‘गोली मिस हुई तो कुदाल से प्रहार’: बिहार में दवा उधार न देने पर रची गई खौफनाक मौत की साजिश, कोर्ट के इस फैसले ने खड़े किए रोंगटे

पश्चिमी चंपारण जिले के बगहा व्यवहार न्यायालय ने करीब छह साल पुराने आपराधिक मामले में आरोपी रामदयाल पांडेय को दोषी करार दिया है। मामला दवा उधार नहीं देने को लेकर हुए विवाद और दुकानदार पर हमला करने से जुड़ा है।

Post Published By: Komal Chauhan
Updated : 14 September 2026, 8:37 PM IST

West Champaran: बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले के बगहा व्यवहार न्यायालय ने करीब छह साल पुराने आपराधिक मामले में आरोपी रामदयाल पांडेय को दोषी करार दिया है। मामला दवा उधार नहीं देने को लेकर हुए विवाद और दुकानदार पर हमला करने से जुड़ा है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश चतुर्थ मानवेंद्र मिश्र की अदालत ने आरोपी को चार अलग-अलग धाराओं में सजा सुनाई। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। कोर्ट ने कुल 2,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

दवा उधार नहीं देने पर शुरू हुआ था विवाद

मामला चौतरवा थाना क्षेत्र का है। प्राथमिकी के अनुसार, 9 अक्टूबर 2020 की शाम करीब 6:30 बजे अभिनव मिश्रा अपनी दवा की दुकान पर मौजूद थे। इसी दौरान पड़ोस में रहने वाले रामदयाल पांडेय वहां पहुंचे। आरोप है कि दवा उधार नहीं देने को लेकर दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया। देखते ही देखते कहासुनी बढ़ गई। आरोप के मुताबिक, रामदयाल ने गाली-गलौज करते हुए दुकानदार को कट्टा दिखाया और गोली चलाने का प्रयास किया।

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गोली नहीं चली तो कुदाल से किया हमला

प्राथमिकी के अनुसार, कट्टे से गोली चलाने का प्रयास सफल नहीं हुआ। इसके बाद दुकानदार वहां से बचने के लिए भागने लगा। आरोप है कि इसी दौरान रामदयाल पांडेय ने कुदाल से उसकी पीठ पर हमला कर दिया। हमले में दुकानदार घायल हो गया।

घटना के बाद आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। ग्रामीणों के पहुंचने पर आरोपी वहां से भागकर अपने घर में चला गया और दरवाजा बंद कर लिया। पीड़ित पक्ष की ओर से घटना की जानकारी पुलिस को दी गई। प्राथमिकी के अनुसार, पीड़ित के पिता और ग्रामीणों ने घटना में इस्तेमाल किए गए कट्टे और गोली को पुलिस के हवाले किया था।

गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर दोषी करार

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने घटना से जुड़े गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषी माना। अपर लोक अभियोजक कमलेश शर्मा के अनुसार, मामले की न्यायिक प्रक्रिया करीब छह वर्षों तक चली। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से मामले से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों को अदालत के सामने रखा गया।

चार धाराओं में सुनाई गई अलग-अलग सजा

अदालत ने आरोपी को चार अलग-अलग धाराओं में सजा दी है। एक मामले में एक माह के कारावास और 250 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। जुर्माना नहीं देने पर 15 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। दूसरे मामले में  छह माह के कारावास और 500 रुपये जुर्माने की सजा दी गई। जुर्माना नहीं देने पर एक माह का अतिरिक्त कारावास होगा।

तीसरे मामले में आरोपी को नौ माह के कारावास और 1,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई। जुर्माना नहीं देने पर दो माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं, चौथे मामले में एक माह के कारावास और 250 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई है। जुर्माना नहीं देने पर 15 दिन का अतिरिक्त कारावास होगा।

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सभी सजाएं एक साथ चलेंगी

कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि चारों मामलों में सुनाई गई सजाएं एक साथ चलेंगी। इस तरह अदालत ने करीब छह साल से चल रहे इस मामले का कानूनी रूप से निपटारा कर दिया। फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में है। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपी को दोषी ठहराते हुए कानून के तहत सजा सुनाई है।

Location :  West Champaran

Published :  14 September 2026, 8:37 PM IST