पटना गर्ल्स हॉस्टल में नीट छात्रा की मौत की जांच में एसआईटी को अहम सुराग मिला है। नींद की दवा जहानाबाद से खरीदी गई थी। गूगल सर्च, ट्रैवल हिस्ट्री और इलाज की कड़ियां अब जांच के केंद्र में हैं।

दवा की दुकान तक पहुंची एसआईटी (Img- Internet)
Patna: चित्रगुप्त नगर थाना क्षेत्र स्थित एक गर्ल्स हॉस्टल में नीट की तैयारी कर रही छात्रा की मौत के मामले में गठित एसआईटी को बड़ी सफलता मिली है। जांच टीम उस मेडिकल स्टोर तक पहुंच गई है, जहां से नींद की दवा खरीदी गई थी। दवा पर दर्ज बैच नंबर के आधार पर पहले डिस्ट्रीब्यूटर और फिर मेडिकल स्टोर की पहचान की गई।
एसआईटी ने छात्रा की ट्रैवल हिस्ट्री और संभावित मूवमेंट के आधार पर दायरा सीमित किया। इसके बाद यह पता लगाया गया कि संबंधित बैच नंबर की नींद की दवा पटना और जहानाबाद में किन-किन मेडिकल स्टोरों को सप्लाई हुई थी। इसके लिए एक अलग टीम बनाई गई, जिसने जांच के बाद जहानाबाद स्थित एक मेडिकल स्टोर को चिन्हित किया।
पुलिस जब मेडिकल स्टोर पहुंची तो दुकानदार से पूछताछ की गई। एसआईटी ने उसे कुछ तस्वीरें दिखाई, जिनमें से एक को दुकानदार ने दवा खरीदने वाले के रूप में पहचाना। दुकानदार ने बताया कि 27 दिसंबर को उसी बैच की छह पत्ते नींद की दवा बेची गई थी और 370 रुपये का भुगतान ऑनलाइन स्कैन के जरिए हुआ था।
हालांकि दवा कहां से खरीदी गई, यह कड़ी लगभग साफ हो चुकी है, लेकिन यह अब भी स्पष्ट नहीं है कि वह दवा छात्रा तक कैसे पहुंची। जांच में एक और मध्य कड़ी सामने आने की संभावना जताई जा रही है। सबसे बड़ा सवाल अब भी यही है कि छात्रा ने दवा क्यों खाई क्या वह किसी डर में थी, ब्लैकमेल हो रही थी या किसी मानसिक दबाव में थी।
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पुलिस के अनुसार, छात्रा के मोबाइल की गूगल सर्च हिस्ट्री ने जांच को नई दिशा दी। 24 दिसंबर और 5 जनवरी को उसने सुसाइड और नींद की दवा से जुड़े शब्द सर्च किए थे। संयोग से 27 दिसंबर को वह पटना से जहानाबाद गई थी और 5 जनवरी को हॉस्टल लौटी थी।
पटना गर्ल्स हॉस्टल मौत रहस्य (Img- Internet)
जांच में सामने आया कि छात्रा 27 दिसंबर को स्वजनों के साथ स्कॉर्पियो से जहानाबाद गई थी और 5 जनवरी को ट्रेन से पटना लौटी। इसी दिनांक को जहानाबाद से नींद की दवा खरीदी गई थी। पटना लौटने के अगले ही दिन यानी 6 जनवरी को वह हॉस्टल के कमरे में बेहोश मिली।
छात्रा को 6 जनवरी से 10 जनवरी तक एक निजी अस्पताल में भर्ती रखा गया। 8 जनवरी को हुए यूरिन टेस्ट में नींद की दवा का डोज पाए जाने की पुष्टि हुई। इससे यह सवाल और गहरा गया कि दवा का सेवन किस परिस्थिति में और कब किया गया।
पुलिस ने हॉस्टल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, लेकिन छात्रा के कमरे के बाहर कोई संदिग्ध गतिविधि नहीं मिली। छात्रा का मोबाइल फोन फोरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, ताकि डिलीट डेटा को रिकवर किया जा सके। एसआईटी अब तक तीन से चार बार घटनास्थल का निरीक्षण कर चुकी है।
सूत्रों के अनुसार, पुलिस को एक कापी या डायरी मिली है, जिसमें करीबी व्यक्ति से जुड़ी कुछ बातें लिखी हैं। इसके साथ ही 6 से 10 जनवरी के बीच इलाज की पूरी प्रक्रिया, डॉक्टरों की भूमिका, दी गई दवाएं और पुलिस को सूचना देने में हुई देरी की भी जांच की जा रही है।
27 दिसंबर: छात्रा पटना से जहानाबाद गई
5 जनवरी: हॉस्टल लौटी
6 जनवरी: बेहोशी की हालत में भर्ती
11 जनवरी: इलाज के दौरान मौत
12 जनवरी: पोस्टमार्टम, एफआईआर
15 जनवरी: हॉस्टल मालिक गिरफ्तार
16 जनवरी: एसआईटी का गठन
17 जनवरी: आला अधिकारियों ने किया निरीक्षण