भारतीयों के लिए दुबई में घर खरीदना हुआ आसान, अब सस्ते घर पर भी मिलेगा रेजीडेंसी वीजा

दुबई ने रेजीडेंसी वीजा के लिए प्रॉपर्टी की न्यूनतम कीमत सीमा हटाकर भारतीय निवेशकों के लिए बड़ा अवसर खोल दिया है। अब स्टूडियो और 1BHK अपार्टमेंट खरीदकर भी वीजा मिल सकेगा। इससे भारतीय मध्यम वर्ग और युवाओं की रियल एस्टेट में भागीदारी तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 17 May 2026, 9:50 AM IST

New Delhi: Dubai ने रेजीडेंसी वीजा के लिए प्रॉपर्टी की न्यूनतम कीमत सीमा को लेकर बड़ा बदलाव किया है। दुबई लैंड डिपार्टमेंट (DLD) ने अपने नए अपडेट में एकल निवेशकों के लिए 7.50 लाख दिरहम की न्यूनतम प्रॉपर्टी कीमत सीमा को हटा दिया है। अब केवल संयुक्त खरीदारों के लिए 4 लाख दिरहम की न्यूनतम सीमा लागू रहेगी। इस फैसले का उद्देश्य विदेशी निवेश को और आसान बनाना बताया जा रहा है।

मध्यम वर्ग और युवाओं की बढ़ेगी भागीदारी

इस बदलाव से भारतीय मध्यम वर्ग और युवा निवेशकों की भागीदारी में तेज वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। अब छोटे आकार के स्टूडियो और एक बेडरूम अपार्टमेंट खरीदकर भी निवेशक दो साल का रेजीडेंसी वीजा प्राप्त कर सकेंगे। इससे विशेष रूप से मझोले बाजार वाले क्षेत्रों में मांग बढ़ने की उम्मीद है।

इन इलाकों में बढ़ सकती है हलचल

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार जिन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा गतिविधि देखने को मिल सकती है, उनमें Jumeirah Village Circle, International City और Arjan शामिल हैं। इन इलाकों में तैयार स्टूडियो और छोटे अपार्टमेंट्स की मांग तेजी से बढ़ने का अनुमान है।

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विशेषज्ञों की राय

रियल एस्टेट विशेषज्ञ के अनुसार पहले कम कीमत वाले स्टूडियो वीजा प्रणाली से बाहर थे, लेकिन अब वही प्रॉपर्टी खरीदारों को रेजीडेंसी दिला सकती है। वहीं CBRE Group के रिसर्च प्रमुख अभिनव जोशी का मानना है कि यह कदम पहली बार निवेश करने वाले अंतरराष्ट्रीय खरीदारों, मध्यम आय वर्ग और युवा पेशेवरों के लिए बाजार को अधिक सुलभ बनाएगा।

विशेषज्ञ ने कहा कि अगले 12 से 18 महीनों में दुबई का रियल एस्टेट बाजार फिर से मजबूत स्थिति में लौट सकता है और 2027 तक निवेश धारणा और रिटर्न दोनों में सुधार देखने को मिलेगा।

भारतीय निवेशकों की मजबूत हिस्सेदारी

भारतीय निवेशक पहले से ही दुबई के रियल एस्टेट बाजार में प्रमुख विदेशी खरीदारों में शामिल हैं। वर्ष 2025 में भारतीयों की हिस्सेदारी कुल रिहायशी सौदों में लगभग 22 प्रतिशत रही। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अब किराये से 6 से 9 प्रतिशत तक रिटर्न का लाभ भी निवेशकों को मिल सकता है।

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भू-राजनीतिक असर और बाजार की स्थिति

पश्चिम एशिया में तनाव के कारण हाल के महीनों में बाजार में कुछ सुस्ती देखी गई है। खासकर लक्जरी सेगमेंट और ऑफ-प्लान फ्लिपिंग में गिरावट आई है। हालांकि Palm Jumeirah जैसी प्रीमियम संपत्तियों में निवेश अभी भी स्थिर बना हुआ है।

आगे क्या हो सकता है

विशेषज्ञों का मानना है कि दुबई के इस कदम के बाद अन्य अमीरात जैसे Abu Dhabi, Sharjah और Ras Al Khaimah भी अपने रियल एस्टेट वीजा नियमों में ढील दे सकते हैं ताकि विदेशी निवेश आकर्षित किया जा सके।

Location :  New Delhi

Published :  17 May 2026, 9:50 AM IST