
प्रतीकात्मक तस्वीर (Img: AI)
Lucknow: यूपी की प्राइवेट यूनिवर्सिटीज आधुनिक सुविधाओं और बड़े दावों के साथ छात्रों को आकर्षित कर रही हैं, लेकिन कई संस्थानों में हॉस्टल और खाने की व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। कहीं खराब भोजन पर छात्रों का गुस्सा फूट रहा है तो कहीं अव्यवस्था के वीडियो वायरल हो रहे हैं। आखिर इन यूनिवर्सिटीज का संचालन कौन करता है और छात्रों को असल में कैसी सुविधाएं मिल रही हैं?
उत्तर प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में प्राइवेट यूनिवर्सिटीज की संख्या तेजी से बढ़ी है। बड़े कैंपस, हाईटेक क्लासरूम, प्लेसमेंट के दावे और आधुनिक सुविधाओं के नाम पर हर साल लाखों छात्र इन संस्थानों में दाखिला लेते हैं। लेकिन इन यूनिवर्सिटीज को लेकर अब छात्रों और अभिभावकों के बीच कई सवाल भी उठने लगे हैं। खासकर हॉस्टल और मेस की व्यवस्था को लेकर लगातार विवाद सामने आ रहे हैं।
यूपी की अधिकतर निजी यूनिवर्सिटीज ट्रस्ट या निजी शैक्षणिक समूहों द्वारा संचालित की जाती हैं। कई संस्थानों के पीछे बड़े कारोबारी घराने, शिक्षा समूह और राजनीतिक प्रभाव वाले लोग जुड़े होते हैं। कुछ यूनिवर्सिटीज धार्मिक और सामाजिक ट्रस्ट के तहत भी चलाई जाती हैं।
इन संस्थानों का दावा होता है कि वे छात्रों को बेहतर शिक्षा के साथ विश्वस्तरीय सुविधाएं दे रहे हैं। लेकिन कई बार जमीन पर हालात अलग दिखाई देते हैं।
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अधिकांश प्राइवेट यूनिवर्सिटीज में हॉस्टल आवंटन फीस और उपलब्धता के आधार पर किया जाता है। छात्रों को AC और Non-AC दोनों तरह के विकल्प दिए जाते हैं। कहीं दो छात्रों का कमरा होता है तो कहीं तीन या चार छात्रों को एक साथ रखा जाता है। हालांकि कई छात्रों का कहना है कि एडमिशन के दौरान जो सुविधाएं दिखाई जाती हैं, वास्तविक स्थिति कई बार उससे अलग होती है। कुछ जगहों पर साफ-सफाई, सुरक्षा और पानी जैसी मूल सुविधाओं को लेकर भी शिकायतें सामने आती रही हैं।
हाल ही में लखनऊ की एक निजी यूनिवर्सिटी में मेस के खाने को लेकर बड़ा विवाद सामने आया। छात्रों ने खराब भोजन की शिकायत की तो मामला इतना बढ़ गया कि कैंपस में हंगामा और तोड़फोड़ तक हो गई। भारी पुलिस फोर्स तैनात करनी पड़ी। छात्रों ने आरोप लगाया कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया।
बताया गया कि बीटेक और BCA के छात्रों ने भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाए थे। छात्रों का आरोप था कि मेस में दिए जा रहे खाने की स्थिति लगातार खराब होती जा रही थी।
यह पहला मामला नहीं है जब किसी निजी यूनिवर्सिटी की मेस व्यवस्था सवालों में आई हो। कुछ साल पहले लखनऊ के बाबू बनारसी दास (BBD) विश्वविद्यालय में हॉस्टल का खाना खाने के बाद 78 छात्र बीमार पड़ गए थे। कई छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने हॉस्टल और मेस का निरीक्षण भी किया था।
इसी तरह मथुरा के एक निजी कॉलेज के हॉस्टल मेस का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो में कथित तौर पर सड़ी सब्जियां और गंदगी दिखाई गई थी। इसके बाद छात्रों ने नाराजगी जताई और व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए।
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शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सभी निजी यूनिवर्सिटीज को एक नजर से देखना सही नहीं होगा। कई संस्थान छात्रों को बेहतर सुविधाएं और अच्छी शिक्षा भी दे रहे हैं। लेकिन लगातार सामने आ रहे विवाद यह जरूर बताते हैं कि कुछ संस्थानों में छात्रों की बुनियादी जरूरतों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा।
विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ बड़े कैंपस और विज्ञापन किसी यूनिवर्सिटी की गुणवत्ता तय नहीं करते। असली परीक्षा इस बात की होती है कि छात्रों को सुरक्षित माहौल, साफ भोजन और बेहतर रहने की सुविधा मिल रही है या नहीं।
बढ़ती फीस और बड़े दावों के बीच अभिभावक अब सिर्फ प्लेसमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, बल्कि हॉस्टल और मेस की वास्तविक स्थिति भी जानना चाहते हैं। कई छात्र अब सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा कर रहे हैं, जिससे इन मुद्दों पर बहस और तेज हो गई है। यूपी की प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ में पढ़ने वाले लाखों छात्रों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है, क्या उन्हें सिर्फ चमकदार कैंपस मिल रहा है या वास्तव में बेहतर और सुरक्षित शैक्षणिक माहौल भी?
Location : Lucknow
Published : 16 May 2026, 10:07 AM IST
Topics : BBD University Hostel Food Issue Student Protest University Management UP Private Universities