दिल्ली दंगा केस: ताहिर हुसैन की उम्रकैद के खिलाफ अपील पर सुनवाई को तैयार हाई कोर्ट, पुलिस को नोटिस

दिल्ली दंगा केस के अंकित शर्मा हत्याकांड में ताहिर हुसैन की उम्रकैद की सजा के खिलाफ दायर अपील पर दिल्ली हाई कोर्ट सुनवाई करेगा। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और जेल प्रशासन से ताहिर हुसैन का नॉमिनल रोल भी तलब किया है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 2 September 2026, 12:17 PM IST

नई दिल्ली: 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड मामले में पूर्व आम आदमी पार्टी (AAP) पार्षद ताहिर हुसैन की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। हालांकि, उनकी उम्रकैद की सजा के खिलाफ दायर अपील पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनवाई के लिए हामी भर दी है।

2 सितंबर 2026 को जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की पीठ ने मामले में दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने जेल प्रशासन से ताहिर हुसैन का नॉमिनल रोल (जेल रिकॉर्ड) भी तलब किया है।

2 दिसंबर को होगी अगली सुनवाई

हाई कोर्ट ने इस मामले को अन्य संबंधित अपीलों के साथ 2 दिसंबर 2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।

सुनवाई के दौरान ताहिर हुसैन के वकील ने दलील दी कि उनके मुवक्किल को केवल उकसाने और भीड़ का हिस्सा होने के आधार पर दोषी ठहराया गया है। इस पर कोर्ट ने कहा कि मामले में एक युवा व्यक्ति की जान गई है और अपीलकर्ता की भूमिका का अलग-अलग मूल्यांकन किया जाएगा।

कड़कड़डूमा कोर्ट ने सुनाई थी उम्रकैद की सजा

कड़कड़डूमा कोर्ट ने 31 जुलाई 2026 को ताहिर हुसैन समेत पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में दोषियों के लिए मृत्युदंड (फांसी) की मांग की थी।

ताहिर हुसैन ने जांच पर उठाए सवाल

अपनी अपील में ताहिर हुसैन ने दावा किया है कि उनके खिलाफ जांच पक्षपातपूर्ण और दुर्भावनापूर्ण थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता के दबाव को शांत करने के लिए उन्हें बलि का बकरा बनाया गया।

याचिका में यह भी कहा गया है कि गवाहों को कथित तौर पर तैयार किया गया और असली दोषियों को बचाया गया।

धारा 149 के इस्तेमाल पर जताई आपत्ति

अपील में ताहिर हुसैन ने भारतीय दंड संहिता की धारा 149 के तहत दोषी ठहराए जाने पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि ट्रायल कोर्ट ने उन्हें मुख्य साजिश और दंगा भड़काने के आरोपों से बरी कर दिया था, लेकिन केवल गैरकानूनी सभा का हिस्सा होने के आधार पर उम्रकैद की सजा दे दी गई।

अब दिल्ली हाई कोर्ट इस अपील पर सुनवाई करते हुए यह तय करेगा कि उम्रकैद की सजा और दोषसिद्धि को लेकर उठाए गए तर्कों में कितना दम है।

Location :  New Delhi

Published :  2 September 2026, 12:17 PM IST