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सरयू का कटान बना काल! (IMG: Dynamite News)
Ballia: सरयू नदी का जलस्तर भले ही लगातार नीचे जा रहा हो, लेकिन बलिया के सुल्तानपुर पोखरा गांव में नदी का कटान अब लोगों के लिए नई मुसीबत बन गया है। रविवार देर रात कटान इतना तेज हुआ कि ग्रामीणों की आस्था का केंद्र कोयलावीर बाबा का सिद्ध स्थान और वहां खड़े विशाल बरगद व पीपल के पेड़ देखते ही देखते नदी की धारा में समा गए। सोमवार सुबह जब ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो वहां का नजारा देखकर सहम गए। सबसे बड़ी चिंता यह है कि नदी अब बस्ती से महज करीब 100 मीटर दूर रह गई है। ऐसे में करीब 150 परिवारों के सामने अपने घर और जमीन बचाने का संकट खड़ा हो गया है।
सुल्तानपुर पोखरा बस्ती के पास लंबे समय से सरयू नदी कटान कर रही है। ग्रामीणों के मुताबिक, नदी का रुख लगातार खेतों और खाली जमीन की ओर बढ़ रहा था। रविवार देर रात कटान की रफ्तार अचानक तेज हो गई। देखते ही देखते कोयलावीर बाबा का सिद्ध स्थान नदी की धारा की चपेट में आ गया। इस स्थान से ग्रामीणों की आस्था जुड़ी हुई थी। यहां मौजूद विशाल बरगद और पीपल के पेड़ भी नदी में समा गए।
सबसे गंभीर स्थिति यह है कि नदी का कटान अब सुल्तानपुर पोखरा बस्ती से करीब 100 मीटर की दूरी पर पहुंच गया है। बस्ती में करीब 150 परिवार रहते हैं। इनमें कई परिवारों के पक्के और कच्चे मकान कटान के संभावित दायरे में बताए जा रहे हैं। अगर कटान इसी रफ्तार से आगे बढ़ता रहा तो आने वाले समय में कई घरों पर सीधा खतरा पैदा हो सकता है। ग्रामीणों के मुताबिक, करीब 800 लोगों की आबादी इससे प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि गांव में रहने वाले परिवार अब अपने घरों और सामान की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
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सरयू नदी का जलस्तर इस समय कम हो रहा है। आम तौर पर जलस्तर कम होने के बाद ग्रामीणों को राहत की उम्मीद थी, लेकिन यहां स्थिति उलट नजर आ रही है। पानी घटने के साथ ही नदी का कटान तेज हो गया है। ग्रामीणों के मुताबिक बाढ़ के दौरान नदी का पानी घरों तक पहुंच गया था, लेकिन उस समय मकानों को सीधे तौर पर नुकसान नहीं हुआ। अब पानी कम हुआ तो नदी ने अपना रुख बदलते हुए जमीन काटना शुरू कर दिया है।
कटान की गंभीर स्थिति को देखते हुए रविवार को विधायक केतकी सिंह ने जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह के साथ मौके का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान उन्होंने बाढ़ विभाग के अधिकारियों को जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए थे। विधायक ने बाढ़ विभाग के सहायक अभियंता देवेश गंगवार को तत्काल कटानरोधी कार्य शुरू कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद बाढ़ खंड की ओर से कटान रोकने के लिए जियो बैग और मिट्टी से भरी बोरियों का इस्तेमाल शुरू किया गया।
बाढ़ विभाग की ओर से नदी के कटान को रोकने के लिए जियो बैग और मिट्टी से भरी बोरियां लगाई जा रही हैं। इनका उद्देश्य नदी की धारा के सीधे जमीन से टकराने को कम करना और कटान की रफ्तार को रोकना है। लेकिन जिस तेजी से नदी किनारे की जमीन कट रही है, उसे देखते हुए ग्रामीण बड़े स्तर पर कटानरोधी काम की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर समय रहते प्रभावी तरीके से काम नहीं हुआ तो नदी बस्ती तक पहुंच सकती है।
सुल्तानपुर पोखरा बस्ती के लोगों के सामने अब सिर्फ खेत और जमीन बचाने की चुनौती नहीं है, बल्कि घरों को बचाने का संकट भी खड़ा हो गया है। अगर नदी इसी तरह जमीन काटती रही तो करीब 150 परिवारों को अपना घर छोड़ने की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने मेहनत से अपने घर बनाए हैं और उनके सामने अचानक विस्थापन का खतरा खड़ा हो गया है। कई परिवार आर्थिक रूप से इतने सक्षम नहीं हैं कि वे कहीं दूसरी जगह जाकर नया घर बना सकें।
ग्राम प्रधान सुग्रीव यादव, निर्भय नारायण सिंह, शिवजी सिंह, भरत सिंह, संजय सिंह और विजय यादव समेत अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने मौके का निरीक्षण किया है और कटानरोधी काम के निर्देश भी दिए गए हैं, लेकिन अब जरूरत इन कामों को तेजी से जमीन पर उतारने की है। ग्रामीण चाहते हैं कि नदी के कटान को बस्ती तक पहुंचने से पहले रोका जाए।
Location : Ballia
Published : 28 September 2026, 7:29 PM IST