खाकी और दलालों का गठजोड़: मेरठ के लिसाड़ी गेट थाने में पुलिस की शह पर चल रहा था वसूली का खेल, दो दरोगा सस्पेंड

मेरठ के लिसाड़ी गेट थाने में पुलिस की मिलीभगत से चल रहे वसूली रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। नोएडा के फर्नीचर कारोबारी से साइबर क्राइम की शिकायत के नाम पर 4.70 लाख रुपये ऐंठे गए। इस मामले में मेरठ के दरोगा अंकित सागर, हेड कांस्टेबल नीरज और मुजफ्फरनगर के दरोगा आरिफ अली को सस्पेंड कर दिया गया है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 23 October 2026, 3:04 PM IST

Meerut: जहां एक ओर थानों में दलालों के प्रवेश पर रोक के बड़े-बड़े दावे और पोस्टर लगाए जाते हैं, वहीं मेरठ के लिसाड़ी गेट थाने के भीतर से ही पुलिस और दलालों के गठजोड़ का एक बड़ा खेल सामने आया है। पुलिस की खुली शह पर चल रहे इस वसूली गैंग ने एक साइबर कैफे संचालक के साथ मिलकर नोएडा के एक फर्नीचर कारोबारी से लाखों रुपये ऐंठ लिए। इस सनसनीखेज मामले में कार्रवाई करते हुए दो दरोगाओं को निलंबित कर दिया गया है, जबकि एक क्षेत्राधिकारी (सीओ) की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है।

साइबर क्राइम की शिकायत के नाम पर 4.70 लाख की अवैध वसूली

यह पूरा मामला नोएडा के एक फर्नीचर कारोबारी से जुड़ा है। कारोबारी को साइबर क्राइम की एक फर्जी शिकायत में उलझाने की धमकी देकर कुल 4.70 लाख रुपये की वसूली की गई। इस शातिर योजना का मुख्य सूत्रधार मेरठ के दरोगा अंकित सागर और हेड कांस्टेबल नीरज थे, जिन्होंने मिलकर यह पूरा जाल बुना था। मामला संज्ञान में आने के बाद दोनों पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।

मुजफ्फरनगर में पत्नी ने लगाया गंभीर आरोप, SSP से बोली मैं अपनी जान बचाकर आई हूं…

इस अवैध वसूली के दायरे में सिर्फ मेरठ के पुलिसकर्मी ही नहीं, बल्कि दूसरे जिले के अधिकारी भी शामिल पाए गए। इसी प्रकरण में मुजफ्फरनगर में तैनात दरोगा आरिफ अली ने भी पीड़ित फर्नीचर कारोबारी से एक लाख रुपये की वसूली की थी। जांच के बाद दरोगा आरिफ अली पर भी विभागीय गाज गिर चुकी है।

थाने के कंप्यूटर और पुलिस की राइफल तक थी साइबर संचालक की पहुंच

इस पूरे खेल का सबसे हैरान करने वाला पहलू साइबर कैफे संचालक शादाब राव का रसूख और पुलिस विभाग के साथ उसकी गहरी सांठगांठ है। स्थिति यह थी कि शादाब बेखौफ होकर थाने के भीतर पुलिस की सरकारी राइफल लेकर खड़ा होता था और थाने के कंप्यूटर सिस्टम तक उसकी सीधी पहुंच थी।

गोरखपुर में शिक्षक MLC चुनाव को लेकर हाई अलर्ट! मतदान केंद्र के अंदर मोबाइल ले जाने पर रोक, खुद व्यवस्था परखने पहुंचे DM

भ्रष्टाचार की हदें तब पार हो गईं जब थाने के सिस्टम से दरोगा द्वारा भेजी गई एक गोपनीय ईमेल का फोटो खींचकर शादाब ने खुद पीड़ित शिकायतकर्ता को भेजा था, ताकि उस पर दबाव बनाया जा सके।

सीओ की भूमिका भी आई संदेह के घेरे में

इस वसूली कांड और खाकी के इस दुर्दांत गठजोड़ में केवल मैदानी स्तर के पुलिसकर्मी ही शामिल नहीं थे, बल्कि शुरुआती जांच में एक क्षेत्राधिकारी (सीओ) की भूमिका भी इस पूरे रैकेट को संरक्षण देने के रूप में सामने आई है। बहरहाल, इस गंभीर मामले के पता लगने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है और उच्चाधिकारियों द्वारा मामले की गहराई से जांच की जा रही है।

Location :  Meerut

Published :  23 October 2026, 3:03 PM IST