LPG Crisis: गैस सिलेंडर की कमी से बदली किचन की आदतें, रेडी-टू-ईट फूड अब बना लोगों की पहली पसंद

LPG सप्लाई में कमी के चलते देशभर में खाने की आदतों में बदलाव देखने को मिल रहा है। बड़े शहरों के साथ छोटे शहरों में भी इंस्टेंट और रेडी-टू-ईट फूड की मांग तेजी से बढ़ी है, जिससे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को भी फायदा हो रहा है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 18 March 2026, 6:36 PM IST

New Delhi: देश में रसोई गैस (LPG) की सप्लाई में आई अनिश्चितता का असर अब आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखने लगा है। खासतौर पर शहरी और अर्ध-शहरी इलाकों में लोग तेजी से रेडी-टू-ईट और इंस्टेंट फूड की ओर रुख कर रहे हैं। पहले यह ट्रेंड सिर्फ बड़े महानगरों तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब छोटे शहरों और टियर-2, टियर-3 शहरों में भी इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है।

छोटे शहरों में भी बढ़ी मांग

Amazon India के मुताबिक, इंस्टेंट नूडल्स, पैकेज्ड मील, स्नैक्स और बेवरेजेज जैसी कैटेगरी में 15 फीसदी से ज्यादा की ग्रोथ दर्ज की गई है। यह बढ़ोतरी सिर्फ दिल्ली-NCR, मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि हैदराबाद, कोलकाता, चेन्नई के साथ-साथ सोनीपत और पणजी जैसे छोटे शहरों में भी यह ट्रेंड तेजी से उभर रहा है।

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कंपनी के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों में ऐसे फूड प्रोडक्ट्स की मांग लगातार बढ़ी है जिन्हें बनाने में कम समय और कम गैस की जरूरत होती है।

क्विक कॉमर्स ने दी रफ्तार

इस बदलाव को और तेज करने में क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की बड़ी भूमिका रही है। Amazon की 'Amazon Now' सेवा पर रेडी-टू-ईट फूड की बिक्री महीने-दर-महीने करीब 20 फीसदी तक बढ़ी है। खासकर बड़े शहरों में लोग अब फास्ट डिलीवरी पर ज्यादा निर्भर हो रहे हैं।

हालांकि, दिलचस्प बात यह है कि उपभोक्ता व्यवहार पूरी तरह से नहीं बदला है। लोग अभी भी आटा, तेल, दाल, ड्राई फ्रूट्स और अन्य जरूरी सामान की प्लान्ड खरीदारी कर रहे हैं। यानी एक तरफ इंस्टेंट सुविधा का चलन बढ़ा है, तो दूसरी ओर जरूरी चीजों का स्टॉक भी जारी है।

LPG सप्लाई संकट बना बड़ी वजह

इस ट्रेंड के पीछे सबसे बड़ी वजह LPG सप्लाई में आई बाधा है। उद्योग के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, मार्च के पहले पखवाड़े में देश में LPG खपत में करीब 17.7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। कुल खपत 1.147 मिलियन टन रही, जो पिछले साल और फरवरी के मुकाबले काफी कम है।

भारत अपनी लगभग 60 फीसदी LPG जरूरत आयात के जरिए पूरी करता है, जिसमें बड़ा हिस्सा होरमुज जलडमरूमध्य से आता है। वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव और सप्लाई चेन में बाधा के कारण इस रूट पर असर पड़ा है, जिससे घरेलू सप्लाई प्रभावित हुई।

सरकार ने दिया भरोसा

सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए कदम उठाए हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है और रिफाइनरियों को उत्पादन बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

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शुरुआती चरण में होटल और रेस्टोरेंट जैसे व्यावसायिक उपभोक्ताओं की सप्लाई कम की गई थी, जिसे अब धीरे-धीरे बहाल किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि घरेलू रसोई की जरूरतों को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

लंबे समय में बदल सकता है ट्रेंड

विश्लेषकों का मानना है कि अगर LPG संकट लंबा चलता है, तो यह बदलाव स्थायी हो सकता है। इंस्टेंट और रेडी-टू-ईट फूड की बढ़ती मांग न सिर्फ ई-कॉमर्स कंपनियों के बिजनेस को बढ़ावा देगी, बल्कि लोगों की खानपान की आदतों में भी बड़ा बदलाव ला सकती है।

फिलहाल, गैस की अनिश्चितता और समय की कमी के बीच 'इंस्टेंट फूड' ही लोगों के लिए सबसे आसान और भरोसेमंद विकल्प बनता जा रहा है।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 18 March 2026, 6:36 PM IST