वही किला, वही जगह… लेकिन कहानी बदलेगी; आगरा किले में 265 साल बाद फिर गूंजेगी विजय की कहानी

आगरा किले में 12 जून को महाराजा सूरजमल की विजय गाथा पर आधारित विजय दिवस मनाया जाएगा। 265 साल पहले मुगलों से किला जीतने की ऐतिहासिक घटना को नाट्य मंचन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए प्रस्तुत किया जाएगा।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 10 June 2026, 10:49 AM IST

Agra: आगरा किले की ऐतिहासिक दीवारों के बीच एक बार फिर ऐसा दृश्य देखने को मिलेगा, जहां सत्ता, संघर्ष और विजय की पुरानी कहानी नए अंदाज में जीवंत होगी। 12 जून को यहां होने वाला विजय दिवस सिर्फ एक आयोजन नहीं बल्कि इतिहास के उस अध्याय को दोबारा सामने लाने की कोशिश है, जिसमें 265 साल पहले महाराजा सूरजमल ने मुगलों से आगरा किले पर कब्जा किया था। यह वही किला है जो मुगल सत्ता और वैभव का प्रतीक माना जाता रहा है और अब उसी किले में विजय की गाथा गूंजने जा रही है।

जहांगीरी महल में होगा मुख्य आयोजन

आगरा किले के भीतर स्थित जहांगीरी महल को इस भव्य आयोजन का केंद्र बनाया गया है। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) से इसके लिए अनुमति मिल चुकी है। करीब 700 लोगों के शामिल होने की व्यवस्था की गई है, जिससे यह आयोजन बड़े स्तर पर ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दोनों रूपों में महत्वपूर्ण बन गया है।

सरकारी स्तर पर भव्य तैयारी

प्रदेश सरकार इस कार्यक्रम को विजय दिवस के रूप में मना रही है। इस मौके पर पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह समेत कई वरिष्ठ मंत्री शामिल होंगे। सरकार की कोशिश है कि इस आयोजन के जरिए युवा पीढ़ी को इतिहास की उन घटनाओं से जोड़ा जाए, जो आज भी भारतीय शौर्य और पराक्रम की पहचान मानी जाती हैं।

आगरा में होटल डील से शुरू हुआ विवाद, उधार लेने के बाद धमकी और धोखाधड़ी के आरोप

नाट्य मंचन से जीवंत होगा इतिहास

लखनऊ से आए कलाकार इस कार्यक्रम में महाराजा सूरजमल के जीवन, युद्ध रणनीति और पराक्रम से जुड़े प्रसंगों का मंचन करेंगे। इसके साथ ही आगरा किले में जाट शासन के दौर को भी नाटकीय रूप में दिखाया जाएगा। यह पूरा आयोजन इस तरह तैयार किया जा रहा है कि दर्शकों को लगे कि वे खुद उस ऐतिहासिक दौर का हिस्सा बन गए हैं।

कैसे मिली थी आगरा किले पर जीत

इतिहासकारों के अनुसार यह घटना 1761 की है, जब महाराजा सूरजमल ने सेनानायक बलराम के नेतृत्व में लगभग 4000 सैनिकों को भेजकर आगरा किले की घेराबंदी करवाई थी। 3 मई 1761 को शुरू हुई यह घेराबंदी करीब 40 दिन तक चली। उस समय किले में मुगल सेना कमजोर थी और केवल 400 सैनिक मौजूद थे। दबाव और रणनीति के चलते अंततः 12 जून 1761 को किला महाराजा सूरजमल के अधीन आ गया।

आगरा के युवाओं के लिए सुनहरा मौका, AI और बायोटेक्नोलॉजी जैसी नई ब्रांच को मिली मंजूरी, एडमिशन शुरू

किले से मिला था भारी खजाना

विजय के बाद किले से बड़ी मात्रा में धन, तोपें और गोला-बारूद मिला था। इतिहास में दर्ज है कि लगभग 50 लाख रुपये की संपत्ति उस समय हाथ लगी थी, जिसे भरतपुर और डीग किले में स्थानांतरित किया गया था। यह जीत केवल सैन्य सफलता नहीं बल्कि उस समय की सबसे बड़ी राजनीतिक और रणनीतिक उपलब्धियों में गिनी जाती है।

13 साल तक रहा जाट शासन

महाराजा सूरजमल के बाद आगरा किला करीब 13 वर्षों तक जाट शासन के अधीन रहा। इसके बाद 1774 में मुगल फौजदार मिर्जा नजफ खां ने किले पर दोबारा कब्जा कर लिया। फिर 1785 में महादजी सिंधिया ने इस ऐतिहासिक किले पर अधिकार स्थापित किया। इस तरह आगरा किले का इतिहास लगातार सत्ता परिवर्तन का गवाह रहा है।

700 लोगों की मौजूदगी में होगा आयोजन

ASI द्वारा 700 लोगों को कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति दी गई है। सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर विशेष इंतजाम किए गए हैं ताकि यह आयोजन शांतिपूर्ण और भव्य तरीके से संपन्न हो सके। प्रशासन इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक पर्यटन को बढ़ावा देने के रूप में भी देख रहा है।

Location :  Agra

Published :  10 June 2026, 10:49 AM IST