
प्रतीकात्मक छवि
नोएडा: ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा इलाके में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की कार्रवाई के बाद अवैध सिंथेटिक ड्रग्स के कथित नेटवर्क को लेकर जांच तेज हो गई है। कादलपुर गांव के पास एक मकान में चल रही ड्रग फैक्ट्री का खुलासा होने के बाद विदेशी नागरिकों की भूमिका और अंतरराष्ट्रीय तस्करी से संभावित संबंधों की पड़ताल की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, जांच में मैक्सिको के कुख्यात ड्रग कार्टेल से संभावित कनेक्शन का संकेत मिला है। हालांकि, इस संबंध की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।
NCB ने पिछले सप्ताह ग्रेटर नोएडा के रबूपुरा इलाके में कादलपुर गांव के पास एक मकान में सिंथेटिक ड्रग्स तैयार करने के कथित अवैध कारोबार का खुलासा किया था। इस कार्रवाई में विदेशी नागरिक डेस्टिनी अब्राहम डंबिरी और मिजोरम निवासी लाल्लावमजुआली उर्फ ओलिविया लालछाविमावी को गिरफ्तार किया गया।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस मामले में विदेशी नेटवर्क और भारत में ड्रग्स तैयार करने की संभावित योजना की पड़ताल की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि तस्करी के दौरान बड़ी खेप पकड़े जाने के जोखिम से बचने के लिए भारत में ही सिंथेटिक ड्रग्स तैयार करने की कोशिश की जा रही हो सकती है।
हालांकि, रबूपुरा की फैक्ट्री का मैक्सिको के किसी विशेष कार्टेल से सीधा संबंध स्थापित करने के लिए जांच के निष्कर्ष और आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
सूत्रों के मुताबिक, जांच में मैक्सिको के कुख्यात आपराधिक संगठन कार्टेल डे जालिस्को नुएवा जेनेरेशियन (CJNG) से संभावित संबंध की पड़ताल की जा रही है। इस संगठन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े बड़े आपराधिक नेटवर्क में गिना जाता है।
जांच एजेंसियों को संदेह है कि अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क भारत में किराए के मकानों का इस्तेमाल कर अवैध ड्रग लैब स्थापित करने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे ठिकानों के जरिए सिंथेटिक ड्रग्स तैयार कर उन्हें अलग-अलग बाजारों तक पहुंचाने की आशंका की जांच की जा रही है।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि रबूपुरा में पकड़े गए आरोपियों का CJNG से प्रत्यक्ष संपर्क था या नहीं। इसलिए कार्टेल कनेक्शन को अभी जांच का विषय ही माना जाना चाहिए।
ग्रेटर नोएडा में अवैध सिंथेटिक ड्रग्स निर्माण का यह पहला मामला नहीं है। अक्टूबर 2024 में भी NCB ने कासना इंडस्ट्रियल एरिया में चल रही एक कथित अवैध सिंथेटिक ड्रग लैब का भंडाफोड़ किया था। उस कार्रवाई में 95.5 किलोग्राम सिंथेटिक ड्रग्स बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
सूत्रों के मुताबिक, बड़ी खेपों की बरामदगी और तस्करी के जोखिम के बीच भारत में ही ड्रग्स तैयार करने की संभावित गतिविधियों पर जांच एजेंसियों की नजर है। दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, फरीदाबाद और गाजियाबाद सहित आसपास के क्षेत्रों में ऐसे नेटवर्क की गतिविधियों की आशंका की पड़ताल की जा रही है।
हालांकि, अलग-अलग मामलों के बीच सीधा संबंध तभी माना जा सकता है, जब जांच में उसके ठोस प्रमाण मिलें।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कथित नेटवर्क को आर्थिक मदद पहुंचाने के लिए क्रिप्टोकरेंसी और हवाला जैसे माध्यमों के इस्तेमाल की आशंका भी जताई गई है। दुबई से धन भेजे जाने के संभावित लिंक की जांच किए जाने की बात सामने आई है।
यदि इन आशंकाओं की पुष्टि होती है, तो जांच का दायरा केवल ड्रग्स बनाने वाले ठिकानों तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें फंडिंग, अंतरराष्ट्रीय संपर्कों और मादक पदार्थों की आपूर्ति से जुड़े नेटवर्क की भूमिका भी शामिल हो सकती है।
फिलहाल इन वित्तीय लेनदेन और कथित अंतरराष्ट्रीय संपर्कों के संबंध में आधिकारिक रूप से पुष्ट विवरण सामने आना बाकी है।
सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसियों को आशंका है कि कुछ संदिग्ध लोग अपनी वास्तविक गतिविधियों को छिपाने के लिए छात्र या अन्य सामान्य नागरिक के रूप में पहचान बताकर मकान किराए पर लेते हैं। घनी आबादी वाले इलाकों या शहर से कुछ दूरी पर स्थित मकानों का इस्तेमाल कथित तौर पर अवैध गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।
NCB ने मकान मालिकों और प्रॉपर्टी डीलरों से अपील की है कि किराएदारों की पहचान और जरूरी दस्तावेजों का उचित सत्यापन करें। किसी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर राष्ट्रीय नारकोटिक्स हेल्पलाइन नंबर 1933 पर सूचना दी जा सकती है।
हालांकि, केवल किसी व्यक्ति के विदेशी नागरिक होने, छात्र होने या किसी विशेष क्षेत्र से आने के आधार पर उसे संदिग्ध नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी ठोस परिस्थितियों और तथ्यों के आधार पर ही दी जानी चाहिए।
NCB की कार्रवाई में गिरफ्तार डेस्टिनी अब्राहम डंबिरी ने खुद को नाइजीरियाई नागरिक बताया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इमिग्रेशन रिकॉर्ड में उसके जनवरी 2020 में फ्रांसिस कालोकोह नाम से सिएरा लियोन के नागरिक के रूप में भारत आने का उल्लेख है। इस पहचान और यात्रा संबंधी विवरण की जांच मामले के महत्वपूर्ण पहलुओं में शामिल हो सकती है।
वहीं, लाल्लावमजुआली उर्फ ओलिविया लालछाविमावी के बारे में बताया गया है कि उसे मार्च 2026 में गोवा के डाबोलिम एयरपोर्ट पर हेरोइन से जुड़े एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। उसके पुराने मामले और रबूपुरा की कथित ड्रग फैक्ट्री के बीच किसी संबंध की पुष्टि जांच के आधार पर ही हो सकेगी।
रबूपुरा में ड्रग फैक्ट्री के खुलासे के बाद जांच एजेंसियों के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि वहां तैयार की जा रही सिंथेटिक ड्रग्स का संभावित इस्तेमाल और वितरण कहां होना था। इसके साथ ही आरोपियों के संपर्कों, आर्थिक लेनदेन और संभावित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की भी पड़ताल की जा सकती है।
मैक्सिको के ड्रग कार्टेल से संभावित संबंध, दुबई से कथित फंडिंग और भारत में लैब स्थापित करने की आशंका इस जांच के महत्वपूर्ण पहलू हैं। लेकिन इन दावों की पुष्टि आधिकारिक जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही हो सकेगी।
Location : Noida
Published : 21 October 2026, 11:17 AM IST
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