संभल बवाल मामले में 22 पुलिसकर्मियों पर FIR के CJM आदेश को चुनौती देते हुए सरकार हाईकोर्ट पहुंची है। तत्कालीन CO और कोतवाल समेत पुलिसकर्मियों के खिलाफ दर्ज मामले को निरस्त कराने की मांग की गई है। सुनवाई अभी बाकी है।

संभल हिंसा (img source: google)
Sambhal: संभल बवाल मामले में 22 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) के आदेश के खिलाफ अब सरकार हाईकोर्ट पहुंच गई है। तत्कालीन सीओ अनुज चौधरी और कोतवाल अनुज तोमर समेत पुलिसकर्मियों पर मुकदमा दर्ज करने के आदेश को निरस्त कराने के लिए हाईकोर्ट में रिवीजन याचिका दाखिल की गई है। हालांकि, इस याचिका पर फिलहाल सुनवाई नहीं हुई है।
संभल के पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि सरकार की ओर से यह रिवीजन याचिका नियोजित की गई है, जिसमें निचली अदालत के आदेश को रद्द करने की मांग की गई है। इसके अलावा तत्कालीन सीओ और कोतवाल ने भी व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट में आदेश को चुनौती दी है।
यह मामला संभल के खग्गू सराय निवासी यामीन की अर्जी से सामने आया था। यामीन का आरोप है कि 24 नवंबर 2024 की सुबह उनका बेटा आलम बिस्कुट का ठेला लेकर घर से निकला था। उसी समय संभल की जामा मस्जिद में सर्वे के दौरान भारी भीड़ जमा थी। आरोप है कि हालात बिगड़ने पर पुलिस ने फायरिंग शुरू कर दी, जिसमें आलम को तीन गोलियां लगीं।
यामीन का कहना है कि पुलिस ने उनके बेटे को ही आरोपी बना दिया, जिसके डर से उन्होंने पहचान छिपाकर मेरठ में उसका इलाज कराया। इस मामले में सीजेएम कोर्ट ने 9 जनवरी को 22 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था।
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सीजेएम के इस आदेश के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था। कुछ ही दिनों बाद आदेश देने वाले तत्कालीन सीजेएम विभांशु सुधीर का सुल्तानपुर तबादला कर दिया गया। इसे लेकर प्रदेशभर में चर्चाएं तेज हो गईं और कई जिलों में वकीलों ने तबादले पर सवाल उठाते हुए ज्ञापन भी सौंपे थे।
अब सरकार की ओर से हाईकोर्ट में दायर रिवीजन याचिका के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। सबकी नजरें अब हाईकोर्ट की सुनवाई और फैसले पर टिकी हैं, जो इस संवेदनशील मामले की दिशा तय करेगा।