कि स्कूल सिर्फ एक भवन नहीं होता, बल्कि यहां से निकलने वाले बच्चे आगे चलकर शिक्षक, अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी बनते हैं। इसलिए विद्यालय तक सुरक्षित और सुगम रास्ता उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए।

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धरने की खबर पहुंची तो हरकत में आया प्रशासन

मामला अधिकारियों तक पहुंचने के बाद प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ। मौके पर नायब तहसीलदार और खंड विकास अधिकारी पहुंचे। इस दौरान ग्राम प्रधान और सचिव की मौजूदगी में विद्यालय तक रास्ते की समस्या का समाधान करने की पहल की गई।

प्रशासन की मौजूदगी में करीब 5 फुट चौड़े रास्ते के निर्माण का कार्य शुरू कराने की बात सामने आई है। इसके बाद बच्चों और शिक्षकों को उम्मीद जगी है कि अब उन्हें कीचड़ और पानी के बीच से होकर स्कूल नहीं जाना पड़ेगा।

बच्चों की मांग ने खड़े किए बड़े सवाल

चेरुईराम के कम्पोजिट विद्यालय का यह मामला केवल एक रास्ते की समस्या तक सीमित नहीं है। यह सवाल भी सामने लाता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालयों और बुनियादी सुविधाओं की निगरानी किस स्तर पर हो रही है।

बच्चों को अपने स्कूल तक रास्ता बनवाने के लिए धरना देना पड़े, इससे व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर उठते हैं। फिलहाल प्रशासन की पहल के बाद रास्ते के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अब देखना होगा कि यह काम कितनी जल्दी पूरा होता है और 470 बच्चों को कब तक इस परेशानी से स्थायी राहत मिलती है।

Location :  Mirzapur

Published :  7 September 2026, 3:38 PM IST